तकिया साफ न करने की आदत बन सकती है बीमारी की वजह, जानिए सही समय और तरीका

तकिया साफ न करने की आदत बन सकती है बीमारी की वजह, जानिए सही समय और तरीका

तकिए की सफाई क्यों है जरूरी? अंदर छिपी गंदगी आपकी सेहत को कर सकती है प्रभावित

अक्सर लोग बेडशीट और तकिए के कवर को नियमित रूप से बदलने को ही पर्याप्त सफाई मान लेते हैं, लेकिन तकिए के अंदर जमा होने वाली गंदगी पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। रोजाना कई घंटे तक इस्तेमाल होने वाला तकिया धीरे-धीरे पसीने, त्वचा से निकलने वाले तेल, डेड स्किन सेल्स, धूल के कण और बैक्टीरिया को अपने अंदर जमा करता रहता है। यही वजह है कि बाहर से साफ दिखाई देने वाला तकिया अंदर से काफी गंदा हो सकता है।

नींद के दौरान हमारा चेहरा और सिर लगातार तकिए के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में तकिए के अंदर मौजूद धूल, एलर्जन और सूक्ष्म जीव त्वचा और सांस के जरिए शरीर को प्रभावित कर सकते हैं। अगर लंबे समय तक तकिए की सफाई न की जाए, तो यह नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करने के साथ-साथ एलर्जी, त्वचा संबंधी परेशानियों और सांस से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तकिए की नियमित सफाई करना उतना ही जरूरी है जितना कि चादर और तकिए के कवर को धोना। सामान्य परिस्थितियों में हर 3 से 6 महीने के बीच तकिए को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। हालांकि, जिन लोगों को अधिक पसीना आता है, जिन्हें धूल या एलर्जी की समस्या रहती है या जो अपने पालतू जानवरों के साथ सोते हैं, उन्हें तकिए की सफाई ज्यादा जल्दी-जल्दी करनी चाहिए।

तकिए में जमा होने वाली गंदगी से बढ़ सकता है एलर्जी का खतरा

तकिया लगातार इस्तेमाल होने के कारण धूल के कण और डस्ट माइट्स के लिए अनुकूल जगह बन सकता है। डस्ट माइट्स बेहद छोटे जीव होते हैं, जो आमतौर पर बिस्तर, गद्दे और तकिए में पाए जाते हैं। इनके कारण कुछ लोगों में एलर्जी की समस्या बढ़ सकती है।

गंदे तकिए में जमा एलर्जन सांस के माध्यम से शरीर में पहुंच सकते हैं और छींक, नाक बंद होना, खांसी, गले में जलन या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। खासतौर पर अस्थमा या एलर्जी से परेशान लोगों के लिए साफ तकिया इस्तेमाल करना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसके अलावा, तकिए में जमा पसीना और नमी बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा दे सकती हैं। लंबे समय तक नमी बनी रहने पर उसमें फफूंदी भी विकसित हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

गंदा तकिया त्वचा की समस्याओं को भी बढ़ा सकता है

तकिया सीधे चेहरे के संपर्क में रहता है, इसलिए इसकी सफाई का असर त्वचा पर भी पड़ता है। चेहरे से निकलने वाला तेल, पसीना और डेड स्किन सेल्स तकिए के कपड़े और अंदरूनी हिस्से में जमा होते रहते हैं।

जब यही गंदगी बार-बार त्वचा के संपर्क में आती है, तो इससे मुंहासे, रैशेज, खुजली और त्वचा में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उनके लिए तकिए की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

तकिए का कवर हर सप्ताह बदलना और धोना एक अच्छी आदत मानी जाती है, क्योंकि यह गंदगी को सीधे तकिए के अंदर पहुंचने से काफी हद तक रोकता है। हालांकि, केवल कवर बदलने से तकिए के अंदर जमा गंदगी पूरी तरह खत्म नहीं होती।

तकिए को कितने समय बाद धोना चाहिए?

