देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 के लिए कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और वज्रपात की संभावना जताई है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश समेत कुल 14 राज्यों में अगले कुछ घंटों के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। कई इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और जोरदार बारिश होने का अनुमान है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने और सक्रिय मानसूनी सिस्टम की वजह से उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के बड़े हिस्से में वर्षा की गतिविधियां बढ़ गई हैं। यही कारण है कि कई राज्यों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रही। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिनभर अलग-अलग इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसके साथ ही तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है, जिससे लोगों को उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कई निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
उत्तर प्रदेश में भी मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। मौसम विभाग ने पूर्वी, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, नोएडा, मेरठ, आगरा और आसपास के जिलों में तेज बारिश का असर देखने को मिल सकता है। कुछ स्थानों पर अत्यधिक वर्षा होने की भी आशंका है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बिहार के अधिकांश हिस्सों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। कई जिलों में बादल छाए रहने के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने लोगों से खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की अपील की है। किसानों को भी खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड के कई इलाकों में भी मौसम का मिजाज बदलने वाला है। इन राज्यों में कहीं-कहीं तेज बारिश के साथ आंधी चल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में अल्प समय में अच्छी बारिश दर्ज होने की संभावना है, जिससे तापमान में कमी आएगी। हालांकि, तेज हवा और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है। नदियों और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मानसूनी परिस्थितियां अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती हैं। बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने और मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने के कारण एक अगस्त तक कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है। यही वजह है कि विभिन्न राज्यों के मौसम केंद्र लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। ऐसे क्षेत्रों में जलभराव, सड़क यातायात प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। नगर निकायों और जिला प्रशासन को आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
मौसम विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करें। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि तेज बारिश और फिसलन दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। तेज हवा के दौरान कमजोर पेड़ों, पुराने भवनों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।
कृषि क्षेत्र के लिए भी मौसम विभाग ने अलग से परामर्श जारी किया है। किसानों से कहा गया है कि गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना के दौरान खेतों में काम करने से बचें। जिन क्षेत्रों में फसल कटाई या अन्य कृषि कार्य चल रहे हैं, वहां मौसम सामान्य होने का इंतजार करना बेहतर रहेगा। भारी बारिश वाले इलाकों में खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने की भी सलाह दी गई है।
इस बीच पूर्वोत्तर भारत, विशेष रूप से असम में बाढ़ की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। राहत एवं बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं, जबकि प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास में जुटा हुआ है।
ताजा जानकारी के अनुसार, असम में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई है। वर्तमान समय में राज्य के सात जिले बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, बिश्वनाथ और कामरूप (मेट्रो) सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इन जिलों में बड़ी संख्या में गांव अब भी जलमग्न हैं और हजारों परिवारों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ के कारण 21 राजस्व सर्किल और 551 गांव प्रभावित हुए हैं। लगभग 3 लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई परिवारों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है, जबकि प्रशासन भोजन, पेयजल और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लगा हुआ है।
बाढ़ का असर केवल आबादी तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों हेक्टेयर में फैली फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पशुपालन पर भी असर पड़ा है और कई स्थानों पर मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रशासन के अनुसार, मौजूदा बाढ़ की स्थिति में हाल के दिनों में तीन और लोगों की जान गई है। इनमें दो मौतें शिवसागर जिले में और एक गोलाघाट जिले में दर्ज की गई हैं। राहत एवं बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंच रहे हैं और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मौसम विभाग और राज्य सरकारों ने लोगों से अपील की है कि वे आधिकारिक मौसम बुलेटिन और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। खराब मौसम, तेज बारिश और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बनी रहने की संभावना को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।




