दिल की सेहत का सीधा संबंध हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली और खान-पान से जुड़ा होता है। लंबे समय तक असंतुलित डाइट लेने, ज्यादा नमक-तेल का सेवन करने और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर रहने से हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उनके लिए भोजन का चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
हार्ट पेशेंट के लिए डाइट का मतलब केवल कम खाना या पूरी तरह किसी एक खाद्य पदार्थ को छोड़ देना नहीं है। सही तरीका यह है कि भोजन में पोषक तत्वों का संतुलन बनाया जाए और ऐसे विकल्प चुने जाएं, जो शरीर को जरूरी फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल उपलब्ध कराएं। साथ ही नमक, ज्यादा चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा पर नियंत्रण रखा जाए।
हालांकि, सभी हृदय रोगियों के लिए एक जैसी डाइट उपयुक्त नहीं होती। किसी व्यक्ति की बीमारी, उम्र, दवाइयां, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर भोजन की योजना तय की जानी चाहिए। खासकर हार्ट फेलियर, किडनी डिजीज या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार ही डाइट में बदलाव करना चाहिए।
सबसे पहले थाली में बढ़ाएं फल और सब्जियों की मात्रा
दिल की सेहत के लिए रोजाना के भोजन में फल और सब्जियों को पर्याप्त जगह देना फायदेमंद हो सकता है। मौसमी फल और हरी सब्जियां शरीर को फाइबर के साथ कई तरह के जरूरी पोषक तत्व प्रदान करती हैं। सब्जियों को बहुत ज्यादा तेल या नमक में पकाने के बजाय कम तेल में तैयार करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
हरी पत्तेदार सब्जियों के अलावा गाजर, लौकी, तोरी, भिंडी, फूलगोभी और अन्य मौसमी सब्जियों को भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसी तरह फल खाते समय ताजे और साबुत फल को प्राथमिकता देना बेहतर रहता है। फल खाने और पैकेज्ड मीठे जूस या शुगर वाले पेय लेने में काफी अंतर होता है, इसलिए फलों का चुनाव भी सोच-समझकर करना चाहिए।
रिफाइंड अनाज की जगह चुनें साबुत अनाज
रोजाना की डाइट में इस्तेमाल होने वाले अनाज का चुनाव भी महत्वपूर्ण है। मैदा और ज्यादा प्रोसेस किए गए अनाज की जगह साबुत अनाज के विकल्पों को प्राथमिकता दी जा सकती है। ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और साबुत गेहूं जैसे खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल किए जा सकते हैं।
साबुत अनाज में फाइबर पाया जाता है, जिसकी वजह से ये संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। नाश्ते में ओट्स या दलिया और मुख्य भोजन में साबुत गेहूं की रोटी या उपयुक्त मात्रा में ब्राउन राइस जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
दाल, चना और बीन्स से मिलेगा प्रोटीन
हार्ट-फ्रेंडली डाइट में प्रोटीन के अच्छे स्रोतों को भी जगह मिलनी चाहिए। दालें, चना, राजमा और अन्य फलियां प्रोटीन के साथ फाइबर भी प्रदान करती हैं। इन्हें व्यक्ति की जरूरत और पाचन क्षमता के अनुसार भोजन में शामिल किया जा सकता है।
दाल या बीन्स तैयार करते समय बहुत ज्यादा घी, मक्खन, नमक या तेल डालने से बचना चाहिए। कम तेल और सीमित नमक के साथ तैयार की गई दाल या फलियां रोजाना के भोजन का बेहतर हिस्सा बन सकती हैं।
नट्स और सीड्स भी हो सकते हैं डाइट का हिस्सा
बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स जैसे नट्स और बीज भी संतुलित मात्रा में लिए जा सकते हैं। इनमें कई पोषक तत्व और असंतृप्त वसा पाई जाती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन्हें बड़ी मात्रा में खाना शुरू कर दिया जाए।
नट्स और सीड्स कैलोरी से भरपूर हो सकते हैं, इसलिए इनकी मात्रा नियंत्रित रखना जरूरी है। बाजार में मिलने वाले नमकीन या ज्यादा मसालेदार नट्स के बजाय बिना अतिरिक्त नमक वाले विकल्प चुनना अधिक उचित हो सकता है।
खाना बनाते समय तेल पर रखें खास नजर
दिल के मरीजों के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सी सब्जी या दाल खाई जा रही है। भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा भी मायने रखती है। जरूरत से ज्यादा तेल का इस्तेमाल भोजन को अनावश्यक रूप से ज्यादा कैलोरी और वसा वाला बना सकता है।
इसलिए खाना बनाते समय तेल का सीमित इस्तेमाल करना बेहतर है। एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। भोजन को डीप फ्राई करने के बजाय उबालना, भाप में पकाना, ग्रिल करना या कम तेल में पकाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
दूध और दही लेते समय चुनें सही विकल्प
डेयरी उत्पाद पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होता। जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार लो-फैट दूध या दही जैसे विकल्प भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति को डॉक्टर ने किसी खास वजह से डेयरी की मात्रा कम करने के लिए कहा है, तो उसी सलाह का पालन करना चाहिए।
नमक की ज्यादा मात्रा से रहें सावधान
