भाखड़ा में पानी की भरमार, BBMB ने पंजाब-हरियाणा को बढ़ाई जल आपूर्ति लेने की सलाह

भाखड़ा में पानी की भरमार, BBMB ने पंजाब-हरियाणा को बढ़ाई जल आपूर्ति लेने की सलाह

पंजाब, हरियाणा और अन्य साझेदार राज्यों के लिए सिंचाई के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। धान की रोपाई के महत्वपूर्ण दौर के बीच भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने राज्यों को सलाह दी है कि वे भाखड़ा जलाशय में उपलब्ध पानी का अधिक प्रभावी उपयोग करें और अपनी सिंचाई आवश्यकताओं के अनुसार अधिक मात्रा में जल उठाएं। यह सुझाव उस समय आया है जब जलाशय में पानी का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है और आने वाले हफ्तों में मानसून तथा बर्फ पिघलने से जल उपलब्धता और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

चंडीगढ़ में आयोजित बीबीएमबी की तकनीकी समिति की बैठक में जल स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान अधिकारियों ने वर्तमान जल भंडारण, आने वाले दिनों में संभावित जल प्रवाह और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।

सामान्य से बेहतर स्थिति में भाखड़ा जलाशय

बीबीएमबी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 9 जून को भाखड़ा जलाशय का जलस्तर 1,578.07 फीट दर्ज किया गया। यह स्तर पिछले वर्ष इसी तारीख को दर्ज किए गए 1,556.60 फीट के मुकाबले 21.47 फीट अधिक है। इतना ही नहीं, यह आंकड़ा दीर्घकालिक औसत जलस्तर 1,543.72 फीट से भी काफी ऊपर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय में इस समय मौजूद पानी की मात्रा कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार जल उपलब्धता को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है।

जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान जलस्तर यह दर्शाता है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और यदि उनका सही ढंग से उपयोग किया जाए तो किसानों को धान सीजन के दौरान किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पूर्ण क्षमता के करीब पहुंच रहा जलाशय

बैठक में यह भी बताया गया कि भाखड़ा जलाशय अब अपनी अधिकतम क्षमता से लगभग 102 फीट नीचे है। इसका अर्थ है कि जलाशय में भंडारण क्षमता तो मौजूद है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में भारी वर्षा होती है या सतलुज नदी बेसिन में अचानक जल प्रवाह बढ़ता है तो अतिरिक्त पानी को समायोजित करने की क्षमता सीमित हो सकती है।

यही कारण है कि बीबीएमबी ने राज्यों को सलाह दी है कि वे अपने हिस्से का पानी समय पर उठाएं और सिंचाई कार्यों में उसका उपयोग करें। इससे एक ओर कृषि जरूरतें पूरी होंगी, वहीं दूसरी ओर जलाशय में अतिरिक्त स्थान भी उपलब्ध रहेगा, जिससे मानसून के दौरान आने वाले नए पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।

जीवित भंडारण में उल्लेखनीय वृद्धि

भाखड़ा जलाशय के जीवित भंडारण (लाइव स्टोरेज) की स्थिति भी इस समय संतोषजनक बताई जा रही है। वर्तमान में जलाशय में 1.75 अरब घन मीटर (बीसीएम) जीवित भंडारण उपलब्ध है। तुलना करें तो पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 1.27 बीसीएम था।

इस प्रकार एक वर्ष में जल भंडारण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बढ़ा हुआ भंडारण आगामी महीनों में कृषि और पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जल विशेषज्ञों का कहना है कि जीवित भंडारण का स्तर जितना अधिक होगा, उतना ही बेहतर तरीके से जल संसाधनों का नियोजन किया जा सकेगा। इससे सूखे जैसी परिस्थितियों में भी राहत मिलती है और सिंचाई व्यवस्था अधिक स्थिर बनी रहती है।

भराव क्षमता में भी आया बड़ा सुधार

बीबीएमबी के आंकड़ों के अनुसार, जलाशय की भराव क्षमता इस समय लगभग 31 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह पिछले वर्ष 9 जून को दर्ज 22 प्रतिशत के स्तर से काफी अधिक है।

