पीजीआई की न्यू ओपीडी कैंटीन का लाइसेंस रद्द, मरीजों से अधिक वसूली और डीजल भट्ठी के इस्तेमाल पर कार्रवाई

पीजीआई की न्यू ओपीडी कैंटीन का लाइसेंस रद्द, मरीजों से अधिक वसूली और डीजल भट्ठी के इस्तेमाल पर कार्रवाई

31 दिसंबर तक कैंटीन खाली करने के आदेश, निरीक्षण में मिली अनियमितताओं पर संचालक पर पहले भी लगाया गया था जुर्माना

चंडीगढ़। मरीजों और उनके तीमारदारों से निर्धारित दरों से अधिक पैसे वसूलने तथा सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने के मामले में पीजीआई चंडीगढ़ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। संस्थान की न्यू ओपीडी ब्लॉक स्थित कैंटीन का लाइसेंस समाप्त कर दिया गया है। कैंटीन में डीजल से चलने वाली भट्ठी का इस्तेमाल करने और मरीजों से अधिक कीमत वसूलने संबंधी शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया। संस्थान ने कैंटीन संचालक को 31 दिसंबर तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया है।

पीजीआई प्रशासन के अनुसार, कैंटीन के संचालन में सामने आई शिकायतों की जांच की गई थी। इसके लिए निरीक्षण समिति ने अलग-अलग तारीखों पर कैंटीन का दौरा किया और वहां की व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर संचालक से स्पष्टीकरण मांगा गया। हालांकि, संस्थान ने उसके जवाब को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद पहले जुर्माना लगाया गया और अब लाइसेंस समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब पीजीआई में इलाज के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। अस्पताल परिसर में कैंटीन जैसी सुविधाओं का संचालन मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना आवश्यक है। निर्धारित दरों का पालन और अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों का अनुपालन ऐसी व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

तीन साल के लिए मिला था कैंटीन का ठेका

पीजीआई की एस्टेट ब्रांच के अनुसार, न्यू ओपीडी ब्लॉक स्थित कैंटीन का ठेका बलजीत सिंह को 19 अगस्त 2025 को तीन साल की अवधि के लिए दिया गया था। इसके लिए 20.20 लाख रुपये से अधिक का मासिक लाइसेंस शुल्क और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) निर्धारित किया गया था।

ठेका दिए जाने के बाद कैंटीन में भोजन और अन्य खाद्य सामग्री की बिक्री तथा संचालन संबंधी नियमों का पालन करना संचालक की जिम्मेदारी थी। लाइसेंस की शर्तों के तहत रसोई में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार गैस की आपूर्ति, व्यावसायिक गैस उपकरणों का इस्तेमाल और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी थी।

हालांकि, कैंटीन के संबंध में मिली शिकायतों के बाद संस्थान ने इसकी कार्यप्रणाली की जांच शुरू की। निरीक्षण में सामने आई कमियों और संचालक की ओर से दिए गए जवाब की समीक्षा के बाद प्रशासन ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

दो निरीक्षणों में मिलीं अनियमितताएं

शिकायतों के आधार पर गठित निरीक्षण समिति ने 2 दिसंबर 2025 और 18 मई 2026 को कैंटीन का निरीक्षण किया था। दोनों अवसरों पर अनियमितताएं सामने आने के बाद कैंटीन संचालक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

संस्थान ने संचालक से कमियों के संबंध में जवाब मांगा, लेकिन उसे संतोषजनक नहीं पाया। इसके बाद पहली कार्रवाई के तहत 11,800 रुपये और दूसरी बार 23,600 रुपये का जुर्माना लगाया गया।

इन निरीक्षणों के दौरान सामने आए मामलों में मरीजों और उनके तीमारदारों से निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें भी शामिल थीं। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को अक्सर लंबे समय तक परिसर में रहना पड़ता है। ऐसे में भोजन और पेय पदार्थों की उपलब्धता उनके लिए जरूरी होती है। निर्धारित दरों से अधिक वसूली की शिकायतों को इसी कारण गंभीरता से लिया गया।

पीजीआई प्रशासन ने निरीक्षण रिपोर्टों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर मामले की समीक्षा की। पहले जुर्माना लगाए जाने के बावजूद जब शिकायतों और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मुद्दों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ, तो लाइसेंस समाप्त करने का फैसला लिया गया।

कारण बताओ नोटिस के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ प्रशासन

पीजीआई ने 5 सितंबर 2026 को कैंटीन संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के माध्यम से संचालक से पूछा गया था कि सामने आई अनियमितताओं के मद्देनजर उसके खिलाफ लाइसेंस समाप्त करने की कार्रवाई क्यों न की जाए।