हृदय रोगियों की डाइट में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली चीजों में नमक भी शामिल है। अधिक सोडियम का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ाने में योगदान दे सकता है। इसलिए खाने में ऊपर से अतिरिक्त नमक डालने की आदत को कम करना जरूरी है।
सिर्फ रसोई में डाले जाने वाले नमक पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है। पैकेज्ड स्नैक्स, नमकीन, अचार, पापड़ और कई तैयार खाद्य पदार्थों में भी सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनके लेबल पर सोडियम और नमक की जानकारी देखना उपयोगी हो सकता है।
तली हुई चीजों को रोज की आदत न बनाएं
समोसा, पकौड़े, पूरी, फ्रेंच फ्राइज और इसी तरह के डीप फ्राइड फूड स्वाद में भले ही अच्छे लगें, लेकिन इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाना उचित नहीं माना जाता। ऐसे खाद्य पदार्थों में वसा और कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है।
अगर कभी इन चीजों का सेवन किया भी जाए, तो मात्रा सीमित रखना बेहतर है। रोजाना के भोजन में कम तेल में तैयार घर का खाना प्राथमिकता होना चाहिए।
ट्रांस फैट और ज्यादा सैचुरेटेड फैट पर नियंत्रण
कुछ बेकरी प्रोडक्ट्स, पैकेज्ड स्नैक्स और अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों में अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा ज्यादा हो सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों का लगातार और अधिक सेवन हृदय के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
इसलिए बिस्किट, केक, पेस्ट्री, पैकेज्ड स्नैक्स और अन्य प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को खरीदते समय पोषण संबंधी जानकारी देखना अच्छी आदत हो सकती है। भोजन में स्वस्थ वसा वाले स्रोतों को उचित मात्रा में शामिल करना और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करना बेहतर रणनीति है।
प्रोसेस्ड मीट से भी बनाएं दूरी
सॉसेज, सलामी और अन्य प्रोसेस्ड मीट उत्पादों का सेवन भी सीमित रखना चाहिए। ऐसे खाद्य पदार्थों में सोडियम और अन्य ऐसे घटक हो सकते हैं, जिनकी अधिक मात्रा नियमित डाइट के लिए अच्छी नहीं मानी जाती।
हार्ट पेशेंट को अपने डॉक्टर या डाइटीशियन से यह समझना चाहिए कि उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किस तरह के प्रोटीन स्रोत सबसे उपयुक्त रहेंगे।
मीठी चीजों और शुगर वाले ड्रिंक्स को करें कम
सिर्फ नमक ही नहीं, बल्कि ज्यादा चीनी का सेवन भी संतुलित डाइट के लिए समस्या पैदा कर सकता है। मिठाइयां, मीठे पेय, शुगर वाले पैकेज्ड ड्रिंक्स और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।
खासकर उन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए जिन्हें हृदय रोग के साथ डायबिटीज या वजन से जुड़ी समस्या भी है। रोजाना की प्यास बुझाने के लिए मीठे पेय की जगह सामान्य पानी जैसे विकल्प बेहतर हो सकते हैं, बशर्ते डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।
फास्ट फूड को बनाएं कभी-कभार का विकल्प
बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और अन्य फास्ट फूड में नमक, वसा और कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है। इसलिए इन्हें रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बनाने से बचना चाहिए। घर पर तैयार किया गया संतुलित भोजन आमतौर पर डाइट को नियंत्रित रखने में ज्यादा मदद कर सकता है।
पानी पीने को लेकर भी रखें सावधानी
सामान्य परिस्थितियों में शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। लेकिन हर हार्ट पेशेंट के लिए पानी की मात्रा एक जैसी नहीं हो सकती। विशेष रूप से कुछ हार्ट फेलियर के मरीजों को डॉक्टर तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दे सकते हैं।
ऐसी स्थिति में इंटरनेट या किसी सामान्य डाइट चार्ट के आधार पर पानी की मात्रा तय नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर ने जितनी मात्रा बताई है, उसी का पालन करना अधिक सुरक्षित है।
सिर्फ डाइट नहीं, पूरी जीवनशैली पर दें ध्यान
दिल को स्वस्थ रखने के लिए भोजन के साथ शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव का प्रबंधन और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर डॉक्टर ने एक्सरसाइज की अनुमति दी है, तो व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार गतिविधि कर सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि हार्ट पेशेंट किसी सोशल मीडिया पोस्ट या सामान्य डाइट चार्ट को अपनी बीमारी का व्यक्तिगत इलाज न समझें। एक व्यक्ति के लिए सही भोजन दूसरे मरीज के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए अगर किसी मरीज को हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी या डायबिटीज जैसी दूसरी समस्या भी है, तो डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेना चाहिए। सही भोजन का चुनाव, सीमित नमक और तेल तथा संतुलित जीवनशैली मिलकर हृदय की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।




