भारत-EU ट्रेड डील पर तेज हुई हलचल, दिसंबर में समझौते पर लग सकती है मुहर; मोदी के ब्रुसेल्स दौरे पर नजर

भारत-EU ट्रेड डील पर तेज हुई हलचल, दिसंबर में समझौते पर लग सकती है मुहर; मोदी के ब्रुसेल्स दौरे पर नजर

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। दोनों पक्षों की कोशिश है कि दिसंबर 2026 में इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए जाएं। इसके लिए यूरोपीय आयोग ने मंजूरी की प्रक्रिया को सामान्य समयसीमा से कम अवधि में पूरा करने का रास्ता सुझाया है। माना जा रहा है कि यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित ब्रुसेल्स यात्रा के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच भी व्यापार समझौते को लेकर संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। ऐसे में यूरोपीय संघ के साथ भारत की डील को लेकर बढ़ती सक्रियता को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच कारोबार, निवेश और बाजार तक पहुंच के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय संघ की परिषद से 27 जनवरी 2026 को घोषित भारत-EU FTA को तेजी से मंजूरी देने का अनुरोध किया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य समझौते को लागू करने की दिशा में अनावश्यक देरी से बचना है। हालांकि, अभी तक हस्ताक्षर की तारीख को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

दिसंबर में समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी

भारत और यूरोपीय संघ के अधिकारी दिसंबर के मध्य में समझौते पर हस्ताक्षर करने की संभावना पर काम कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 17 या 18 दिसंबर की तारीख पर विचार किया जा रहा है। यह समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित ब्रुसेल्स यात्रा के आसपास पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री अमेरिका के मियामी में होने वाली G20 बैठक से लौटते समय यूरोप का दौरा कर सकते हैं।

हालांकि, इस कार्यक्रम को अंतिम रूप देना कई प्रक्रियागत और कूटनीतिक पहलुओं पर निर्भर करेगा। यूरोपीय संघ की परिषद की मंजूरी मिलने के बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर करने का रास्ता साफ होगा। परिषद में यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। इसलिए प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए सदस्य देशों के बीच आवश्यक सहमति हासिल करना महत्वपूर्ण होगा।

अधिकारियों के स्तर पर तैयारियां जारी हैं, लेकिन फिलहाल प्रस्तावित तारीखों को संभावित कार्यक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। संबंधित पक्षों की ओर से औपचारिक पुष्टि होने तक इसमें बदलाव की गुंजाइश बनी रहेगी।

कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने का नया तरीका

यूरोपीय आयोग इस समझौते को जल्द मंजूरी दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाने का विकल्प तलाश रहा है। इस सिलसिले में आयोग ने सुझाव दिया है कि समझौते से जुड़े कानूनी दस्तावेजों की प्रक्रिया मूल अंग्रेजी संस्करण के आधार पर आगे बढ़ाई जाए। इसका उद्देश्य यूरोपीय संघ की सभी आधिकारिक भाषाओं में अनुवाद पूरा होने तक इंतजार करने से बचना है।

यूरोपीय संघ में कुल 24 आधिकारिक भाषाएं हैं। यदि प्रत्येक भाषा में दस्तावेजों का अनुवाद पूरा होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है, तो समझौते को मंजूरी मिलने में एक साल से भी अधिक समय लग सकता है। ऐसे में आयोग चाहता है कि उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करके समय बचाया जाए।

इस प्रस्ताव को यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त मारोस सेफकोविच की ओर से तैयार की गई तेज प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर बदलते राजनीतिक और आर्थिक हालात को भी एक कारण माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता, देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने की जरूरत के बीच यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है।

हालांकि, प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव अपने आप में अंतिम मंजूरी नहीं है। समझौते को आगे बढ़ाने के लिए परिषद और संबंधित संस्थाओं की आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।

भारत की ओर से भी बढ़ाई जा रही सक्रियता

भारत और यूरोपीय संघ के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दोनों तरफ के अधिकारी संपर्क बनाए हुए हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के इस सप्ताह ब्रुसेल्स जाने की संभावना जताई गई है। उनके दौरे का उद्देश्य समझौते से जुड़ी प्रक्रियागत समस्याओं और अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा करना बताया जा रहा है।

यह दौरा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की यूरोप यात्रा के बाद प्रस्तावित है। गोयल 22 से 27 अक्टूबर के बीच जर्मनी और नीदरलैंड के दौरे पर हैं। इस दौरान व्यापार और निवेश से संबंधित मुद्दों पर बातचीत की जा रही है।

गोयल ने सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, यह समझौता दोनों पक्षों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने और व्यापार तथा निवेश के नए रास्ते खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जर्मनी में गोयल ने आर्थिक मामलों और ऊर्जा की संघीय मंत्री कैथरीना रीचे तथा जर्मन फेडरल चांसलरी में आर्थिक और वित्तीय नीति सलाहकार लेविन होले से मुलाकात की। इन बैठकों में आर्थिक सहयोग और व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

इस बीच, यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति का एक प्रतिनिधिमंडल 26 से 28 अक्टूबर तक नई दिल्ली के दौरे पर आने वाला है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष और यूरोपीय संसद के सदस्य डेविड मैकएलिस्टर करेंगे। यूरोपीय संसद के मौजूदा कार्यकाल में भारत की यह समिति की पहली आधिकारिक यात्रा बताई जा रही है। इस दौरे से भारत और यूरोप के बीच राजनीतिक तथा कूटनीतिक संवाद को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

