108 करोड़ की एफडी में बड़ा खेल! चंडीगढ़ नगर निगम के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही CBI, कई अफसर जांच के घेरे में

108 करोड़ की एफडी में बड़ा खेल! चंडीगढ़ नगर निगम के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही CBI, कई अफसर जांच के घेरे में

चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के एफडीआर और बैंक खातों में वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच अब आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वित्तीय लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। नगर निगम प्रशासन की ओर से जांच एजेंसी को मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद अब जांच का फोकस बैंक खातों के संचालन, फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों (FDR), फंड ट्रांसफर और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर बताया जा रहा है।

मामला सामने आने के बाद से ही नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसी यह समझने का प्रयास कर रही है कि संबंधित अवधि के दौरान वित्तीय प्रक्रियाओं का संचालन किस तरह किया गया और क्या निर्धारित नियमों एवं आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन हुआ था। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।

CBI ने नगर निगम प्रशासन से मांगे थे विस्तृत दस्तावेज

जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ नगर निगम के कमिश्नर को नोटिस जारी कर मामले से जुड़े विभिन्न दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद नगर निगम प्रशासन ने निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच एजेंसी को आवश्यक जानकारी सौंप दी।

बताया जा रहा है कि करीब 20 अलग-अलग बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज जांच के लिए उपलब्ध करवाए गए हैं। इनमें बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन का विवरण, एफडीआर से जुड़ी जानकारी और विभिन्न स्तरों पर दी गई वित्तीय मंजूरियों से संबंधित कागजात शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसी का उद्देश्य केवल किसी एक वित्तीय लेन-देन की जांच करना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को समझना है। इसके तहत यह देखा जा रहा है कि बैंक खातों का संचालन कौन करता था, एफडीआर से जुड़े फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और अलग-अलग वित्तीय गतिविधियों के लिए किस स्तर पर अनुमति दी गई थी।

करीब 108.73 करोड़ रुपये की 11 एफडीआर जांच के केंद्र में

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक करीब 108.73 करोड़ रुपये की 11 फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसी इन एफडीआर से संबंधित दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की विस्तार से जांच कर रही है।

एफडीआर आमतौर पर संस्थानों के अतिरिक्त धन को सुरक्षित रखने और उस पर ब्याज अर्जित करने के लिए बनाई जाती हैं। ऐसे में जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि इन एफडीआर को किस प्रक्रिया के तहत बनाया गया, इनके संचालन और नवीनीकरण से जुड़े अधिकार किन लोगों के पास थे और संबंधित रकम के संबंध में कौन-कौन से वित्तीय निर्णय लिए गए।

जांच के दौरान बैंकों के साथ हुए आधिकारिक पत्राचार को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया है कि एजेंसी ने एफडीआर और बैंक खातों से संबंधित विभिन्न दस्तावेजों को अपने दायरे में लिया है, ताकि पूरे वित्तीय घटनाक्रम की कड़ी को समझा जा सके।

बैंक खातों और इंटरनेट बैंकिंग व्यवस्था की भी जांच

मामले की जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहने वाली है। एजेंसी द्वारा बैंक खातों के संचालन से जुड़ी तकनीकी और डिजिटल जानकारी भी जुटाई जा रही है।

बताया जा रहा है कि जांच के दायरे में इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस, ओटीपी से जुड़े उपकरण, चेकबुक की कस्टडी, बैंक स्टेटमेंट और खातों के संचालन से संबंधित अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं। इन दस्तावेजों की मदद से जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि संबंधित खातों में किस तरह के लेन-देन हुए और उन्हें संचालित करने की प्रक्रिया क्या थी।

डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ऐसे मामलों में इंटरनेट बैंकिंग लॉग, अधिकृत यूजर और लेन-देन से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि किसी वित्तीय गतिविधि को लेकर संदेह सामने आता है, तो जांच एजेंसियां उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से घटनाक्रम की समय-सीमा और संबंधित गतिविधियों को समझने का प्रयास करती हैं।

पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े रिकॉर्ड भी जुटाए जा रहे

जांच के दौरान कुछ पूर्व अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े सेवा रिकॉर्ड और प्रशासनिक दस्तावेज भी मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें बर्खास्त अकाउंटेंट अनुभव मिश्रा, स्मार्ट सिटी लिमिटेड की पूर्व वित्त अधिकारी नलिनी मलिक और पूर्व ज्वाइंट कमिश्नर गुरिंदर सिंह सोढ़ी से संबंधित रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसी द्वारा सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति आदेश, पोस्टिंग विवरण और संबंधित पदों पर कार्य करने की अवधि जैसी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा हस्ताक्षर और हैंडराइटिंग सैंपल से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।