तकिए को धोने का समय उसके इस्तेमाल और व्यक्ति की आदतों पर निर्भर करता है। सामान्य रूप से हर 3 से 6 महीने में तकिए की गहरी सफाई करना बेहतर माना जाता है।

अगर घर में किसी व्यक्ति को ज्यादा पसीना आता है, त्वचा संबंधी समस्या है, एलर्जी रहती है या पालतू जानवर बिस्तर पर आते हैं, तो तकिए को 2 से 3 महीने के अंतराल में साफ करना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

इसके साथ ही तकिए के कवर को सप्ताह में कम से कम एक बार धोना चाहिए। गर्मियों के मौसम में जब पसीना अधिक आता है, तब कवर को इससे भी ज्यादा बार बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

अलग-अलग प्रकार के तकियों की सफाई का सही तरीका

हर तकिए को एक ही तरीके से साफ नहीं किया जा सकता। तकिए के अंदर इस्तेमाल होने वाले मटेरियल के अनुसार सफाई का तरीका बदल जाता है। गलत तरीके से सफाई करने पर तकिए का आकार खराब हो सकता है या उसका सपोर्ट कम हो सकता है।

इसलिए तकिए को धोने से पहले उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों को जरूर पढ़ना चाहिए। इससे यह पता चलता है कि तकिया मशीन वॉश के लिए सुरक्षित है या उसे हाथ से साफ करना बेहतर होगा।

माइक्रोफाइबर और कॉटन तकिए की सफाई

माइक्रोफाइबर या कॉटन से भरी तकियों को आमतौर पर वॉशिंग मशीन में साफ किया जा सकता है। इन्हें धोते समय हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना चाहिए और बहुत ज्यादा कठोर केमिकल वाले क्लीनर से बचना चाहिए।

मशीन में धोते समय हल्के मोड का इस्तेमाल करना बेहतर होता है। धोने के बाद तकिए को पूरी तरह सुखाना जरूरी है, क्योंकि अंदर नमी रह जाने से बदबू और फफूंदी की समस्या पैदा हो सकती है।

मेमोरी फोम तकिए को कैसे साफ करें?

मेमोरी फोम वाले तकिए को सीधे पानी में भिगोना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे फोम की संरचना खराब हो सकती है। ऐसे तकियों को साफ करने के लिए हल्के गीले कपड़े और माइल्ड साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर तकिए पर कोई दाग लगा है, तो उसे धीरे-धीरे साफ करें और बाद में उसे अच्छी तरह हवा में सुखाएं। मेमोरी फोम तकिए को तेज धूप या अत्यधिक गर्मी में रखने से पहले निर्माता के निर्देशों को ध्यान में रखना चाहिए।

तकिए को सुखाना क्यों सबसे महत्वपूर्ण चरण है?

तकिए की सफाई के बाद उसे पूरी तरह सुखाना सबसे जरूरी प्रक्रिया होती है। अगर तकिए के अंदर थोड़ी भी नमी रह जाती है, तो उसमें बैक्टीरिया और फफूंदी तेजी से बढ़ सकते हैं।

तकिए को सुखाने के लिए अच्छी हवा वाली जगह का इस्तेमाल करें। धूप में सुखाना कई मामलों में प्रभावी तरीका माना जाता है, क्योंकि इससे नमी कम होने के साथ-साथ बदबू भी दूर हो सकती है। जरूरत पड़ने पर ड्रायर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, लेकिन तापमान का ध्यान रखना जरूरी है।

तकिया कब बदल देना चाहिए?

तकिए की नियमित सफाई के बावजूद उसकी एक सीमित उम्र होती है। समय के साथ तकिए की भरावट कम होने लगती है और उसका आकार बदल सकता है। इससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर गलत दबाव पड़ सकता है।

आमतौर पर 1 से 2 साल के बाद तकिया बदलने पर विचार करना चाहिए। हालांकि, यह तकिए की गुणवत्ता, इस्तेमाल और देखभाल पर भी निर्भर करता है।

कुछ संकेत बताते हैं कि अब नया तकिया लेने का समय आ गया है। जैसे तकिए का दबने के बाद वापस आकार में न आना, अंदर गांठें बन जाना, लगातार बदबू आना या सुबह उठने के बाद गर्दन और कंधों में दर्द महसूस होना।

बेहतर नींद के लिए साफ तकिया रखें

अच्छी नींद के लिए आरामदायक बिस्तर के साथ साफ तकिया भी जरूरी है। नियमित सफाई से तकिए में जमा धूल, बैक्टीरिया और एलर्जन को कम किया जा सकता है।

छोटी-छोटी आदतें जैसे समय पर तकिए का कवर बदलना, तकिए को हवा लगाना, सही तरीके से साफ करना और जरूरत पड़ने पर नया तकिया लेना आपकी नींद और स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।