दुनिया में बसे हरियाणवियों को जोड़ने की पहल, विदेशों में बनेंगे पंजीकृत संगठन; संस्कृति से निवेश तक बनेगा संपर्क का सेतु

दुनिया में बसे हरियाणवियों को जोड़ने की पहल, विदेशों में बनेंगे पंजीकृत संगठन; संस्कृति से निवेश तक बनेगा संपर्क का सेतु

हरियाणा की पहचान अब केवल कृषि, खेल, सेना और औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं रह गई है। प्रदेश की प्रतिभा और मेहनत ने देश की सीमाओं से बाहर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हरियाणा मूल के लोग आज यूरोप, अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, खाड़ी देशों और अफ्रीका समेत दुनिया के कई हिस्सों में रह रहे हैं। किसी ने विदेश में कारोबार स्थापित किया है, तो कोई शिक्षा, चिकित्सा, तकनीक, प्रशासन, वित्त, उद्योग और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहा है। बड़ी संख्या में हरियाणवी परिवार लंबे समय से विदेशों में बसे हुए हैं, लेकिन अपनी जन्मभूमि, गांव और सामाजिक-सांस्कृतिक जड़ों से उनका जुड़ाव अब भी बना हुआ है।

विदेश में बसे इन्हीं हरियाणवियों को संगठित मंच से जोड़ने के लिए हरियाणा सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत विदेशों में रहने वाले हरियाणा मूल के लोगों को स्थानीय स्तर पर पंजीकृत ‘हरियाणवी’ एसोसिएशन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि अलग-अलग देशों और शहरों में रहने वाले हरियाणवियों के बीच ऐसा संस्थागत नेटवर्क तैयार हो, जो जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद कर सके और प्रदेश तथा विदेशों में बसे लोगों के बीच संपर्क को मजबूत बना सके।

विदेश सहयोग विभाग करेगा समन्वय

इस पहल के तहत विदेश में रहने वाले हरियाणा मूल के लोगों को एक साझा मंच से जोड़ने की योजना है। इसमें उद्योगपति, कारोबारी, पेशेवर, शिक्षाविद, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और आम प्रवासी परिवार शामिल हो सकते हैं। सरकार का विदेश सहयोग विभाग ऐसे संगठनों के पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने की दिशा में काम करेगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य विदेश में रहने वाले हरियाणवियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर संपर्क का एक व्यवस्थित माध्यम तैयार करना है। विदेश में किसी व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर जानकारी या सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता हो तो संगठन उसके लिए संपर्क और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में भूमिका निभा सकता है।

सरकार की सोच यह है कि अलग-अलग देशों में बिखरे हुए हरियाणा मूल के लोगों की व्यक्तिगत उपलब्धियों को एक सामूहिक नेटवर्क का हिस्सा बनाया जाए। इससे न केवल प्रवासी समुदाय के बीच आपसी संपर्क बढ़ेगा, बल्कि हरियाणा के साथ उनका संस्थागत जुड़ाव भी मजबूत हो सकेगा।

रोजगार से लेकर कारोबार तक मदद का नेटवर्क

विदेश में जाकर नई शुरुआत करने वाले युवाओं के सामने कई तरह की चुनौतियां आती हैं। किसी को रोजगार तलाशने में परेशानी होती है, तो किसी के सामने स्थानीय कानून और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझने की चुनौती होती है। भाषा, आवास, शिक्षा, दस्तावेज, कारोबारी नियम और स्थानीय सामाजिक परिस्थितियां भी नए प्रवासियों के लिए महत्वपूर्ण विषय होते हैं।

ऐसे में पहले से वहां रह रहे हरियाणा मूल के लोगों का संगठित नेटवर्क नए लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। प्रस्तावित एसोसिएशन स्थानीय स्तर पर संपर्क और सहयोग का माध्यम बन सकती है। उदाहरण के तौर पर विदेश पहुंचने वाले किसी हरियाणवी युवा को नौकरी के अवसरों की जानकारी चाहिए, किसी विद्यार्थी को शिक्षा से संबंधित मार्गदर्शन की आवश्यकता है या किसी कारोबारी को स्थानीय बाजार और व्यापारिक संपर्कों की तलाश है, तो समुदाय के अनुभवी लोग अपने संपर्कों के माध्यम से मदद कर सकते हैं।

