अक्सर जब एलर्जी की बात होती है तो सबसे पहले धूल, मिट्टी, परागकण या किसी विशेष खाद्य पदार्थ का नाम दिमाग में आता है। ज्यादातर लोग इन्हीं चीजों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इसके बावजूद कई लोगों को बार-बार छींक आना, नाक बंद रहना, आंखों में खुजली, गले में खराश या त्वचा पर लाल चकत्तों जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एलर्जी खत्म क्यों नहीं हो रही?
दरअसल, एलर्जी के पीछे सिर्फ बाहरी कारण जिम्मेदार नहीं होते। हमारी रोजमर्रा की कई छोटी-छोटी आदतें और घर का वातावरण भी एलर्जी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कई बार ऐसे कारण हमारे सामने ही मौजूद होते हैं, लेकिन हम उन पर ध्यान नहीं देते। आइए जानते हैं उन छह बड़े कारणों के बारे में, जो बिना किसी शोर-शराबे के आपकी एलर्जी को लगातार ट्रिगर कर सकते हैं।
1. तनाव भी बन सकता है एलर्जी का बड़ा कारण
बहुत से लोग यह नहीं जानते कि मानसिक तनाव का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव, चिंता या मानसिक दबाव में रहता है तो शरीर में कई हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इन हार्मोन की वजह से शरीर में हिस्टामाइन रिलीज हो सकता है, जो एलर्जी के लक्षणों को तेज कर देता है।
ऑफिस का काम, परीक्षा का दबाव, आर्थिक परेशानियां या पारिवारिक तनाव जैसी स्थितियां एलर्जी को और गंभीर बना सकती हैं। यदि आपको महसूस होता है कि तनाव के दौरान छींक, नाक बंद होना या खुजली जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
तनाव कम करने के लिए पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें, योग या मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करें और मानसिक स्वास्थ्य का भी उतना ही ध्यान रखें जितना शारीरिक स्वास्थ्य का।
2. आपका बेडरूम भी हो सकता है एलर्जी का ठिकाना
घर का सबसे आरामदायक हिस्सा यानी बेडरूम कई बार एलर्जी की सबसे बड़ी वजह बन जाता है। गद्दे, तकिए, कंबल और चादरों में डस्ट माइट्स नाम के बेहद छोटे जीव पनपते हैं, जिन्हें आंखों से देख पाना संभव नहीं होता। इनके कण सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर एलर्जी पैदा कर सकते हैं।
अगर आपको रोज सुबह उठते ही लगातार छींकें आती हैं, नाक बंद रहती है या आंखों में पानी आने लगता है, तो इसका संबंध आपके बिस्तर से हो सकता है।
इससे बचने के लिए चादर और तकिए के कवर को सप्ताह में कम से कम एक बार 60 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान वाले पानी में धोना चाहिए। बेडरूम में धूल जमा करने वाले कालीन कम रखें और यदि संभव हो तो एलर्जेन-प्रूफ कवर का उपयोग करें।
3. एसी और कूलर की सफाई में लापरवाही बढ़ा सकती है परेशानी
गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर और कूलर राहत जरूर देते हैं, लेकिन अगर इनकी समय-समय पर सफाई नहीं की जाए तो यही उपकरण एलर्जी की वजह बन सकते हैं।
एसी और कूलर के फिल्टर में धूल, फफूंद और अन्य सूक्ष्म कण जमा हो जाते हैं। जब मशीन चालू होती है तो ये कण पूरे कमरे में फैल जाते हैं और सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
अगर एसी या कूलर ऑन करते ही छींक, खांसी या नाक बंद होने जैसी समस्या शुरू हो जाती है, तो फिल्टर की सफाई पर ध्यान देने की जरूरत है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फिल्टर को हर एक से तीन महीने के भीतर साफ या बदल देना चाहिए। बेहतर गुणवत्ता वाले HEPA फिल्टर का उपयोग करने से भी हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
4. खुशबूदार उत्पाद भी बन सकते हैं एलर्जी की वजह
