नवरात्र व्रत में इन गलतियों से बिगड़ सकती है सेहत, वजन घटाने के चक्कर में न करें ये काम; जानें सही तरीका

नवरात्र व्रत में इन गलतियों से बिगड़ सकती है सेहत, वजन घटाने के चक्कर में न करें ये काम; जानें सही तरीका

नवरात्र के दौरान व्रत रखना करोड़ों लोगों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इन नौ दिनों में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के साथ अपने खानपान में भी बदलाव करते हैं। कोई पूरे दिन उपवास रखता है, तो कोई फलाहार करके व्रत पूरा करता है। इस दौरान कुट्टू के आटे की पूड़ी, साबूदाने की खिचड़ी, आलू, समक के चावल, फल, दूध, दही और सूखे मेवे जैसे खाद्य पदार्थ खाने का चलन रहता है।

हालांकि, बदलते समय के साथ नवरात्र के व्रत को लेकर लोगों की सोच में एक और पहलू जुड़ गया है। अब कई लोग इसे वजन घटाने, खानपान को नियंत्रित करने और शरीर को स्वस्थ बनाने के अवसर के रूप में भी देखते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि नौ दिनों तक सामान्य भोजन नहीं करने से शरीर में जमा गंदगी बाहर निकल जाती है। वहीं, कुछ लोग समझते हैं कि कम खाने और लंबे समय तक भूखे रहने से तेजी से वजन कम किया जा सकता है।

लेकिन खानपान में बदलाव करने से मिलने वाले फायदे हर व्यक्ति के लिए एक जैसे नहीं होते। व्रत के दौरान क्या खाया जा रहा है, भोजन कितनी मात्रा में लिया जा रहा है और शरीर को कितना पानी मिल रहा है, इन सभी बातों का सेहत पर असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि नवरात्र में व्रत रखने से जुड़ी गलत धारणाओं को समझा जाए और सेहत को नुकसान पहुंचाए बिना उपवास किया जाए।

क्या नवरात्र का व्रत शरीर को अंदर से साफ करता है?

व्रत के दौरान डिटॉक्स का विचार काफी प्रचलित है। कई लोगों को लगता है कि कुछ दिनों तक सामान्य भोजन छोड़कर फल और हल्का खाना खाने से शरीर में मौजूद टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। इसी सोच के चलते कुछ लोग व्रत के दौरान अपने भोजन को बहुत सीमित कर देते हैं या केवल जूस और फलों पर निर्भर रहते हैं।

हालांकि, शरीर को साफ रखने के लिए किसी विशेष डिटॉक्स डाइट या नौ दिनों के उपवास की जरूरत होने का दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। शरीर में लिवर और किडनी जैसे अंग पहले से ही अपशिष्ट पदार्थों को संसाधित करने और बाहर निकालने का काम करते हैं। इन अंगों के सामान्य कामकाज के लिए पर्याप्त पोषण और शरीर में पानी का उचित स्तर बनाए रखना जरूरी है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि नवरात्र में खानपान में बदलाव करने से कोई फायदा नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति इस दौरान अधिक तले-भुने भोजन की जगह फल, दही, मेवे और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाता है, तो उसकी डाइट बेहतर हो सकती है। लेकिन इसका फायदा संतुलित भोजन से जुड़ा है, न कि शरीर से टॉक्सिन्स निकालने के किसी विशेष दावे से।

व्रत में वजन कम होने के पीछे क्या है वजह?

नवरात्र में वजन घटने की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि शरीर का वजन कई कारणों से बदलता है। भोजन की मात्रा कम होने पर शरीर को मिलने वाली कैलोरी घट सकती है। यदि लंबे समय तक कैलोरी का सेवन शरीर की जरूरत से कम रहता है, तो वजन कम होने की संभावना होती है।

लेकिन केवल नौ दिनों तक व्रत रखने से शरीर की चर्बी कम होना तय नहीं है। इसका परिणाम व्यक्ति के खानपान, शारीरिक गतिविधि और दूसरी व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है। व्रत के दौरान वजन में अचानक गिरावट दिखाई देने पर यह भी संभव है कि शरीर में पानी की मात्रा कम हुई हो।

दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति फलाहार के नाम पर ज्यादा घी में बनी पूड़ियां, तले हुए पकवान, मिठाइयां और अधिक कैलोरी वाले स्नैक्स खाता है, तो कैलोरी का सेवन कम होने के बजाय बढ़ भी सकता है। ऐसे में वजन घटने की उम्मीद पूरी नहीं होती। इसलिए वजन कम करने के लिए व्रत को किसी निश्चित अवधि में परिणाम देने वाला तरीका नहीं समझना चाहिए। लंबे समय तक वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

भूख दबाकर रखना पड़ सकता है भारी

कुछ लोग व्रत के दौरान भूख लगने पर भी खाना नहीं खाते। उन्हें लगता है कि जितनी देर तक वे भोजन से दूर रहेंगे, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा। हालांकि, लंबे समय तक भूखे रहने का असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है और कुछ लोगों के लिए यह परेशानी का कारण बन सकता है।

पर्याप्त भोजन नहीं मिलने पर थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और ध्यान लगाने में कठिनाई जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। यदि पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं पिया जा रहा है, तो डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों को एसिडिटी या चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है।

