एसआईआर प्रक्रिया के तहत 44.92 लाख मतदाताओं को दस्तावेज जमा कराने के लिए जारी हुए नोटिस; फार्म-6, 7 और 8 के हजारों आवेदन अब भी लंबित, निर्वाचन आयोग ने दिया अतिरिक्त समय
चंडीगढ़। हरियाणा में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने के लिए चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को बड़ी राहत दी है। भारत निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा बढ़ाकर अब 20 नवंबर कर दी है। इससे पहले इसके लिए 28 अक्टूबर अंतिम तारीख निर्धारित की गई थी। इसी तरह मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख भी छह नवंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। इस फैसले से उन लाखों मतदाताओं को अतिरिक्त समय मिलेगा, जिनके दस्तावेजों का सत्यापन, आवेदन या सुनवाई से संबंधित मामले अभी पूरे नहीं हुए हैं।
प्रदेश में एसआईआर के तहत मतदाता सूची की जांच और संशोधन का काम व्यापक स्तर पर चल रहा है। इस दौरान नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र नाम हटाने और मतदाता विवरण में सुधार के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा पिछले गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से मौजूदा सूची का मिलान नहीं होने या अन्य विसंगतियां मिलने के कारण लाखों मतदाताओं को दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं। निर्धारित समय में इन सभी मामलों का निपटारा नहीं हो पाने के कारण हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आयोग से समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था। आयोग ने इस मांग को स्वीकार करते हुए संशोधित कार्यक्रम जारी कर दिया है।
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने बताया कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। इसके लिए आवेदन, दस्तावेजों के सत्यापन और सुनवाई से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि समयसीमा बढ़ने से लंबित मामलों को नियमों के अनुसार निपटाने और मतदाताओं को अपनी बात रखने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
नौ लाख से अधिक फार्म-6, 7 और 8 प्राप्त
निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक फार्म-6, फार्म-7 और फार्म-8 के माध्यम से कुल 9,85,580 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 4,49,813 फार्म-6 जमा हुए हैं। इनका इस्तेमाल मतदाता सूची में नए नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा नाम हटाने से संबंधित 1,57,673 फार्म-7 प्राप्त हुए हैं, जबकि मतदाता के विवरण में संशोधन या अन्य निर्धारित बदलावों के लिए 3,78,094 फार्म-8 जमा कराए गए हैं।
इन आवेदनों के माध्यम से मतदाता सूची में नए नाम शामिल करने, पहले से दर्ज नामों को हटाने और व्यक्तिगत विवरण में आवश्यक सुधार करने की मांग की गई है। निर्वाचन विभाग के सामने इन सभी आवेदनों की जांच कर नियमानुसार निर्णय लेने की जिम्मेदारी है।
इसके अतिरिक्त, पिछले गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची और वर्तमान सूची के बीच मिलान के दौरान सामने आई विसंगतियों के कारण 44,92,696 मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। इन मतदाताओं के दस्तावेजों का सत्यापन और जरूरत के अनुसार सुनवाई की जानी है। इतनी बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने के कारण निर्वाचन अधिकारियों के सामने समयसीमा के भीतर सभी मामलों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।
28 अक्टूबर तक हजारों आवेदन थे लंबित
निर्वाचन आयोग के पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 28 अक्टूबर तक सभी दावों, आपत्तियों और नोटिसों से जुड़े मामलों का निपटारा किया जाना था। हालांकि, इस तारीख तक बड़ी संख्या में आवेदन और सुनवाई से संबंधित मामले लंबित रह गए थे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 28 अक्टूबर तक फार्म-6 के 23,176, फार्म-7 के 5,175 और फार्म-8 के 6,058 आवेदन लंबित थे। इन मामलों में संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर निर्णय लेना था।
इसके अलावा सुनवाई के लिए जारी किए गए 12,043 नोटिसों से जुड़े मामले भी लंबित थे। निर्वाचन विभाग को इन मामलों में संबंधित मतदाताओं की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने और आवश्यक होने पर उनकी सुनवाई पूरी करनी है। विभाग का प्रयास है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से बाहर न रहे और जिन नामों को नियमानुसार हटाया जाना आवश्यक है, उन पर भी उचित कार्रवाई हो।
फोटो अद्यतन से जुड़े मामले भी चुनौती
मतदाता सूची में नाम और पते के सत्यापन के साथ-साथ फोटो अद्यतन का काम भी चल रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, फोटो अद्यतन से संबंधित 10,44,080 मामले और फोटो अद्यतन से जुड़े नोटिसों के 7,59,024 मामले भी संबंधित अधिकारियों के पास लंबित बताए गए हैं।
मतदाता सूची में सही और अद्यतन फोटो का होना पहचान सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इन मामलों का निपटारा भी अंतिम सूची तैयार करने से पहले किया जाना है। अधिकारियों को आवेदन और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक संशोधन करने होंगे।
समयसीमा बढ़ने से निर्वाचन अधिकारियों को इन लंबित मामलों पर काम पूरा करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। साथ ही मतदाताओं को भी अपने दस्तावेज जमा कराने, आवेदन में मौजूद त्रुटियां दूर करने और सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिक समय मिल सकेगा।
राजनीतिक दलों ने 20,864 मतदान केंद्रों पर तैनात किए बीएलए
मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के 20,864 मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-2) नियुक्त किए गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने सबसे अधिक 19,554 बीएलए नियुक्त किए हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से 17,127 एजेंट तैनात किए गए हैं।
इंडियन नेशनल लोकदल ने 2,186 और जननायक जनता पार्टी ने 1,093 बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए हैं। इसके अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से 314, बहुजन समाज पार्टी की ओर से 146 और आम आदमी पार्टी की ओर से 54 बीएलए नियुक्त किए गए हैं।
बूथ लेवल एजेंट मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में अपने राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका काम मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखना तथा पात्र मतदाताओं के नाम शामिल कराने में सहयोग देना है। मतदान केंद्रों पर इन एजेंटों की मौजूदगी से पुनरीक्षण प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी और निगरानी को बढ़ावा मिलता है।
30 नवंबर को जारी होगी अंतिम सूची
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अब 20 नवंबर तक दावे और आपत्तियों का निपटारा किया जा सकेगा। इसके बाद लंबित मामलों की समीक्षा और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर को होगा।
एसआईआर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में सभी पात्र नागरिकों के नाम शामिल रहें। इसके साथ ही मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के नामों की नियमानुसार जांच की जाए। निर्वाचन विभाग के सामने चुनौती यह भी है कि दस्तावेजों के सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करते समय किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर न रह जाए।
समयसीमा में किए गए इस विस्तार से निर्वाचन विभाग को लंबित आवेदनों और नोटिसों के निपटारे के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। वहीं मतदाताओं के पास भी अपनी पात्रता से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने और आपत्तियों का जवाब देने का अवसर बढ़ गया है। अब सभी की नजरें 30 नवंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर रहेंगी।




