प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में क्यों होने लगते हैं ये बदलाव? वजन बढ़ने के पीछे छिपी हैं 6 बड़ी वजहें

प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में क्यों होने लगते हैं ये बदलाव? वजन बढ़ने के पीछे छिपी हैं 6 बड़ी वजहें

मां बनना किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास अनुभव होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। बच्चे के विकास से लेकर प्रसव की तैयारी तक, शरीर कई स्तरों पर खुद को बदलता है। हालांकि, बच्चे के जन्म के बाद भी ये बदलाव तुरंत खत्म नहीं होते। अक्सर देखा जाता है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं का वजन पहले की तुलना में बढ़ जाता है या प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा हुआ वजन लंबे समय तक बना रहता है। कई महिलाएं इसके लिए खान-पान को जिम्मेदार मानती हैं, जबकि कुछ को लगता है कि शारीरिक गतिविधियां कम होने की वजह से ऐसा हो रहा है। लेकिन इसके पीछे केवल एक कारण नहीं होता। हार्मोन में बदलाव से लेकर नींद की कमी और मानसिक तनाव तक कई चीजें प्रसव के बाद वजन को प्रभावित कर सकती हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिला का शरीर एक रिकवरी प्रक्रिया से गुजरता है। इस दौरान शरीर को पहले जैसी स्थिति में लौटने में समय लग सकता है। ऐसे में डिलीवरी के तुरंत बाद वजन कम न होना या कुछ अतिरिक्त वजन बने रहना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। हालांकि, अगर वजन लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ दूसरे शारीरिक लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बच्चे के जन्म के बाद भी शरीर में बना रहता है अतिरिक्त फैट

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में बच्चे की जरूरतों को पूरा करने के लिए कई तरह के बदलाव होते हैं। इस दौरान शरीर अतिरिक्त ऊर्जा जमा करने के लिए फैट का भंडार तैयार करता है। यह जमा हुआ फैट गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास और भविष्य में स्तनपान के दौरान ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।

डिलीवरी के बाद बच्चे का जन्म तो हो जाता है, लेकिन शरीर में जमा अतिरिक्त फैट एकदम से खत्म नहीं होता। इसे कम होने में कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं। हर महिला का शरीर अलग तरीके से रिकवर करता है। किसी का वजन कुछ महीनों में कम होने लगता है, जबकि किसी महिला को पहले वाले वजन के करीब पहुंचने में अधिक समय लग सकता है।

इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ वजन केवल फैट की वजह से नहीं होता। इसमें बच्चे का वजन, प्लेसेंटा, शरीर में बढ़ा हुआ ब्लड वॉल्यूम और अतिरिक्त तरल पदार्थ भी शामिल होते हैं। डिलीवरी के बाद इन चीजों में धीरे-धीरे कमी आती है, लेकिन शरीर में जमा फैट को कम होने में अलग समय लगता है।

हार्मोन में बदलाव भी हो सकता है बड़ी वजह

प्रसव के बाद महिला के शरीर में हार्मोन का स्तर तेजी से बदलता है। प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है। बच्चे के जन्म के बाद इनका स्तर कम होने लगता है। इन बदलावों का असर शरीर की कई प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

हार्मोन शरीर में भूख, ऊर्जा के इस्तेमाल और फैट के वितरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं को पहले से ज्यादा भूख लग सकती है। वहीं, कुछ महिलाओं को थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होती है, जिसके कारण उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

इसके अलावा, प्रसव के बाद कुछ महिलाओं में पोस्टपार्टम थायरॉइडाइटिस की समस्या भी देखने को मिलती है। यह थायरॉइड ग्रंथि में होने वाली सूजन से जुड़ी स्थिति है। इसमें थायरॉइड हार्मोन के स्तर में बदलाव हो सकता है। कुछ मामलों में शुरुआत में थायरॉइड हार्मोन बढ़ सकता है और बाद में इसका स्तर कम हो सकता है। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनता है, तो थकान, सुस्ती और वजन बढ़ने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।

अगर डिलीवरी के बाद महिला का वजन लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, त्वचा में रूखापन या असामान्य थकान जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

नवजात की देखभाल में बिगड़ जाता है सोने का रूटीन

बच्चे के जन्म के बाद मां की जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव उसकी दिनचर्या का होता है। नवजात शिशु को समय-समय पर दूध पिलाना, डायपर बदलना और उसकी जरूरतों का ध्यान रखना पड़ता है। इस वजह से मां को रात में लगातार कई घंटे सोने का मौका नहीं मिल पाता।

पर्याप्त नींद न लेना भी वजन बढ़ने की एक वजह बन सकता है। नींद की कमी से शरीर में भूख और पेट भरा होने का एहसास कराने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। इससे बार-बार खाने की इच्छा हो सकती है। कई बार महिलाएं थकान दूर करने के लिए मीठी चीजें या अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ खाने लगती हैं।