लंबे अंतराल के बाद एक बार में बहुत ज्यादा खाना भी सही आदत नहीं है। इससे पेट भारी लगने और पाचन संबंधी परेशानी होने की आशंका रहती है। इसलिए व्रत के दौरान अपने शरीर की जरूरतों को समझना और भोजन की मात्रा के साथ-साथ उसके समय पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि व्रत के दौरान बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो या चक्कर आने जैसी परेशानी हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

फलाहार करने से भी हो सकती है पोषण की कमी

व्रत में फल खाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन केवल फलों के सहारे पूरे दिन की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है। शरीर को ऊर्जा के साथ प्रोटीन, वसा, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर की भी जरूरत होती है। इनकी मात्रा व्यक्ति की उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

यदि व्रत के दौरान भोजन में केवल आलू, साबूदाना या फल शामिल किए जाते हैं, तो डाइट में विविधता की कमी हो सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थ ऊर्जा प्रदान करते हैं, लेकिन इन्हें ही पूरे दिन के भोजन का आधार बना लेना संतुलित विकल्प नहीं है।

इसकी जगह व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों को मिलाकर भोजन तैयार किया जा सकता है। दूध, दही और पनीर से प्रोटीन सहित कई पोषक तत्व मिलते हैं। बादाम, अखरोट और मूंगफली जैसे मेवे ऊर्जा और वसा के स्रोत हैं। फल और उपयुक्त सब्जियां भी भोजन में विविधता बढ़ा सकती हैं।

कुट्टू, राजगिरा और समक जैसे विकल्पों को भी जरूरत और परंपरा के अनुसार शामिल किया जा सकता है। हालांकि, भोजन का सही संयोजन व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतों पर निर्भर करता है। केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को सेहतमंद मानकर बार-बार खाना पर्याप्त नहीं है।

व्रत के पकवानों में छिपी कैलोरी पर भी दें ध्यान

व्रत में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों को कई लोग सामान्य भोजन की तुलना में हल्का समझते हैं। लेकिन व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसे पकाने का तरीका भोजन की कैलोरी को प्रभावित करता है।

उदाहरण के लिए, कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी यदि ज्यादा तेल में तली गई है, तो उसमें कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। इसी तरह साबूदाने से तैयार पकवान में इस्तेमाल होने वाले तेल, घी, मूंगफली और आलू की मात्रा भी कुल कैलोरी को प्रभावित करती है। मिठाइयों और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी कैलोरी बढ़ा सकता है।

इसलिए व्रत के दौरान केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कोई खाद्य पदार्थ व्रत में खाया जाता है या नहीं। उसकी मात्रा, बनाने का तरीका और दूसरे खाद्य पदार्थों के साथ उसका संयोजन भी मायने रखता है।

भोजन को कम तेल में तैयार करना, जरूरत से ज्यादा खाने से बचना और अलग-अलग पौष्टिक विकल्पों को शामिल करना बेहतर तरीका हो सकता है। इसका मतलब पसंदीदा पकवानों से पूरी तरह दूरी बनाना नहीं, बल्कि खाने में संतुलन रखना है।

किन लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?

व्रत रखने का तरीका तय करते समय स्वास्थ्य की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए लंबे समय तक भोजन नहीं करना या दवाओं के समय में बदलाव करना ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर से सलाह लेकर ही उपवास की योजना बनानी चाहिए।

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी अपनी पोषण संबंधी जरूरतों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बुजुर्गों और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों के लिए भी लंबे समय तक भूखे रहना या पानी कम पीना जोखिम भरा हो सकता है। किडनी, हृदय या दूसरी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

व्रत के दौरान दवाएं छोड़ना, उनकी खुराक बदलना या पानी की मात्रा कम करना डॉक्टर की सलाह के बिना उचित नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार चक्कर आते हैं, बेहोशी महसूस होती है या गंभीर कमजोरी होती है, तो उसे तुरंत उचित चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

नवरात्र में व्रत रखते समय अपनाएं ये आदतें

व्रत के दौरान सेहत का ध्यान रखने के लिए कुछ सामान्य बातों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

  • पानी पीने में लापरवाही न करें: यदि व्रत के नियमों में पानी पीने की अनुमति है, तो दिनभर नियमित अंतराल पर पर्याप्त पानी पिएं।
  • पौष्टिक चीजें चुनें: फल, दूध, दही, पनीर, मेवे और व्रत में स्वीकार्य अन्य खाद्य पदार्थों को अपनी जरूरत के अनुसार शामिल करें।
  • खाने की मात्रा पर ध्यान दें: लंबे समय तक भूखे रहने के बाद जरूरत से ज्यादा खाने से बचें।
  • तले हुए पकवान सीमित रखें: अधिक तेल, घी और चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें।
  • आराम और नींद पूरी करें: पर्याप्त नींद लेने से थकान कम करने और सामान्य दिनचर्या बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
  • शरीर के संकेतों को समझें: कमजोरी, चक्कर या अन्य परेशानी होने पर उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें।

नवरात्र का व्रत आस्था, अनुशासन और परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसे तेजी से वजन घटाने या शरीर को डिटॉक्स करने का शॉर्टकट समझने के बजाय खानपान को बेहतर बनाने का अवसर माना जा सकता है। व्रत के दौरान संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, उचित आराम और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाने से शरीर की जरूरतों का ध्यान रखा जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपवास का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ सेहत को भी प्राथमिकता दी जाए।

(Photo : AI Generated)