चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस और इंडी गठबंधन के विरोध-प्रदर्शनों के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार निशाना साधा है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फॉर्म 6 को लेकर राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 को गैर-कानूनी नहीं बताया है। उनके मुताबिक, अदालत ने केवल उन आरोपों पर विचार करने की बात कही है, जिनमें फॉर्म 6 में कथित बदलाव किए जाने का दावा किया गया है। बीजेपी का कहना है कि इस पूरे मामले को कांग्रेस राजनीतिक मुद्दा बनाकर चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने मांगा स्पष्टीकरण
संबित पात्रा ने राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद किए गए दावों को लेकर कहा कि कांग्रेस नेता ने फॉर्म 6 को लेकर जनता के सामने तथ्य सही तरीके से पेश नहीं किए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने बयान में चुनाव आयोग पर हमला करने के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी का भी उल्लेख किया है, इसलिए बीजेपी की ओर से इस पर प्रतिक्रिया देना जरूरी है। पात्रा के मुताबिक, राहुल गांधी ने अदालत की कार्यवाही को जिस तरह से प्रस्तुत किया, उससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 को ही अवैध करार दे दिया है। बीजेपी नेता ने इस दावे को गलत बताया।
पात्रा ने कहा कि अदालत में जिस विषय पर चर्चा हुई, वह फॉर्म 6 को पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित करने का मामला नहीं था। उनके मुताबिक, याचिका में इस फॉर्म में कथित तौर पर किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसी पहलू पर जांच या विचार करने की सहमति जताई है। बीजेपी का कहना है कि अदालत की टिप्पणी और किसी प्रक्रिया की जांच पर सहमति को फॉर्म 6 को अवैध घोषित किए जाने के रूप में पेश करना तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सामने रखने जैसा है।
बीजेपी बोली- कोर्ट ने फॉर्म 6 को अवैध नहीं कहा
संबित पात्रा ने कहा कि फॉर्म 6 से संबंधित मामले में सबसे अहम बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे गैर-कानूनी घोषित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने याचिका में उठाए गए उन बिंदुओं पर गौर किया, जिनमें फॉर्म में कथित बदलाव की बात कही गई थी। अब यदि इस तरह के किसी बदलाव का दावा किया जा रहा है, तो उसकी वास्तविक स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।
बीजेपी प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी ने फॉर्म 6 में किसी तरह के बदलाव के लिए अपनी सहमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में किसी स्तर पर कोई परिवर्तन हुआ है, तो उसके बारे में स्थिति संबंधित नोटिस और आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। उनके अनुसार, फिलहाल इस मामले को लेकर यह निष्कर्ष निकालना कि अदालत ने फॉर्म 6 को गैर-कानूनी घोषित कर दिया है, सही नहीं है।
चुनाव आयोग के बयान का भी दिया हवाला
संबित पात्रा ने अपने तर्क के समर्थन में चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति का हवाला भी दिया। उन्होंने कहा कि आयोग ने स्पष्ट रूप से बताया था कि फॉर्म 6 में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। बीजेपी नेता के मुताबिक, अदालत के आदेश और चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण को साथ रखकर देखने पर मामले को लेकर तस्वीर साफ हो जाती है।
पात्रा ने कहा कि संबंधित घोषणा को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट रखा था। उनका कहना था कि इस पूरे मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसमें यह कहा जा सके कि अदालत ने फॉर्म 6 को ही असंवैधानिक या अवैध घोषित कर दिया। बीजेपी ने इसी आधार पर राहुल गांधी के दावे पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता न्यायिक कार्यवाही को राजनीतिक संदेश में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी मार्च पर भी हमला
बीजेपी ने केवल फॉर्म 6 के मुद्दे तक खुद को सीमित नहीं रखा। संबित पात्रा ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्तावित मार्च को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। बीजेपी के मुताबिक, चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार राजनीतिक प्रदर्शन करके कांग्रेस देश में संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रही है।
