दीपावली के मौके पर घरों और बाजारों में उत्सव का माहौल रहता है। रंग-बिरंगी लाइटों, दीयों और आतिशबाजी के बीच लोग त्योहार का आनंद लेते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक में पटाखे जलाने का उत्साह देखने को मिलता है। लेकिन इस दौरान छोटी-सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। खासतौर पर पटाखों से हाथ जलने की घटनाएं काफी नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। कई बार लोग मामूली चोट समझकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ मामलों में जलने का असर त्वचा की गहरी परतों, मांसपेशियों और नसों तक पहुंच सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, बर्न इंजरी होने पर शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सही तरीके से प्राथमिक उपचार मिलने पर चोट की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके उलट, घाव पर गलत चीजें लगाने या समय पर इलाज नहीं कराने से संक्रमण और दूसरी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पटाखे जलाते समय सुरक्षा के उपाय अपनाने के साथ यह जानना भी जरूरी है कि दुर्घटना होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए।
हाथों में जलने की चोट को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
पटाखों से होने वाली चोट हर बार केवल त्वचा की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं रहती। विस्फोट की गर्मी और आग के प्रभाव से त्वचा की अलग-अलग परतों को नुकसान पहुंच सकता है। गंभीर स्थिति में इसके कारण अंदर मौजूद नसें, मांसपेशियां और अन्य टिश्यू भी प्रभावित हो सकते हैं।
हाथ शरीर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। रोजमर्रा के लगभग सभी कामों में उंगलियों और हथेलियों की जरूरत पड़ती है। खाना खाने, लिखने, कपड़े पहनने, सामान उठाने और चीजों को पकड़ने जैसे काम हाथों की सामान्य गतिविधियों पर निर्भर करते हैं। ऐसे में अगर पटाखे की वजह से हाथ में गहरी चोट लग जाए, तो इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।
गंभीर बर्न इंजरी के बाद त्वचा सिकुड़ सकती है और घाव भरने के दौरान निशान या स्कार टिश्यू बन सकते हैं। इससे उंगलियों और कलाई के जोड़ों की सामान्य गतिविधि प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों को हाथ पूरी तरह खोलने, मुट्ठी बनाने या उंगलियां मोड़ने में परेशानी होने लगती है। गंभीर मामलों में इसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।
दर्द महसूस न होना भी हो सकता है गंभीर चोट का संकेत
आमतौर पर लोग मानते हैं कि जलने पर जितना ज्यादा दर्द होगा, चोट उतनी ही गंभीर होगी। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा हमेशा सही नहीं होती। कभी-कभी बहुत गहरी जलन में प्रभावित जगह पर दर्द कम महसूस होता है या संवेदना पूरी तरह खत्म हो सकती है।
इसकी वजह यह है कि अत्यधिक गर्मी से त्वचा के नीचे मौजूद नसों को नुकसान पहुंच सकता है। जब नसें प्रभावित हो जाती हैं, तो दिमाग तक दर्द और स्पर्श से जुड़े संकेत ठीक तरह से नहीं पहुंच पाते। इसलिए जले हुए हिस्से का सुन्न पड़ जाना खतरे की घंटी हो सकता है।
इसके अलावा त्वचा के रंग और बनावट में बदलाव भी चोट की गंभीरता के बारे में संकेत दे सकते हैं। यदि जला हुआ हिस्सा सफेद, धूसर या काला दिखाई दे और उसकी सतह चमड़े जैसी कठोर नजर आए, तो इसे सामान्य चोट नहीं समझना चाहिए। ऐसे लक्षण गहरे टिश्यू डैमेज की ओर इशारा कर सकते हैं। इस स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर से जल्द जांच कराना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर सर्जिकल उपचार भी किया जा सकता है।
हादसे के तुरंत बाद इन तरीकों से दें प्राथमिक उपचार
पटाखे से हाथ जलने पर घबराने के बजाय सही कदम उठाना जरूरी है। शुरुआती 20 मिनट विशेष रूप से अहम माने जाते हैं। इस दौरान प्रभावित हिस्से को सही तरीके से ठंडा करने से जलने की प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोकने और दर्द कम करने में मदद मिल सकती है।
1. सबसे पहले आग और पटाखों से दूर हटें
अगर पटाखा जलाते समय हाथ या शरीर के किसी हिस्से में आग लग जाए, तो सबसे पहले खुद को आग के स्रोत से दूर करें। यदि कपड़ों में आग पकड़ लेती है, तो भागने के बजाय रुकें, जमीन पर लेट जाएं और शरीर को रोल करें। इससे आग की लपटों को बुझाने में मदद मिल सकती है। आसपास मौजूद लोगों को भी सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
2. जले हुए हिस्से पर 20 मिनट तक पानी डालें
हाथ या शरीर का कोई हिस्सा जलने पर उसे सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे लगभग 20 मिनट तक रखें। पानी बहुत ज्यादा ठंडा नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य प्रभावित त्वचा को धीरे-धीरे ठंडा करना है, ताकि गर्मी के कारण होने वाला नुकसान कम हो सके।
इस दौरान बर्फ या बर्फ के पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। अत्यधिक ठंड से त्वचा को अतिरिक्त नुकसान पहुंच सकता है। यदि चोट बड़े हिस्से में लगी है, तो पूरे शरीर को ठंडा करने के बजाय प्रभावित हिस्से को ठंडा रखें और शरीर को गर्म बनाए रखने का ध्यान रखें।
