पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बदलेगी रात की तस्वीर, 13,500 गांवों में लगेंगी 3 लाख सोलर स्ट्रीट लाइटें

पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बदलेगी रात की तस्वीर, 13,500 गांवों में लगेंगी 3 लाख सोलर स्ट्रीट लाइटें

पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के करीब 13,500 गांवों को सौर ऊर्जा आधारित रोशनी से जोड़ने के लिए व्यापक योजना शुरू की गई है। इसके तहत प्रदेश के गांवों में लगभग तीन लाख सोलर लाइटें स्थापित की जाएंगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 470 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत बुधवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने की। सरकार का दावा है कि सोलर लाइटों की स्थापना से गांवों में रात के समय सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी की व्यवस्था बेहतर होगी और साथ ही पारंपरिक बिजली की खपत में भी कमी आएगी। परियोजना को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

योजना के तहत गांवों में लगाई जाने वाली सोलर लाइटों की स्थापना और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी चयनित कंपनियों को सौंपी गई है। कंपनियां केवल लाइटें लगाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि निर्धारित अवधि तक इनके संचालन, नियमित निरीक्षण और रखरखाव का काम भी करेंगी। इससे पंचायतों पर लाइटों की देखरेख का अतिरिक्त बोझ कम होने की उम्मीद है और खराब होने की स्थिति में मरम्मत की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

सरकार और ग्राम पंचायतों के बीच परियोजना की लागत को साझा करने की व्यवस्था तय की गई है। कुल खर्च में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी पंजाब सरकार की होगी, जबकि बाकी 30 प्रतिशत राशि संबंधित ग्राम पंचायतों को वहन करनी होगी। इस मॉडल के जरिए सरकार अधिक से अधिक गांवों को योजना में शामिल करने के साथ पंचायतों की भागीदारी भी सुनिश्चित करना चाहती है।

परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में राज्य के 2,617 गांवों को शामिल किया गया है। इन गांवों में कुल 50,870 सोलर लाइटें लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहले चरण का काम पूरा होने के बाद परियोजना का विस्तार प्रदेश के बाकी गांवों तक किया जाएगा। अंतिम चरण में करीब 13,500 गांवों में तीन लाख के आसपास सोलर लाइटें स्थापित करने की योजना है।

कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के अनुसार, पहले चरण सहित पूरी परियोजना से जुड़े काम को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा और लगभग चार महीने की अवधि में निर्धारित कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि तय समय सीमा के अनुसार काम पूरा होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों की रात की रोशनी व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।

सोलर लाइटों की स्थापना के लिए गांवों में ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां आम लोगों की आवाजाही अधिक होती है और रात के समय रोशनी की आवश्यकता रहती है। इसमें मंदिर, गुरुद्वारे, बस स्टैंड और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थल शामिल हैं। इसके अलावा गांवों की जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी लाइटें लगाई जा सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई सार्वजनिक स्थानों पर रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर गांवों के बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों और प्रमुख रास्तों के आसपास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। सोलर लाइटें लगने के बाद इन स्थानों पर रोशनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।

इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य ऊर्जा की बचत भी है। सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली लाइटें दिन के समय सूर्य की रोशनी से ऊर्जा संग्रहित करेंगी और रात में उसी ऊर्जा का इस्तेमाल रोशनी के लिए किया जाएगा। इससे इन लाइटों के संचालन के लिए पारंपरिक विद्युत आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी। लंबे समय में इससे बिजली की खपत और संबंधित खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार इस परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देने से भी जोड़कर देख रही है। पंजाब में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र हैं और गांवों में सार्वजनिक रोशनी के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ सकती है। इसके अलावा सोलर लाइटों के इस्तेमाल से बिजली बचत के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के प्रयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

अमन अरोड़ा ने कहा कि योजना का लाभ केवल शुरुआती चरण में शामिल किए गए गांवों तक सीमित नहीं रहेगा। पंजाब के अन्य गांव भी यदि इस सुविधा का लाभ उठाना चाहते हैं तो वे ग्रामीण विकास विभाग को अपनी सहमति दे सकते हैं। इसके बाद संबंधित प्रक्रिया के तहत उन्हें भी परियोजना में शामिल किए जाने की संभावना रहेगी।

ग्राम पंचायतों की भूमिका इस योजना में काफी महत्वपूर्ण होगी। चूंकि कुल परियोजना लागत का 30 प्रतिशत हिस्सा पंचायतों को देना है, इसलिए गांवों को अपनी जरूरत के अनुसार प्राथमिकताएं तय करने और योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों की जरूरत के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों का चयन करने में भी मदद मिल सकती है।

परियोजना में निजी कंपनियों को स्थापना के साथ रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई स्ट्रीट लाइटें खराब होने के बाद लंबे समय तक ठीक नहीं हो पातीं, जिससे योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है। इस परियोजना में कंपनियों को मेंटेनेंस की जिम्मेदारी दिए जाने से ऐसी स्थिति से बचने और लाइटों को नियमित रूप से चालू रखने की कोशिश की गई है।

करीब 470 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पंजाब के ग्रामीण बुनियादी ढांचे में एक बड़े निवेश के तौर पर देखी जा रही है। तीन लाख सोलर लाइटों की स्थापना होने के बाद हजारों गांवों के प्रमुख सार्वजनिक स्थान रात के समय बेहतर रोशनी से लैस हो सकते हैं। इससे ग्रामीण लोगों की सुविधा बढ़ने के साथ गांवों में सार्वजनिक स्थलों का उपयोग भी अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकता है।

सरकार की योजना केवल रोशनी उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण विकास के साथ-साथ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। यदि परियोजना निर्धारित समय और मानकों के अनुसार लागू होती है तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने की दिशा में भी मिसाल बन सकती है।

पहले चरण में 2,617 गांवों के लिए 50,870 लाइटों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद परियोजना को अन्य गांवों तक विस्तारित किया जाएगा। इस चरणबद्ध मॉडल के जरिए सरकार कार्य की निगरानी, स्थापना की गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था को भी बेहतर तरीके से लागू करने का प्रयास कर सकती है।

ग्रामीण पंजाब में सोलर लाइटों का विस्तार स्थानीय लोगों के लिए कई स्तरों पर उपयोगी साबित हो सकता है। रात में बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर रोशनी से आवागमन आसान होगा। धार्मिक स्थलों के आसपास प्रकाश व्यवस्था सुधरेगी और गांवों के प्रमुख हिस्सों में अंधेरे वाले स्थानों की समस्या कम हो सकती है। साथ ही सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के कारण बिजली की बचत भी होगी।

कुल मिलाकर, पंजाब सरकार की 470 करोड़ रुपये की यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है। करीब 13,500 गांवों में तीन लाख सोलर लाइटें लगाने का लक्ष्य पूरा होने पर राज्य के ग्रामीण इलाकों की रात की तस्वीर काफी बदल सकती है। पहले चरण में 2,617 गांवों से शुरुआत होने के बाद सरकार चार महीने के भीतर काम पूरा करने की तैयारी में है। अब परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लाइटों की स्थापना तय समय पर कितनी प्रभावी ढंग से होती है और निजी कंपनियां लंबे समय तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किस तरह निभाती हैं।