ऐसे दस्तावेज किसी भी वित्तीय जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियों और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों का मिलान किया जा सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी को लेकर अंतिम स्थिति जांच एजेंसी की विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

ऑडिट रिपोर्ट और अकाउंटिंग डेटा की भी होगी जांच

मामले में वित्तीय दस्तावेजों के साथ-साथ संस्थान के आंतरिक अकाउंटिंग सिस्टम की भी पड़ताल किए जाने की जानकारी है। इसके तहत ऑडिट रिपोर्ट, ईआरपी सिस्टम, टैली डेटा और आधिकारिक ईमेल कम्युनिकेशन जैसे रिकॉर्ड जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।

अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में दर्ज लेन-देन और बैंक स्टेटमेंट के बीच मिलान से यह समझने में मदद मिल सकती है कि रिकॉर्ड में दर्ज वित्तीय गतिविधियां बैंकिंग लेन-देन से मेल खाती हैं या नहीं। इसी तरह, आधिकारिक ईमेल के माध्यम से लिए गए निर्देश और भेजे गए पत्राचार भी निर्णय प्रक्रिया को समझने में सहायक हो सकते हैं।

फंड ट्रांसफर से जुड़े आदेशों और वित्तीय मंजूरियों की जांच भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि रकम के हस्तांतरण के लिए किस अधिकारी या विभाग ने अनुमति दी और संबंधित प्रक्रिया किस नियम के तहत पूरी की गई।

बैंकिंग प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच

जांच एजेंसी का एक प्रमुख फोकस बैंकिंग प्रक्रियाओं पर बताया जा रहा है। जांच में यह देखा जा सकता है कि बैंक खातों और एफडीआर के संचालन के लिए निर्धारित अधिकारों का पालन किया गया था या नहीं।

इसके अलावा, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है कि किसी खाते में बदलाव, फंड ट्रांसफर या एफडीआर से जुड़े फैसलों के लिए जरूरी अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। यदि किसी प्रक्रिया में नियमों से अलग गतिविधि पाई जाती है, तो उसकी परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा सकती है।

वित्तीय संस्थानों से संबंधित मामलों में दस्तावेजी रिकॉर्ड के साथ बैंकिंग डेटा का मिलान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से जांच एजेंसी विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी को एक-दूसरे से मिलाकर पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट करने का प्रयास कर रही है।

मामला सीबीआई तक कैसे पहुंचा

जानकारी के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे यूटी प्रशासन की ओर से केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया था। इसके बाद आर्थिक अपराध से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू हुई और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई।

जांच का उद्देश्य कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और यह निर्धारित करना है कि किसी नियम या कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं। इसके लिए एजेंसी दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आमतौर पर वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने का प्रयास करती हैं। इसलिए नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड के बाद आगे की जांच में नए दस्तावेज या अन्य संबंधित जानकारी भी सामने आ सकती है।

अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की संभावना

जांच के आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर सकती है कि संबंधित अवधि में वित्तीय निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या थी और विभिन्न स्तरों पर किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी थी।

यदि जांच के दौरान किसी दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड या डिजिटल डेटा में कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है, तो उससे जुड़े लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी संबंधित रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए बैंक अधिकारियों और अन्य पक्षों से भी जानकारी ले सकती है।

फिलहाल जांच का दायरा वित्तीय दस्तावेजों, बैंकिंग प्रक्रियाओं और प्रशासनिक रिकॉर्ड तक विस्तृत बताया जा रहा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर भी ध्यान

इस पूरे मामले ने चंडीगढ़ नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया है। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के तहत बड़ी मात्रा में सरकारी धन और विभिन्न वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन किया जाता है। ऐसे में इन संस्थाओं में पारदर्शी बैंकिंग और मजबूत वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जाता है।

जांच के दौरान यदि किसी प्रक्रिया में कमी या अनियमितता सामने आती है, तो भविष्य में वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए जा सकते हैं। वहीं यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो उससे भी मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल, CBI द्वारा रिकॉर्ड की जांच और संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया जारी है। 11 एफडीआर, बैंक खातों, डिजिटल बैंकिंग एक्सेस, फंड ट्रांसफर, ऑडिट रिपोर्ट और अधिकारियों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल के आधार पर जांच एजेंसी पूरे वित्तीय घटनाक्रम को समझने का प्रयास कर रही है।