शिमला/कांगड़ा। कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की बोह वैली में बादल फटने से हुई भारी तबाही के बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने राहत शिविर में रह रहे परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस कठिन समय में हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना भी है।
मुख्यमंत्री सबसे पहले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बोह में बनाए गए राहत शिविर पहुंचे, जहां उन्होंने बादल फटने की घटना से प्रभावित परिवारों से विस्तार से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से राहत कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि किसी भी पीड़ित परिवार को सहायता के लिए इंतजार न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत वितरण, पुनर्वास और जरूरी दस्तावेजों की पुनः उपलब्धता का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि प्रभावित परिवार जल्द सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
मुख्यमंत्री ने राहत पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि जिन परिवारों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, उन्हें 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा घरेलू सामान, बर्तन और कपड़ों की व्यवस्था के लिए 1 लाख रुपये अलग से दिए जाएंगे। जिन प्रभावित परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है और जिनका सब कुछ इस आपदा में नष्ट हो गया है, उन्हें सरकार की ओर से उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध कराकर स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आपदा में पशुधन का नुकसान झेलने वाले परिवारों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। गाय या भैंस की मृत्यु होने पर 55 हजार रुपये, जबकि बकरी की मृत्यु पर 15 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। जिन किसानों की खेती प्रभावित हुई है, उन्हें प्रति कनाल 5 हजार रुपये की दर से फसल क्षति का मुआवजा मिलेगा। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों को अगले छह महीने तक मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जिन परिवारों को फिलहाल किराये के मकानों में रहना पड़ रहा है, उन्हें प्रति माह 5 हजार रुपये की किराया सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक सरकार इन परिवारों की हर संभव सहायता करती रहेगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी और आपदा जैसी परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं और पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर तेजी से कार्य करने के निर्देश भी दिए।
इस दौरान शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को राहत एवं पुनर्वास कार्यों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।
प्रशासन ने भी प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक 25 प्रभावित परिवारों को 25-25 हजार रुपये की अंतरिम सहायता जारी की जा चुकी है। इसके अलावा 16 अन्य परिवारों को 10-10 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक मदद प्रदान की गई है। प्रशासन का कहना है कि राहत वितरण का कार्य लगातार जारी है और पात्र सभी परिवारों तक सहायता पहुंचाई जाएगी।
आपदा के दौरान जिन लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए, उनके लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। अब तक 13 राजस्व प्रमाण पत्र तैयार किए जा चुके हैं, जबकि बोनाफाइड, शैक्षणिक और अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र दोबारा जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए शिविर स्तर पर ही अधिकांश सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्थायी पुनर्वास के लिए प्रशासन ने उपयुक्त भूमि की पहचान का कार्य भी शुरू कर दिया है। संबंधित विभागों की टीमें सुरक्षित स्थानों का सर्वेक्षण कर रही हैं, ताकि प्रभावित परिवारों को भविष्य में किसी प्राकृतिक आपदा का खतरा न रहे। सरकार का लक्ष्य है कि पुनर्वास केवल औपचारिकता न होकर दीर्घकालिक और सुरक्षित समाधान बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में वृद्धि हुई है। भारी वर्षा, बादल फटना, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं राज्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे के विकास की व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों, ढांचागत मजबूती, नदी एवं नालों के संरक्षण, सड़क सुरक्षा, पुलों के निर्माण और आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली को विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार राहत नियमों में संशोधन कर प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। साथ ही सरकार ने विशेष आपदा राहत कोष का गठन भी किया है, ताकि आपदा आने की स्थिति में राहत कार्यों के लिए धन की कमी आड़े न आए और पीड़ितों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा से घुड़घुं, भंगार और सपेड़ा गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कुल 25 परिवार इस आपदा की चपेट में आए हैं। इनमें घुड़घुं गांव के 18 परिवारों के 52 सदस्य, भंगार गांव के 3 परिवारों के 16 सदस्य तथा सपेड़ा गांव के 4 परिवारों के 16 सदस्य शामिल हैं। कई मकानों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
विशेषज्ञों की जांच के बाद सुरक्षा कारणों से सपेड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है। इन मकानों में फिलहाल लोगों के रहने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन लगातार भू-वैज्ञानिकों और आपदा विशेषज्ञों की मदद से क्षेत्र का निरीक्षण कर रहा है ताकि भविष्य में किसी और दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके।
स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान अपनी समस्याएं भी उनके सामने रखीं। प्रभावित परिवारों ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित राहत पैकेज से उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा, लेकिन वे जल्द से जल्द स्थायी पुनर्वास चाहते हैं ताकि सामान्य जीवन फिर से शुरू कर सकें। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्षों की जमा पूंजी, घर, खेती और घरेलू सामान इस आपदा में खो दिया है।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि सरकार केवल मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानेगी, बल्कि प्रत्येक परिवार को सुरक्षित आवास, आवश्यक सुविधाएं और सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत और पुनर्वास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए तथा किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बोह वैली में आई इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन और संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत आधारभूत ढांचे की आवश्यकता को उजागर किया है। राज्य सरकार का कहना है कि राहत कार्यों के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने, सुरक्षित पुनर्वास सुनिश्चित करने और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने पर केंद्रित है।



