पूर्व रेल राज्य मंत्री एवं भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब में रेलवे नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी 1,419 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी मिलने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल संपर्क मजबूत होगा और कई महत्वपूर्ण रेल मार्ग आपस में जुड़ सकेंगे। बिट्टू ने इसे पंजाब के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम बताते हुए परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया।
बिट्टू के अनुसार, प्रस्तावित रेलवे परियोजना का उद्देश्य ब्यास से कादियां तथा आगे बटाला-कादियां रेल लाइन को जोड़ने के साथ-साथ पंजाब के सीमावर्ती इलाकों को बेहतर रेल नेटवर्क से जोड़ना है। इस कनेक्टिविटी के विकसित होने से ब्यास और श्री अमृतसर साहिब की दिशा से आने वाली रेल लाइनों को पठानकोट की ओर से आने वाले रेल मार्ग से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल आवागमन का एक अधिक मजबूत और सीधा नेटवर्क तैयार हो सकेगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लिए यह परियोजना केवल एक सामान्य रेलवे लाइन का निर्माण नहीं है, बल्कि इससे राज्य के उन क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी, जो भौगोलिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। सीमावर्ती इलाकों में बेहतर रेल संपर्क से यात्रियों की आवाजाही के साथ-साथ व्यापार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
बिट्टू ने बताया कि परियोजना के लिए लगभग 166 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण, निर्माण कार्य, सिग्नलिंग सिस्टम, विद्युत एवं वायरिंग व्यवस्था सहित रेलवे से संबंधित विभिन्न बुनियादी ढांचे पर भी खर्च किया जाएगा। इन सभी कार्यों को मिलाकर परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,419 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
भाजपा नेता ने परियोजना को मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित इस कार्य को अब आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित विभाग परियोजना की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएंगे और निर्माण कार्य को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाएगा।
हालांकि परियोजना की मंजूरी का स्वागत करने के साथ ही बिट्टू ने पिछली सरकारों और संबंधित स्तरों पर हुई देरी को लेकर सवाल भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना को समय पर लागू न किए जाने के कारण इसकी अनुमानित लागत लगातार बढ़ती चली गई। उनके मुताबिक, जब इस परियोजना की शुरुआती योजना तैयार की गई थी, तब इसकी लागत लगभग 500 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ परियोजना की लागत बढ़कर करीब 841 करोड़ रुपये हुई और अब यही परियोजना 1,419 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। बिट्टू ने इसे सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं में देरी का सीधा असर जनता के पैसे पर पड़ता है।
उनका कहना है कि सरकार द्वारा खर्च किया जाने वाला पैसा आम लोगों से प्राप्त टैक्स का पैसा होता है। इसलिए किसी भी बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद उसे समय पर पूरा करना संबंधित अधिकारियों और विभागों की जिम्मेदारी है। बिट्टू ने कहा कि केवल परियोजना को मंजूरी मिलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन अधिग्रहण से लेकर निर्माण और रेलवे संचालन तक प्रत्येक चरण को निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ाना जरूरी है।
बिट्टू ने अधिकारियों को आगाह करते हुए कहा कि यदि मंजूर रेलवे परियोजनाओं को जानबूझकर या अनावश्यक रूप से लटकाया गया तो वह आने वाले समय में इन मामलों को जमीनी स्तर पर उठाएंगे। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पूर्व रेल राज्य मंत्री ने कहा कि पंजाब में रेलवे से जुड़े कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनका राज्य के आर्थिक और रणनीतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। इन परियोजनाओं को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर पूरा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध करवाना केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए।