3. हाथ से अंगूठी और घड़ी तुरंत उतार दें
जलने के बाद प्रभावित हिस्से में धीरे-धीरे सूजन आ सकती है। अगर हाथ में अंगूठी, कंगन, घड़ी या कोई दूसरी एक्सेसरी पहनी हुई है, तो सूजन बढ़ने से पहले उसे सावधानीपूर्वक हटा दें। ऐसा करने से बाद में इन चीजों के फंसने और रक्त प्रवाह प्रभावित होने का खतरा कम हो सकता है।
हालांकि, अगर कोई चीज त्वचा से चिपक गई है या उसे निकालने में दर्द और खिंचाव हो रहा है, तो जबरदस्ती न करें। इसे हटाने की कोशिश डॉक्टर पर छोड़ दें।
4. जले हुए घाव पर टूथपेस्ट या घी न लगाएं
घरेलू उपचार के नाम पर लोग कई बार जलने वाली जगह पर टूथपेस्ट, घी, तेल, हल्दी या अन्य चीजें लगा देते हैं। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। इन पदार्थों से घाव की सफाई और डॉक्टर द्वारा चोट की जांच करना मुश्किल हो सकता है। कुछ मामलों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से बचें। जले हुए हिस्से को ठंडा करने के बाद साफ और नॉन-स्टिक स्टेराइल ड्रेसिंग से हल्के ढंग से ढकें। पट्टी इतनी कसकर न बांधें कि सूजन के कारण दबाव बढ़ जाए।
5. गंभीर चोट होने पर अस्पताल पहुंचने में देरी न करें
अगर पटाखे के कारण हाथ गहराई तक जल गया है, त्वचा का रंग बदल गया है, बड़े फफोले बन गए हैं या प्रभावित हिस्सा सुन्न हो गया है, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें। हाथ और उंगलियों में होने वाली बर्न इंजरी का विशेष रूप से मूल्यांकन जरूरी होता है।
चेहरे, आंखों और सांस लेने से जुड़े अंगों पर चोट लगने की स्थिति में भी तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो इसे आपात स्थिति मानें।
जलने के बाद फफोले फोड़ने से बचें
बर्न इंजरी के बाद त्वचा पर पानी से भरे फफोले बन सकते हैं। कई लोग इन्हें देखकर खुद ही फोड़ने लगते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए। फफोले त्वचा के नीचे मौजूद नए टिश्यू को बाहरी संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। इन्हें फोड़ने से घाव खुल सकता है और बैक्टीरिया के प्रवेश का खतरा बढ़ सकता है।
इसी तरह जली हुई त्वचा को रगड़ना, खुरचना या खुद से उसकी ऊपरी परत हटाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। घाव की स्थिति देखकर डॉक्टर उचित ड्रेसिंग और उपचार तय कर सकते हैं।
गंभीर बर्न इंजरी का असर कई महीनों तक रह सकता है
पटाखों से लगी चोट का प्रभाव केवल हादसे के दिन तक सीमित नहीं रहता। यदि जलने की गंभीरता अधिक है, तो व्यक्ति को लंबे समय तक उपचार और देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। गहरे घाव भरने में काफी समय लग सकता है और इस दौरान संक्रमण होने की आशंका बनी रहती है।
कुछ मामलों में जली हुई जगह पर स्थायी निशान रह जाते हैं। त्वचा के सिकुड़ने की वजह से हाथों की उंगलियों और जोड़ों की गतिविधियां सीमित हो सकती हैं। इसे मेडिकल भाषा में कॉन्ट्रैक्चर कहा जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को हाथ सामान्य तरीके से चलाने और पकड़ बनाने में परेशानी हो सकती है।
गंभीर चोटों में स्किन ग्राफ्टिंग की जरूरत भी पड़ सकती है। इस प्रक्रिया में शरीर के किसी दूसरे हिस्से से स्वस्थ त्वचा लेकर प्रभावित जगह पर लगाई जाती है। कुछ मरीजों को रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी और लंबे समय तक फिजियोथेरेपी या रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ सकता है। इसका उद्देश्य हाथों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना और सामान्य गतिविधियों को दोबारा संभव बनाना होता है।
पटाखे जलाने से पहले इन सुरक्षा नियमों का रखें ध्यान
दुर्घटना होने के बाद उपचार करने से बेहतर है कि पहले ही सावधानी बरती जाए। पटाखे हमेशा खुले और सुरक्षित स्थान पर जलाएं। बच्चों को अकेले आतिशबाजी न करने दें और उनके साथ किसी जिम्मेदार बड़े व्यक्ति का मौजूद रहना जरूरी है।
पटाखे जलाते समय ढीले, सिंथेटिक या आसानी से आग पकड़ने वाले कपड़े पहनने से बचें। सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और पटाखा जलाने के लिए लंबी अगरबत्ती या फुलझड़ी का इस्तेमाल करें। पटाखा जलने के बाद उसके पास तुरंत जाकर देखने की कोशिश न करें। यदि कोई पटाखा नहीं फूटता है, तो उसे दोबारा जलाने के लिए उसके करीब न जाएं।
साथ ही घर में प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी सामान उपलब्ध रखें। बच्चों को भी समझाएं कि पटाखे से चोट लगने पर तुरंत किसी बड़े व्यक्ति को जानकारी दें और खुद से उपचार करने की कोशिश न करें।
याद रखें: दीपावली का असली आनंद सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने में है। पटाखे से जलने की स्थिति में शुरुआती 20 मिनट तक सही प्राथमिक उपचार देना महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर चोट में घरेलू उपायों के भरोसे न रहें। समय पर डॉक्टर से जांच और उचित इलाज कराने से आगे होने वाली जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।