इतना ही नहीं, यह दीर्घकालिक औसत 18 प्रतिशत से भी काफी ऊपर है। इस स्थिति को जल प्रबंधन के दृष्टिकोण से सकारात्मक माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि इस वर्ष जल संसाधनों की उपलब्धता बेहतर रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर भराव क्षमता कृषि उत्पादन को भी प्रभावित करती है। यदि किसानों को समय पर पर्याप्त सिंचाई जल मिलता है तो फसल उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।

धान रोपाई के बावजूद कम पानी उठा रहे राज्य

तकनीकी समिति की बैठक में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि धान की रोपाई का सीजन शुरू हो जाने के बावजूद साझेदार राज्यों द्वारा अपने हिस्से का पानी अभी तक अपेक्षित मात्रा में नहीं लिया गया है।

धान की खेती जल पर अत्यधिक निर्भर मानी जाती है और इस समय खेतों में रोपाई का काम तेजी से चल रहा है। इसके बावजूद जल उपयोग का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया है।

बीबीएमबी अधिकारियों का मानना है कि यदि राज्यों द्वारा समय रहते जल का उपयोग बढ़ाया जाता है तो कृषि गतिविधियों को अधिक सुचारू रूप से संचालित किया जा सकता है। साथ ही जलाशय में आने वाले अतिरिक्त पानी के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहेगा।

वर्तमान जल प्रवाह की स्थिति

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल भाखड़ा जलाशय में लगभग 13,748 क्यूसेक पानी की आमद दर्ज की जा रही है। हालांकि यह मात्रा पिछले वर्ष इसी दिन दर्ज 21,792 क्यूसेक के मुकाबले कम है।

इसके बावजूद जलाशय की समग्र स्थिति मजबूत बनी हुई है क्योंकि पहले से मौजूद जल भंडारण पर्याप्त स्तर पर है। दूसरी ओर जलाशय से वर्तमान में लगभग 20,763 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

यह आंकड़ा भी पिछले वर्ष के 30,528 क्यूसेक की तुलना में कम है। अधिकारियों का कहना है कि जल निकासी और जल आगमन के बीच संतुलन बनाए रखते हुए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जा रहे हैं।

हिमपात और मानसून से बढ़ सकती है जल उपलब्धता

बीबीएमबी के विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्रों में जमा बर्फ के पिघलने और मानसून की सक्रियता बढ़ने से जलाशय में अतिरिक्त पानी पहुंच सकता है।

विशेष रूप से सतलुज बेसिन में मानसूनी बारिश का सीधा प्रभाव भाखड़ा जलाशय पर पड़ता है। यदि वर्षा सामान्य या उससे अधिक होती है तो जल स्तर में और वृद्धि देखी जा सकती है।

इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जलाशय प्रबंधन से जुड़े अधिकारी अभी से रणनीति तैयार कर रहे हैं ताकि अतिरिक्त पानी का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके और किसी प्रकार की आपात स्थिति से बचा जा सके।

किसानों के लिए राहत के संकेत

पंजाब और हरियाणा देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। ऐसे में भाखड़ा जलाशय की बेहतर स्थिति किसानों के लिए राहत का विषय मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त जल उपलब्धता से धान की रोपाई और शुरुआती वृद्धि चरण में सिंचाई संबंधी समस्याएं कम होंगी। इससे किसानों को फसल प्रबंधन में सहायता मिलेगी और उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसके अलावा जल संसाधनों की बेहतर उपलब्धता से भूमिगत जल पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है, जो लंबे समय से क्षेत्र के लिए एक बड़ी चिंता रही है।

संतुलित जल प्रबंधन पर जोर

तकनीकी समिति की बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आगामी मानसून के लिए जलाशय में पर्याप्त भंडारण क्षमता बनाए रखना भी आवश्यक है।

बीबीएमबी का मानना है कि जल संसाधनों का संतुलित और वैज्ञानिक प्रबंधन ही कृषि, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन जैसी विभिन्न आवश्यकताओं को एक साथ पूरा करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए बोर्ड ने राज्यों को उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग करने, कृषि जरूरतों को प्राथमिकता देने और मानसून से पहले जलाशय प्रबंधन को संतुलित बनाए रखने की सलाह दी है। यदि यह रणनीति सफल रहती है तो आने वाले महीनों में पंजाब, हरियाणा और अन्य साझेदार राज्यों को जल उपलब्धता के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।