घर को महकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रूम फ्रेशनर, सुगंधित मोमबत्तियां, अगरबत्ती, फैब्रिक सॉफ्टनर और कई तरह के परफ्यूम वातावरण में ऐसे रसायन छोड़ते हैं, जो संवेदनशील लोगों की सांस की नली को प्रभावित कर सकते हैं।
इसके अलावा नया पेंट, नया फर्नीचर, प्लाईवुड और कुछ प्रकार की फ्लोरिंग भी कई दिनों या हफ्तों तक हवा में केमिकल छोड़ते रहते हैं। यदि घर के अंदर ज्यादा समय बिताने पर एलर्जी बढ़ जाती है और बाहर निकलने पर राहत मिलती है, तो इसकी वजह घर के भीतर मौजूद यही रसायन हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें, खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें और तेज खुशबू वाले उत्पादों का सीमित उपयोग करें।
5. खाने की कुछ चीजें भी छिपी हुई एलर्जी का कारण बन सकती हैं
हर एलर्जी का कारण केवल मूंगफली, दूध या समुद्री भोजन ही नहीं होता। कई बार पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में मौजूद कृत्रिम रंग, प्रिजर्वेटिव्स और फ्लेवरिंग एजेंट भी शरीर में एलर्जी की प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।
कुछ लोगों में कच्चे फल या सब्जियां खाने के बाद भी मुंह में खुजली, गले में जलन या अन्य एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं। यह स्थिति कई बार परागकण से जुड़ी एलर्जी के कारण भी हो सकती है।
यदि आपको बार-बार किसी भोजन के बाद एलर्जी महसूस होती है तो फूड डायरी बनाना एक अच्छा तरीका है। इसमें रोजाना लिखें कि आपने क्या खाया और उसके बाद कौन से लक्षण महसूस हुए। इससे डॉक्टर को सही कारण पहचानने में मदद मिल सकती है।
6. प्रदूषित हवा एलर्जी को बना सकती है ज्यादा गंभीर
बढ़ता वायु प्रदूषण आज बड़े शहरों ही नहीं बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर कर देते हैं। इसके कारण शरीर बाहरी एलर्जेन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
इसके अलावा मौसम में बदलाव और जलवायु परिवर्तन की वजह से कई इलाकों में परागकण का मौसम पहले की तुलना में लंबा हो गया है, जिससे एलर्जी के मरीजों की परेशानी भी बढ़ रही है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) देखें। जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो तो बाहर कम निकलें, जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें और घर के अंदर हवा साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
एलर्जी के लक्षणों को हल्के में न लें
बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक बंद रहना, आंखों से पानी आना, त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते दिखना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार लौटकर आएं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।
एलर्जी का इलाज केवल दवा लेने तक सीमित नहीं है। इसके लिए जीवनशैली में सुधार, घर की साफ-सफाई, संतुलित खान-पान, तनाव पर नियंत्रण और आसपास के वातावरण को बेहतर बनाना भी उतना ही जरूरी है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
एलर्जी से पूरी तरह बचना हर बार संभव नहीं होता, लेकिन इसके ट्रिगर्स की पहचान करके काफी हद तक परेशानी कम की जा सकती है। अपने घर की नियमित सफाई करें, एसी और कूलर के फिल्टर समय पर साफ करें, बिस्तर को स्वच्छ रखें, जरूरत से ज्यादा केमिकल वाले उत्पादों का उपयोग न करें, संतुलित भोजन करें और मानसिक तनाव को कम करने की कोशिश करें।
यदि इन सभी सावधानियों के बावजूद आपकी एलर्जी लगातार बनी रहती है या समय के साथ बढ़ती जा रही है, तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। सही कारण की पहचान और उचित उपचार से एलर्जी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और रोजमर्रा की जिंदगी को अधिक आरामदायक बनाया जा सकता है।




