राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकतंत्र बचाने की लड़ाई को बताया निर्णायक, हिमाचल से हजारों कांग्रेस और माकपा कार्यकर्ता पहुंचे दिल्ली; बसों को बॉर्डर पर रोकने का लगाया आरोप
शिमला। देश में कथित वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन की ओर से शुरू किया गया राजनीतिक अभियान अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में हिमाचल प्रदेश से भी हजारों कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इस रैली में कांग्रेस के साथ-साथ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। हिमाचल प्रदेश के नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चल रहे संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
रविवार को दिल्ली में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राजधानी की सड़कों पर उमड़ी भारी भीड़ इस बात का संकेत है कि देशभर में लोग वोट चोरी के मुद्दे को लेकर जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुई यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग एकजुट हो रहे हैं।
अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे हैं। कार्यकर्ताओं का उत्साह इस बात को दर्शाता है कि प्रदेश के लोग भी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि महारैली में शामिल होने के लिए आ रहे कार्यकर्ताओं को रास्ते में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हुआ।
बसों को बॉर्डर पर रोकने का लगाया आरोप
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि महारैली में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच रही बसों को अलग-अलग बहाने बनाकर सीमाओं पर रोका जा रहा था। उन्होंने कहा कि कहीं प्रदूषण के नाम पर बसों की जांच की जा रही थी तो कहीं परिवहन कर और अन्य नियमों का हवाला देकर वाहनों को रोकने की कोशिश की गई।
उनके अनुसार, इस तरह की बाधाओं के कारण कई कार्यकर्ताओं को पैदल ही रैली स्थल तक पहुंचना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को इस महारैली से कोई परेशानी नहीं थी तो कार्यकर्ताओं के आवागमन में इस प्रकार की दिक्कतें क्यों पैदा की गईं। अग्निहोत्री ने इसे लोकतांत्रिक आवाज को कमजोर करने का प्रयास बताते हुए कहा कि किसी भी सरकार को जनता की राजनीतिक अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोगों की आवाज को प्रशासनिक अड़चनों से दबाया नहीं जा सकता। हिमाचल के कार्यकर्ताओं ने भी तमाम मुश्किलों के बावजूद रैली में पहुंचकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
हिमाचल भी राजनीतिक अस्थिरता का भुक्तभोगी रहा : अग्निहोत्री
उपमुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य भी सरकार गिराने और विधायकों को तोड़ने की कोशिशों का भुक्तभोगी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का प्रयास किया गया और ऑपरेशन लोटस के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की कोशिश हुई।
अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस विधायकों की एकजुटता के कारण इन प्रयासों को सफल नहीं होने दिया गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को जनादेश दिया था और उस जनादेश को कमजोर करने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि सरकारों को जनता के मत से बनना और चलना चाहिए। यदि किसी दल को सत्ता हासिल करनी है तो उसे जनता के बीच जाकर समर्थन प्राप्त करना चाहिए, न कि विधायकों को तोड़कर या राजनीतिक खरीद-फरोख्त के जरिए सत्ता परिवर्तन का प्रयास करना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री के अनुसार, वोट चोरी का मुद्दा केवल किसी एक राज्य या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस मुद्दे पर विपक्षी दलों का एक मंच पर आना आवश्यक है।
भाजपा देश की आवाज को दबा नहीं सकती : विनय कुमार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने दिल्ली में आयोजित इंडिया गठबंधन की महारैली को केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ लोकतंत्र की रक्षा के लिए शुरू हुए व्यापक जन आंदोलन की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
विनय कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट सबसे बड़ी ताकत होता है। इसी वोट के आधार पर सरकारें बनती हैं और जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। यदि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं तो उनका निष्पक्ष समाधान होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन देश की जनता अब लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन संविधान की रक्षा तथा मतदाताओं के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली की महारैली में हिमाचल प्रदेश से पहुंचे हजारों कार्यकर्ताओं की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि राज्य कांग्रेस का संगठन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अभियान के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं के उत्साह और एकजुटता को पार्टी की बड़ी ताकत बताया।
भाजपा का पतन शुरू होने का दावा : रजनी पाटिल
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने भी महारैली को ऐतिहासिक बताते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा अब देशभर में गूंज रहा है और इससे भाजपा की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ रही हैं।
पाटिल ने दावा किया कि दिल्ली में आयोजित महारैली में उमड़ी भीड़ से भाजपा पूरी तरह बौखला गई है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होकर काम करना होगा। कांग्रेस इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है और राहुल गांधी के नेतृत्व में जनता के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महारैली में शामिल लोगों का उत्साह बताता है कि मतदाता अपने अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। भाजपा को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की ओर से उठाई जा रही चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रजनी पाटिल ने कहा कि कांग्रेस का यह अभियान केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि देशभर में इस मुद्दे पर जनसमर्थन बढ़ेगा।
माकपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने भी लिया हिस्सा
दिल्ली में आयोजित महारैली में हिमाचल प्रदेश से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के हजारों कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। पार्टी के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे आंदोलन को तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं।
संजय चौहान ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने और एसआईआर को रद्द करने की मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए और किसी भी योग्य मतदाता को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
माकपा नेता ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर संघर्ष कर रही है। हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का दिल्ली पहुंचना इस बात का संकेत है कि राज्य में भी चुनावी अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर गंभीरता है।
राष्ट्रीय मुद्दे पर हिमाचल की राजनीति भी हुई सक्रिय
दिल्ली की महारैली में हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस और माकपा नेताओं की सक्रिय भागीदारी से राज्य की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर नई हलचल पैदा हुई है। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की एकजुटता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के अभियान के रूप में पेश किया है। वहीं, माकपा ने चुनाव आयोग की जवाबदेही और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया है।
हिमाचल प्रदेश में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम, विशेषकर ऑपरेशन लोटस और सरकार को अस्थिर करने के कथित प्रयासों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अभियान को राज्य के अनुभवों से जोड़ने की कोशिश की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकारों और जनता के मताधिकार की रक्षा करना जरूरी है।
महारैली में हिमाचल के नेताओं के बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस और माकपा आने वाले समय में वोट चोरी, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बनाए रखना चाहती हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में हिमाचल प्रदेश से हजारों कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने राज्य की विपक्षी राजनीति को राष्ट्रीय अभियान से जोड़ दिया है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और प्रभारी रजनी पाटिल ने जहां इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताया, वहीं माकपा नेता संजय चौहान ने मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी और एसआईआर रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। अब देखना होगा कि इस महारैली के बाद विपक्षी दल अपने अभियान को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में कितना प्रभावी बनता है।