जनवरी में पूरी हुई थी बातचीत

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत 27 जनवरी 2026 को पूरी होने की घोषणा की गई थी। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के सामने समझौते को कानूनी रूप देने, संबंधित संस्थाओं से मंजूरी प्राप्त करने और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती रही है।

यूरोपीय संसद के 20 सितंबर को जारी एक शोध दस्तावेज में इस समझौते को दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा कदम बताया गया। इसमें समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ यानी बेहद व्यापक व्यापारिक समझौते के रूप में भी संदर्भित किया गया है।

इस डील का महत्व केवल भारत और यूरोपीय संघ के बीच आयात-निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से को जोड़ने वाला एक व्यापक व्यापारिक क्षेत्र तैयार हो सकता है। दस्तावेज के अनुसार, दोनों पक्ष मिलकर वैश्विक आबादी के लगभग एक-चौथाई हिस्से और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के करीब 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस बैठक में वर्ष 2026 के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की इच्छा जताई गई थी। साथ ही निवेश समझौते से जुड़ा काम तेज करने और सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया था।

यूरोपीय संसद इससे पहले जुलाई 2022 में भारत के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इस प्रस्ताव में मुक्त व्यापार समझौते के साथ निवेश संरक्षण समझौते (IPA) और भौगोलिक संकेतक (GI) से जुड़े समझौतों पर बातचीत का समर्थन किया गया था।

यदि मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो FTA के 2027 की शुरुआत तक लागू होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इसका वास्तविक समय कानूनी समीक्षा, मंजूरी और दोनों पक्षों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच कितना बड़ा है व्यापार?

यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत यूरोपीय संघ का वस्तुओं के व्यापार में नौवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। सेवाओं के क्षेत्र में भारत का स्थान छठा है। दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच पहले से ही बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते से इसमें और विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं।

वर्ष 2025 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 118 अरब यूरो रहा। भारत यूरोप को मशीनरी और उपकरण, रसायन, कपड़ा, धातु तथा पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, यूरोपीय संघ से भारत आने वाले प्रमुख उत्पादों में मशीनरी, औद्योगिक उपकरण, परिवहन से जुड़े सामान और रासायनिक उत्पाद शामिल हैं। यूरोपीय कंपनियां भारतीय बाजार में औद्योगिक तकनीक, उत्पादन उपकरण और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों की आपूर्ति करती हैं।

सेवाओं के व्यापार में भी दोनों पक्षों के संबंध मजबूत हैं। वर्ष 2025 में सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 67 अरब यूरो दर्ज किया गया। इसमें यूरोपीय संघ का भारत को निर्यात 29.2 अरब यूरो था, जबकि भारत से यूरोपीय संघ को सेवाओं का आयात 37.8 अरब यूरो रहा।

निवेश के मोर्चे पर भी दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच महत्वपूर्ण संबंध हैं। वर्ष 2024 में भारत में यूरोपीय संघ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का कुल स्टॉक 132.8 अरब यूरो था। इसी अवधि में यूरोपीय संघ में भारत के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का स्टॉक 13.7 अरब यूरो दर्ज किया गया।

मुक्त व्यापार समझौता लागू होने पर इन क्षेत्रों में निवेश और व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि समझौते में शुल्क, बाजार तक पहुंच, सेवाओं और अन्य व्यापारिक शर्तों को किस तरह निर्धारित किया जाता है।

2007 में शुरू हुई थी पहल, फिर क्यों रुकी बातचीत?

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की कोशिश नई नहीं है। वर्ष 2007 में यूरोपीय संघ की परिषद ने यूरोपीय आयोग को भारत के साथ FTA पर बातचीत शुरू करने की अनुमति दी थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की वार्ता हुई।

हालांकि, 2013 तक बातचीत के पहले चरण के बाद प्रक्रिया रुक गई। समझौते के दायरे, बाजार खोलने की सीमा और महत्वाकांक्षा के स्तर को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए थे। इन मुद्दों के कारण उस समय व्यापक सहमति नहीं बन पाई।

बाद के वर्षों में वैश्विक व्यापार की परिस्थितियां बदलीं और भारत तथा यूरोपीय संघ ने बातचीत को दोबारा आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया। जनवरी 2026 में वार्ता पूरी होने की घोषणा इस लंबी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रही।

अब सबसे बड़ी चुनौती समझौते को अंतिम मंजूरी दिलाने और निर्धारित समय में हस्ताक्षर करने की है। यूरोपीय आयोग की फास्ट-ट्रैक पहल, भारतीय अधिकारियों की यूरोप यात्रा और दोनों पक्षों के बीच जारी संवाद से संकेत मिलता है कि दिसंबर की समयसीमा हासिल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

यदि समझौता तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता है, तो भारत और यूरोपीय संघ के आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिल सकती है। फिलहाल निगाहें यूरोपीय संघ की परिषद की मंजूरी, कानूनी प्रक्रिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित ब्रुसेल्स यात्रा पर टिकी हैं। इन्हीं घटनाक्रमों से स्पष्ट होगा कि बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर हो पाते हैं या इसके लिए आगे और समय लगेगा।