लगातार नींद पूरी न होने से शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है। ऐसे में नियमित रूप से टहलना, व्यायाम करना या दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। धीरे-धीरे इसका असर वजन पर दिखाई दे सकता है।

तनाव और मानसिक बदलावों को भी न करें नजरअंदाज

डिलीवरी के बाद महिला केवल शारीरिक बदलावों से ही नहीं गुजरती, बल्कि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति में भी कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। बच्चे की जिम्मेदारी, पर्याप्त आराम न मिलना और नई भूमिका के साथ तालमेल बैठाने का दबाव तनाव पैदा कर सकता है।

कुछ महिलाएं प्रसव के बाद चिंता, चिड़चिड़ापन और उदासी महसूस करती हैं। कई बार भावनात्मक तनाव का असर खाने की आदतों पर पड़ता है। तनाव के दौरान कुछ महिलाओं की भूख कम हो जाती है, जबकि कुछ महिलाएं बार-बार खाने लगती हैं। इसे इमोशनल ईटिंग भी कहा जाता है।

अगर महिला तनाव के कारण बार-बार अधिक कैलोरी वाला भोजन कर रही है और उसकी शारीरिक गतिविधियां भी कम हो गई हैं, तो वजन बढ़ने की आशंका हो सकती है। इसलिए डिलीवरी के बाद मां की मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना उसकी शारीरिक रिकवरी का।

परिवार के सदस्यों को भी इस दौरान मां का सहयोग करना चाहिए। बच्चे की देखभाल में मदद मिलने से महिला को आराम करने और अपनी सेहत पर ध्यान देने का समय मिल सकता है।

क्या स्तनपान कराने से कम हो जाता है वजन?

अक्सर कहा जाता है कि बच्चे को स्तनपान कराने से मां का वजन तेजी से कम होता है। इसके पीछे एक वैज्ञानिक वजह है। स्तनपान के दौरान महिला के शरीर को दूध बनाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया में शरीर कैलोरी खर्च करता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला का वजन स्तनपान कराने से जरूर कम होगा। कुछ महिलाओं में स्तनपान के दौरान वजन घटता है, जबकि कुछ का वजन लंबे समय तक लगभग एक जैसा बना रह सकता है। इसका संबंध शरीर की बनावट, हार्मोन, खान-पान, नींद और शारीरिक गतिविधियों से भी होता है।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। केवल वजन घटाने के लिए भोजन की मात्रा बहुत कम करना सही नहीं है। ऐसा करने से मां की सेहत और पोषण संबंधी जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं।

डिलीवरी के बाद वजन कम करने के लिए क्या करें?

प्रसव के बाद वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी है कि महिला अपने शरीर को पर्याप्त समय दे। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान शरीर ने काफी बदलाव झेले होते हैं। ऐसे में तुरंत पहले जैसा वजन पाने की कोशिश करना सही नहीं है।

महिलाएं अपनी दिनचर्या में कुछ आसान बदलाव करके धीरे-धीरे सेहत सुधार सकती हैं।

1. संतुलित भोजन को दें प्राथमिकता: खाने में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज, दूध और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे।

2. पर्याप्त पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी न होने दें। खासकर स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपनी जरूरत के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेने चाहिए।

3. हल्की गतिविधियों से करें शुरुआत: डॉक्टर की अनुमति मिलने के बाद धीरे-धीरे टहलना और हल्की एक्सरसाइज शुरू की जा सकती है। शुरुआत में शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें।

4. नींद और आराम का रखें ध्यान: नवजात की देखभाल के बीच जब भी मौका मिले, आराम करने की कोशिश करें। परिवार के सदस्यों की मदद लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

5. क्रैश डाइट से बचें: तेजी से वजन घटाने के लिए भोजन छोड़ना या बहुत कम कैलोरी लेना नुकसानदायक हो सकता है। इससे शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता।

6. मानसिक सेहत का भी रखें ख्याल: तनाव कम करने के लिए परिवार के साथ समय बिताएं और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

डिलीवरी के बाद वजन में बदलाव सामान्य हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। अगर लगातार वजन बढ़ रहा है, बहुत ज्यादा थकान रहती है, शरीर में सूजन है या थायरॉइड से जुड़े लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो गाइनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

इसके अलावा, अगर प्रसव के बाद लंबे समय तक उदासी, बेचैनी, चिंता या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।

डिलीवरी के बाद वजन बढ़ने के पीछे केवल खान-पान या एक्सरसाइज की कमी जिम्मेदार नहीं होती। शरीर में हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था के दौरान जमा हुआ फैट, नींद की कमी, तनाव और नई दिनचर्या भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए मां बनने के बाद महिलाओं को वजन के आंकड़े पर ध्यान देने के बजाय अपनी सेहत, पोषण और रिकवरी को प्राथमिकता देनी चाहिए। वजन कम करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही अपनाना बेहतर होता है।

(Photo : AI Generated)