भारत में जल्द शुरू हो सकता है पॉलीमर नोटों का दौर, ₹10 और ₹20 से होगी नई करेंसी की टेस्टिंग

भारत में जल्द शुरू हो सकता है पॉलीमर नोटों का दौर, ₹10 और ₹20 से होगी नई करेंसी की टेस्टिंग

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में भारतीय बाजार में कागज की जगह पॉलीमर (विशेष प्लास्टिक) से बने नोट देखने को मिल सकते हैं। शुरुआत छोटे मूल्यवर्ग के नोटों से किए जाने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI पहले चरण में ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो अगले कुछ वर्षों में इन नोटों का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

हालांकि, केंद्रीय बैंक की ओर से अभी तक इस योजना को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नोट निर्माण से जुड़े कदमों ने इस दिशा में हलचल तेज कर दी है।

ग्लोबल टेंडर से तेज हुई तैयारी

पॉलीमर नोटों की दिशा में सबसे बड़ा संकेत तब मिला, जब रिजर्व बैंक की नोट प्रिंटिंग इकाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI)’ जारी किया। इस दस्तावेज के जरिए दुनिया भर की कंपनियों से विशेष पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट बनाने और सप्लाई करने के लिए आवेदन मांगे गए हैं।

इसी पॉलीमर शीट पर नए नोटों की छपाई की जाएगी। इस टेंडर में केवल उन कंपनियों को आमंत्रित किया गया है जो आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस पॉलीमर सामग्री उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। जानकारी के अनुसार, इच्छुक कंपनियों के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त निर्धारित की गई है।

छोटे नोटों से होगी शुरुआत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई शुरुआत में ₹10 और ₹20 मूल्य के नोटों पर प्रयोग करेगा। कम मूल्य वाले नोट सबसे अधिक उपयोग में आते हैं और तेजी से खराब भी हो जाते हैं। इसलिए इन नोटों पर पॉलीमर तकनीक का परीक्षण करना व्यावहारिक माना जा रहा है।

पायलट प्रोजेक्ट के दौरान यह देखा जाएगा कि ये नोट भारतीय मौसम, अधिक उपयोग और अलग-अलग परिस्थितियों में कितने प्रभावी साबित होते हैं। यदि परीक्षण के नतीजे संतोषजनक रहे, तो भविष्य में बड़े मूल्यवर्ग के नोटों पर भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2027 से बड़े स्तर पर लागू होने की संभावना

सूत्रों के अनुसार, यदि शुरुआती ट्रायल सफल रहता है तो वर्ष 2027 के आसपास पॉलीमर नोटों का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जा सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया चरणबद्ध होगी और एक साथ पूरे देश में बदलाव नहीं किया जाएगा।

आरबीआई का उद्देश्य मुद्रा व्यवस्था में किसी तरह की असुविधा पैदा किए बिना नई तकनीक को धीरे-धीरे लागू करना है।

पुराने कागजी नोट तुरंत बंद नहीं होंगे

पॉलीमर नोट आने का अर्थ यह नहीं होगा कि वर्तमान में चल रहे कागजी नोट अचानक अमान्य हो जाएंगे। आरबीआई की योजना दोनों प्रकार की करेंसी को एक साथ चलाने की है।

यानी जब तक पॉलीमर नोट पूरी तरह बाजार में स्थापित नहीं हो जाते, तब तक मौजूदा पेपर नोट भी वैध रहेंगे और सामान्य लेन-देन में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

इस तरह आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और बदलाव धीरे-धीरे लागू होगा।

आखिर क्या होते हैं पॉलीमर बैंकनोट?