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति का उद्देश्य केवल किसी एक मुद्दे पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे सत्ता परिवर्तन की एक व्यापक राजनीतिक रणनीति दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल देश की संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठाकर राहुल गांधी के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं।
बीजेपी प्रवक्ता ने दावा किया कि कांग्रेस लंबे समय से राहुल गांधी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति के जरिए अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद अब पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का रास्ता अपना रही है। पात्रा ने इसे एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर इस तरह के हमले देश के लिए उचित नहीं हैं।
‘बार-बार लॉन्च और री-लॉन्च’ का तंज
संबित पात्रा ने राहुल गांधी के राजनीतिक सफर पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पिछले कई वर्षों से उन्हें बार-बार लॉन्च और री-लॉन्च करने की कोशिश कर रही है। बीजेपी नेता के मुताबिक, जब चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से राहुल गांधी को वह राजनीतिक सफलता नहीं मिली जिसकी कांग्रेस उम्मीद कर रही थी, तब पार्टी ने संस्थाओं के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। पात्रा के अनुसार, चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था के फैसले पर सवाल उठाना राजनीतिक दलों का अधिकार हो सकता है, लेकिन आरोपों को तथ्यों के साथ रखना भी उतना ही जरूरी है।
कांग्रेस पर अराजकता का माहौल बनाने का आरोप
बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस की मौजूदा रणनीति को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार असफलताओं के बाद अब देश में राजनीतिक और संस्थागत टकराव की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर मार्च करने जैसे कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दल दबाव की राजनीति कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और प्रदर्शन की अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल खड़े करना और उनके खिलाफ अभियान चलाना अलग बात है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए संस्थाओं को विवाद के केंद्र में ला रही है।
पात्रा ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था कई संस्थाओं के आपसी संतुलन पर आधारित है। ऐसे में किसी संस्था के निर्णय से असहमति होने पर राजनीतिक और कानूनी रास्ते अपनाए जा सकते हैं, लेकिन जनता के बीच गलत तथ्य पहुंचाने से भ्रम पैदा होता है। बीजेपी ने कांग्रेस से फॉर्म 6 और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर अपने दावों को स्पष्ट करने की मांग की।
बिहार SIR के आदेश का भी किया जिक्र
संबित पात्रा ने बिहार में मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मामले में तथ्यों को देखने पर अलग तस्वीर सामने आती है। बीजेपी नेता ने दावा किया कि बिहार में SIR से संबंधित आदेश चुनाव आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी के बाद जारी किया गया था।
उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर इस फैसले को लेकर किसी तरह के मतभेद का दावा सही नहीं है। पात्रा के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों से पता चलता है कि संबंधित आदेश को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आयोग के इस आदेश को उचित ठहराया था। बीजेपी का तर्क है कि इन घटनाक्रमों को देखने के बाद चुनाव आयोग के भीतर गंभीर असहमति या विवाद होने की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना सही नहीं होगा।
बीजेपी ने विपक्ष से तथ्यों पर राजनीति करने को कहा
फॉर्म 6 के विवाद से लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और बिहार SIR तक, बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच सवाल खड़े कर रहे हैं, लेकिन अदालत की टिप्पणियों और आयोग के आधिकारिक बयानों को अपनी सुविधा के अनुसार पेश किया जा रहा है।
संबित पात्रा ने कहा कि यदि किसी प्रक्रिया या दस्तावेज को लेकर विपक्ष के पास ठोस आपत्ति है तो उसे संबंधित कानूनी और संवैधानिक मंच पर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत में किसी मामले की जांच किए जाने की बात और किसी प्रक्रिया को अवैध घोषित किए जाने के बीच स्पष्ट अंतर है। बीजेपी के मुताबिक, इसी अंतर को नजरअंदाज करके कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव और तेज होता नजर आ रहा है। कांग्रेस जहां चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी इन आरोपों को विपक्ष की राजनीतिक रणनीति बता रही है। फॉर्म 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद इस विवाद के कई पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।