इसी तरह विदेश में रहने वाले परिवारों को किसी सामाजिक या सामुदायिक आयोजन के लिए सहयोग चाहिए तो संगठन उनके लिए साझा मंच उपलब्ध करा सकता है। इसका उद्देश्य किसी सरकारी व्यवस्था का विकल्प बनना नहीं, बल्कि समुदाय के भीतर आपसी सहयोग और संपर्क को मजबूत करना होगा।

नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने पर जोर

विदेश में जन्मी और पली-बढ़ी हरियाणवी मूल की नई पीढ़ी का अपनी पारंपरिक संस्कृति से संपर्क बनाए रखना भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। विदेशों में रहने वाले बच्चों और युवाओं के लिए हरियाणवी भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक खान-पान, पहनावा, रीति-रिवाज और ग्रामीण जीवन की परंपराओं से परिचय कराना सामुदायिक संगठनों के माध्यम से आसान हो सकता है।

हरियाणा के ग्रामीण समाज की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। सांग, रागनी, लोकगीत, फाग, पारंपरिक खेल और ग्रामीण उत्सव प्रदेश की सामाजिक विरासत का हिस्सा रहे हैं। विदेश में रहने वाले परिवार इन परंपराओं को अपने बच्चों तक पहुंचाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।

ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिलेगा कि उनके परिवारों की जड़ें कहां से जुड़ी हैं। इससे विदेश में रहते हुए भी अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव कायम रखने में मदद मिल सकती है।

हरियाणा के लिए बनेगा वैश्विक संपर्क तंत्र

सरकार की इस पहल का एक दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष हरियाणा और विदेशों में बसे उसके मूल निवासियों के बीच आर्थिक एवं कारोबारी संपर्क बढ़ाना भी है। विदेश में रह रहे हरियाणा मूल के लोगों का अलग-अलग देशों के बाजारों, उद्योगों और कारोबारी संस्थानों से संपर्क है। कई लोग अपने-अपने क्षेत्रों में सफल व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।

यदि ऐसे लोगों को एक व्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा जाता है, तो हरियाणा के उद्यमियों और विदेशों में बसे कारोबारियों के बीच संवाद के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं पर बातचीत के लिए मंच उपलब्ध हो सकता है।

हरियाणा में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा क्षेत्र में गतिविधियां हैं। विदेशों में बसे हरियाणा मूल के कारोबारी इन क्षेत्रों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों और व्यावसायिक व्यवस्थाओं की जानकारी रखते हैं। सामुदायिक नेटवर्क के माध्यम से इस अनुभव और संपर्क को प्रदेश के विकास से जोड़ने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।

निवेश के साथ कौशल और अनुभव भी आएगा काम

प्रवासी हरियाणवियों के पास केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों में काम करने का अनुभव भी है। विदेशों में विकसित कारोबारी तौर-तरीके, नई तकनीक, प्रबंधन प्रणाली, कौशल विकास और बाजार की समझ हरियाणा के युवाओं तथा उद्यमियों के लिए उपयोगी हो सकती है।

ऐसे में प्रस्तावित संगठन ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का माध्यम भी बन सकते हैं। विदेशों में काम कर रहे विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। उद्योग और शिक्षा से जुड़े लोग विद्यार्थियों तथा युवाओं के लिए मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। इससे विदेश में स्थापित हरियाणवी समुदाय और प्रदेश में रह रहे युवाओं के बीच पेशेवर संपर्क विकसित हो सकता है।

संकट की स्थिति में सामुदायिक सहयोग

विदेश में रहने वाले भारतीयों के सामने कभी-कभी अचानक ऐसी परिस्थितियां भी पैदा हो जाती हैं, जिनमें स्थानीय स्तर पर सहायता की आवश्यकता होती है। बीमारी, दुर्घटना, रोजगार संबंधी परेशानी, दस्तावेजों से जुड़ी समस्या या किसी अन्य आपात स्थिति में अपने समुदाय के लोगों से संपर्क काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

पंजीकृत एसोसिएशन इस तरह की परिस्थितियों में समुदाय के भीतर संपर्क स्थापित करने का माध्यम बन सकती है। यदि किसी शहर या देश में बड़ी संख्या में हरियाणा मूल के लोग एक-दूसरे से जुड़े हों, तो जरूरत के समय सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय संभव हो सकता है।

यह नेटवर्क विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा की भावना को भी मजबूत कर सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जो किसी नए देश में हाल ही में पहुंचे हैं और वहां के सामाजिक वातावरण से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।