पॉलीमर बैंकनोट ऐसे नोट होते हैं जिन्हें सामान्य कागज पर नहीं बल्कि विशेष प्लास्टिक आधारित पॉलीमर सबस्ट्रेट पर तैयार किया जाता है। यह सामग्री काफी मजबूत और टिकाऊ होती है।

ऐसे नोट देखने और पकड़ने में सामान्य नोटों जैसे ही लगते हैं, लेकिन इनकी मजबूती कई गुना अधिक होती है। पानी में भीगने, नमी, धूल या गंदगी का इन पर सामान्य कागजी नोटों की तुलना में बहुत कम असर पड़ता है।

इसी वजह से इनकी उम्र भी काफी लंबी होती है और इन्हें बार-बार बदलने की जरूरत कम पड़ती है।

पॉलीमर नोटों के प्रमुख फायदे

विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोट कई मामलों में पारंपरिक कागजी नोटों से बेहतर साबित हो सकते हैं।

1. अधिक टिकाऊ
ये नोट जल्दी फटते नहीं हैं और लंबे समय तक उपयोग में बने रहते हैं।

2. पानी से सुरक्षित
बारिश या पानी में भीगने के बाद भी इनकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती।

3. गंदगी कम पकड़ते हैं
इनकी सतह ऐसी होती है जिस पर धूल और गंदगी का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।

4. बेहतर सुरक्षा फीचर्स
इनमें पारदर्शी विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग, विशेष होलोग्राम और अन्य आधुनिक सुरक्षा तकनीकों को आसानी से जोड़ा जा सकता है।

5. नकली नोटों पर रोक
जटिल सुरक्षा फीचर्स के कारण इनकी हूबहू नकल तैयार करना बेहद कठिन माना जाता है।

नकली करेंसी पर लग सकती है रोक

भारत में समय-समय पर नकली नोटों की समस्या सामने आती रही है। पॉलीमर नोटों में ऐसे कई आधुनिक सुरक्षा फीचर्स लगाए जा सकते हैं जिन्हें कॉपी करना बेहद मुश्किल होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पॉलीमर नोट बड़े स्तर पर लागू होते हैं तो जाली नोटों के मामलों में कमी आ सकती है। इससे बैंकिंग व्यवस्था और मुद्रा प्रणाली की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

दुनिया के कई देशों में पहले से उपयोग

भारत इस दिशा में पहला देश नहीं होगा। दुनिया के कई देशों ने वर्षों पहले पॉलीमर बैंकनोट अपनाए हैं।

ऑस्ट्रेलिया सबसे पहले पॉलीमर नोटों का उपयोग करने वाले देशों में शामिल है। इसके अलावा कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों में भी प्लास्टिक आधारित करेंसी सफलतापूर्वक चल रही है।

इन देशों में पॉलीमर नोटों ने लंबे समय तक टिकाऊ रहने और नकली नोटों पर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पहले भी सामने आ चुका था प्रस्ताव

आरबीआई पहले भी कई बार संकेत दे चुका है कि भविष्य में नोटों की गुणवत्ता बढ़ाने और उनकी लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर बैंकनोट अपनाने पर विचार किया जा सकता है।

अब ग्लोबल टेंडर जारी होने के बाद माना जा रहा है कि यह योजना धीरे-धीरे अमल की ओर बढ़ रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों पर निर्भर करेगा।

एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) क्या होता है?

EOI यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआती प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

इसके माध्यम से संबंधित संस्था दुनियाभर की योग्य कंपनियों से उनकी तकनीकी क्षमता, अनुभव और प्रस्ताव आमंत्रित करती है। इसके बाद प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन किया जाता है और उपयुक्त कंपनियों का चयन आगे की प्रक्रिया के लिए किया जाता है।

आरबीआई ने भी पॉलीमर सबस्ट्रेट तैयार करने वाली वैश्विक कंपनियों को इसी प्रक्रिया के तहत आमंत्रित किया है।

भारतीय करेंसी में नई तकनीक की ओर कदम

भारतीय मुद्रा प्रणाली लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बावजूद नकदी का उपयोग अभी भी बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले, सुरक्षित और टिकाऊ नोट तैयार करना केंद्रीय बैंक की प्राथमिकता माना जा रहा है।

यदि प्रस्तावित पायलट सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में भारतीय नागरिकों को पॉलीमर से बने नए नोट देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल पूरा देश आरबीआई के आधिकारिक फैसले और इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अगले चरण का इंतजार कर रहा है।

(Photo : AI Generated)