बिट्टू ने पंजाब की सभी राजनीतिक पार्टियों से भी अपील की कि वे रेलवे परियोजनाओं के मामले में एकजुट होकर काम करें। उनका कहना है कि जब केंद्र सरकार पंजाब के लिए कोई महत्वपूर्ण रेलवे परियोजना मंजूर करती है तो उसका श्रेय लेने या राजनीतिक बहस करने के बजाय सभी दलों को उसके समय पर क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने किसान संगठनों से भी सहयोग की अपील की। बिट्टू के अनुसार, जमीन अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं में कई बार स्थानीय स्तर पर समस्याएं सामने आती हैं। यदि किसान संगठनों, स्थानीय लोगों, प्रशासन और रेलवे के बीच बेहतर समन्वय रहे तो परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
ब्यास-कादियां-बटाला-कादियां रेल कनेक्टिविटी को लेकर उन्होंने कहा कि इससे पंजाब के कई हिस्सों के बीच रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। ब्यास और अमृतसर की तरफ से आने वाले रेल मार्गों को पठानकोट की दिशा से जोड़ने से ट्रेनों के संचालन के लिए नए विकल्प तैयार हो सकते हैं। इससे यात्रियों को भी भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
सीमावर्ती इलाकों के लिए इस तरह की परियोजनाओं का महत्व और भी अधिक है। पंजाब का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है और इन क्षेत्रों में परिवहन तथा बुनियादी ढांचे को मजबूत करना रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। बेहतर रेल संपर्क से न केवल आम लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि आपूर्ति और माल ढुलाई की क्षमता में भी सुधार हो सकता है।
कृषि प्रधान पंजाब के लिए रेलवे नेटवर्क का विस्तार किसानों और व्यापारियों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए सड़क के साथ-साथ रेल परिवहन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि नई रेल कनेक्टिविटी से माल ढुलाई के विकल्प बढ़ते हैं तो इससे परिवहन लागत और समय को कम करने में मदद मिल सकती है।
बिट्टू ने कहा कि पंजाब को विकास की दृष्टि से नए रेलवे कॉरिडोर और बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत है। राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, व्यापार को गति देने और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक अवसर बढ़ाने के लिए मजबूत रेल नेटवर्क जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि परियोजना की लागत में लगातार हुई वृद्धि से सबक लेने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि किसी परियोजना को शुरुआती चरण में ही समयबद्ध तरीके से लागू कर दिया जाए तो सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ से बचा जा सकता है। लंबे समय तक फाइलों में अटकी रहने वाली परियोजनाओं में जमीन, निर्माण सामग्री, मजदूरी और अन्य लागतों में वृद्धि के कारण बजट कई गुना बढ़ सकता है।
बिट्टू ने कहा कि भविष्य में मंजूर होने वाली परियोजनाओं के लिए भी स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए। जमीन अधिग्रहण, टेंडर, निर्माण और तकनीकी कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की निगरानी होनी चाहिए। यदि किसी चरण में देरी होती है तो उसका कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने पंजाब के लोगों से भी अपील की कि वे ऐसे विकास कार्यों को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय राज्य के दीर्घकालिक हित में सहयोग करें। उनके मुताबिक, रेलवे जैसे बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं कई दशकों तक लोगों के काम आती हैं और इनका लाभ आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता है।
बिट्टू ने कहा कि 1,419 करोड़ रुपये की यह परियोजना पंजाब के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। अब जरूरत इस बात की है कि मंजूरी के बाद इसका क्रियान्वयन तेजी से शुरू हो। उन्होंने संबंधित विभागों से आग्रह किया कि भूमि अधिग्रहण और अन्य औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर निर्माण कार्य को गति दी जाए।
उन्होंने दोहराया कि अगर परियोजना में किसी स्तर पर अनावश्यक अड़चन आती है तो वह इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाली परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
कुल मिलाकर, ब्यास-कादियां और बटाला-कादियां क्षेत्र को व्यापक रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाली 1,419 करोड़ रुपये की परियोजना को पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम माना जा रहा है। परियोजना से जहां रेल नेटवर्क के विस्तार की उम्मीद है, वहीं रवनीत सिंह बिट्टू ने इसकी मंजूरी का स्वागत करते हुए सरकार और अधिकारियों से इसे समय पर पूरा करने की मांग उठाई है। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और किसान संगठनों से अपील की है कि वे परियोजना के क्रियान्वयन में सहयोग करें, ताकि वर्षों से लंबित यह काम अब और देरी का शिकार न हो।