संचालक ने 11 सितंबर को अपना जवाब प्रस्तुत किया। उसने आरोपों को निराधार बताते हुए प्रस्तावित कार्रवाई को अनुचित करार दिया था। इसके बावजूद संस्थान ने जवाब को स्वीकार नहीं किया।

प्रशासन ने निरीक्षण रिपोर्टों, प्राप्त शिकायतों, संबंधित पत्राचार और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की। इस प्रक्रिया के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि संचालक का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं है। इसके बाद कैंटीन का लाइसेंस समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।

लाइसेंस समाप्त होने के साथ ही कैंटीन संचालक को 31 दिसंबर तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है। इससे कैंटीन के मौजूदा संचालन पर असर पड़ेगा। हालांकि, कैंटीन के आगे संचालन के लिए नई व्यवस्था कब और किस तरह की जाएगी, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

डीजल भट्ठी के इस्तेमाल को बताया गया सुरक्षा के लिए जोखिम

कैंटीन के खिलाफ कार्रवाई का एक प्रमुख आधार रसोई में डीजल से चलने वाली भट्ठी का इस्तेमाल भी रहा। पीजीआई के अग्निशमन अधिकारी ने 23 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट में कैंटीन परिसर के भीतर डीजल भट्ठी के इस्तेमाल की जानकारी दी थी।

रिपोर्ट में इस व्यवस्था को इमारत और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण बताया गया था। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में मरीज, तीमारदार, डॉक्टर, कर्मचारी और अन्य लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे स्थान पर रसोई में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और उपकरणों से संबंधित सुरक्षा नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण होता है।

आग लगने की आशंका या किसी अन्य आपात स्थिति में अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसी वजह से अग्निशमन व्यवस्था और निर्धारित ईंधन प्रणाली का पालन आवश्यक माना जाता है।

पीजीआई की ओर से निर्धारित लाइसेंस शर्तों के अनुसार, कैंटीन की रसोई में एलपीजी की आपूर्ति तय पाइपलाइन के माध्यम से की जानी थी। इसके अलावा व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्धारित गैस उपकरणों का इस्तेमाल और पर्याप्त अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता भी अनिवार्य थी।

डीजल भट्ठी के इस्तेमाल की जानकारी अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्ट में दर्ज होने के बाद यह मामला सुरक्षा नियमों के अनुपालन से भी जुड़ गया। प्रशासन ने अन्य शिकायतों और निरीक्षण निष्कर्षों के साथ इस पहलू को भी लाइसेंस समाप्त करने के फैसले में शामिल किया।

मरीजों और तीमारदारों के हितों से जुड़ा मामला

पीजीआई चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई मरीजों को उपचार के दौरान लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है। ऐसे में उनके साथ आने वाले परिजन भोजन और अन्य जरूरी सामान के लिए अस्पताल परिसर की कैंटीन पर निर्भर रहते हैं।

कैंटीन में खाद्य सामग्री की निर्धारित कीमतों का पालन, साफ-सफाई और सुरक्षित रसोई व्यवस्था मरीजों तथा उनके परिजनों के हितों से सीधे जुड़ी होती है। यदि निर्धारित दरों से अधिक वसूली की शिकायतें मिलती हैं या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन सामने आता है, तो इससे अस्पताल परिसर में उपलब्ध सुविधाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

न्यू ओपीडी ब्लॉक की कैंटीन के मामले में पीजीआई प्रशासन ने शिकायतों और निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की है। पहले जुर्माना लगाने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद लाइसेंस समाप्त करने का फैसला यह दर्शाता है कि संस्थान ने मामले को केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि रसोई में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और अग्नि सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर भी विचार किया।

31 दिसंबर तक खाली करना होगा परिसर

लाइसेंस समाप्त करने के आदेश के बाद अब कैंटीन संचालक को 31 दिसंबर तक परिसर खाली करना होगा। इसके बाद कैंटीन के संचालन को लेकर पीजीआई प्रशासन की ओर से की जाने वाली अगली व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि न्यू ओपीडी ब्लॉक में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को भोजन संबंधी सुविधाओं की जरूरत बनी रहेगी।

नई व्यवस्था में निर्धारित दरों का पालन, सुरक्षित रसोई संचालन, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और नियमित निरीक्षण जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होगा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को उचित कीमतों पर भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ अस्पताल परिसर में सुरक्षा मानकों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल, पीजीआई प्रशासन ने कैंटीन संचालक के खिलाफ लाइसेंस समाप्त करने की कार्रवाई पूरी कर दी है। निरीक्षण में मिली अनियमितताओं, पहले लगाए गए जुर्माने, कारण बताओ नोटिस के जवाब और अग्निशमन अधिकारी की रिपोर्ट को इस फैसले का आधार बनाया गया है। अब निर्धारित समयसीमा के भीतर कैंटीन खाली कराने और आगे की व्यवस्था पर नजर रहेगी।