गांव और मातृभूमि से भी मजबूत होगा रिश्ता

विदेश में रहने वाले हरियाणवियों का अपने गांवों और पैतृक क्षेत्रों से भावनात्मक जुड़ाव अक्सर मजबूत रहता है। अनेक प्रवासी अपने गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों और अन्य सामुदायिक कार्यों में सहयोग करते हैं। संगठित नेटवर्क बनने के बाद इस तरह के प्रयासों को अधिक व्यवस्थित रूप देने की संभावनाएं बन सकती हैं।

गांवों के विकास से जुड़े किसी प्रोजेक्ट में विदेश में बसे लोग योगदान देना चाहें तो उन्हें स्थानीय स्तर पर सही जानकारी और संपर्क उपलब्ध कराया जा सकता है। स्कूलों, पुस्तकालयों, खेल सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं या कौशल विकास से जुड़े प्रयासों में भी प्रवासी समुदाय की भागीदारी के अवसर तलाशे जा सकते हैं।

विदेशों में हरियाणा की पहचान को मिलेगा नया मंच

हरियाणा की अंतरराष्ट्रीय पहचान का एक बड़ा हिस्सा वहां के लोगों की उपलब्धियों से बनता है। खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने देश और दुनिया में नाम कमाया है। सेना में हरियाणा की मजबूत परंपरा रही है। कृषि और उद्यमिता में भी प्रदेश के लोगों की भूमिका रही है। अब विदेशों में बसे हरियाणवी भी अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

ऐसे में विदेशों में पंजीकृत हरियाणवी संगठनों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है। विभिन्न देशों में हरियाणा दिवस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं, युवा सम्मेलन और व्यावसायिक परिचर्चाएं आयोजित की जा सकती हैं।

इन आयोजनों के माध्यम से विदेशों में जन्मी नई पीढ़ी को हरियाणा की विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ स्थानीय समाज को भी प्रदेश की संस्कृति और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

सरकार और प्रवासी समुदाय के बीच सीधा संपर्क

इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य सरकार और विदेश में बसे हरियाणा मूल के लोगों के बीच संवाद का संस्थागत माध्यम तैयार करना भी है। अलग-अलग देशों में रहने वाले लोगों की जरूरतें और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। ऐसे में पंजीकृत संगठनों के पदाधिकारियों के साथ नियमित संपर्क के जरिए विभिन्न मुद्दों को व्यवस्थित रूप से सामने लाया जा सकता है।

विदेश सहयोग विभाग इन संगठनों के साथ समन्वय करते हुए विदेशों में रहने वाले हरियाणवियों से जुड़े विषयों को समझने और संबंधित स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराने का माध्यम बन सकता है। इससे व्यक्तिगत संपर्कों पर निर्भरता कम करते हुए एक व्यवस्थित संवाद तंत्र विकसित किया जा सकेगा।

दुनिया में फैले हरियाणवियों को एक पहचान के तहत जोड़ने की कोशिश

हरियाणा से विदेश जाने वालों की संख्या और उनके कार्यक्षेत्रों की विविधता को देखते हुए यह पहल व्यापक सामाजिक नेटवर्क का आधार बन सकती है। इसका केंद्र केवल निवेश या कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार, शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक सहयोग, युवा संपर्क और आपसी नेटवर्किंग जैसे विषय भी इसके दायरे में आ सकते हैं।

सरकार की इस पहल के जरिए कोशिश है कि विदेश में रहने वाला हरियाणा मूल का व्यक्ति खुद को अकेला महसूस न करे और जरूरत पड़ने पर उसे अपने समुदाय के लोगों तक पहुंचने का माध्यम उपलब्ध हो। साथ ही विदेश में सफलतापूर्वक स्थापित हरियाणवी अपने अनुभव और संपर्कों को प्रदेश की नई पीढ़ी तथा आर्थिक विकास से जोड़ सकें।

इस तरह प्रस्तावित ‘हरियाणवी’ एसोसिएशन विदेशों में बसे हरियाणा मूल के लोगों के लिए सामुदायिक मंच के साथ-साथ हरियाणा और दुनिया के बीच संपर्क की एक कड़ी के रूप में विकसित हो सकती हैं। आने वाले समय में इन संगठनों की भूमिका किस प्रकार आकार लेती है, यह उनके गठन, स्थानीय भागीदारी और सरकार के साथ समन्वय की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। फिलहाल पहल का व्यापक उद्देश्य विदेशों में बसे हरियाणवियों को उनकी जड़ों से जोड़े रखना और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद इस प्रतिभा व अनुभव को एक साझा नेटवर्क के माध्यम से हरियाणा से जोड़ना है।