मानसून में जूते बने संक्रमण की वजह तो बढ़ सकती है पैरों की परेशानी, जानिए नमी से बचाने और बदबू दूर करने के आसान तरीके

मानसून में जूते बने संक्रमण की वजह तो बढ़ सकती है पैरों की परेशानी, जानिए नमी से बचाने और बदबू दूर करने के आसान तरीके

बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान नमी बढ़ने के कारण पैरों और फुटवियर से जुड़ी कई परेशानियां भी सामने आने लगती हैं। बारिश में बाहर निकलने पर जूते और मोजे भीगना आम बात है। समस्या तब बढ़ती है, जब इन्हें अच्छी तरह सुखाए बिना दोबारा पहन लिया जाए। लगातार नमी वाले जूतों में सूक्ष्मजीवों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इससे जूतों में बदबू आने के साथ पैरों में खुजली, लाल चकत्ते और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

मानसून के दौरान धूप कम निकलने और वातावरण में नमी अधिक होने से जूतों को पूरी तरह सुखाना भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए सिर्फ जूतों को बाहर निकालकर रखने के बजाय उनकी नियमित सफाई, हवा लगाना और सही तरीके से सुखाना जरूरी है। साथ ही पैरों की सफाई और सूखे मोजों का इस्तेमाल भी संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है।

गीले जूते पहनना क्यों हो सकता है परेशानी का कारण?

बारिश में जूते भीगने के बाद उनके अंदर लंबे समय तक नमी बनी रह सकती है। खासकर बंद और टाइट जूतों में हवा का आवागमन कम होता है। पसीना, मृत त्वचा और नमी मिलकर ऐसा वातावरण बना सकते हैं, जिसमें बैक्टीरिया और फंगस आसानी से बढ़ सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति लगातार गीले जूते या मोजे पहनता है तो पैरों की त्वचा लंबे समय तक नम रहती है। इससे खुजली, जलन, लालिमा और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। त्वचा पर पहले से कट या छोटा घाव होने पर बैक्टीरियल संक्रमण की संभावना भी बढ़ सकती है।

जूतों से बदबू आने की असली वजह क्या है?

मानसून में जूतों से आने वाली दुर्गंध का सबसे बड़ा कारण उनमें मौजूद नमी और पसीना होता है। बारिश में जूते गीले होने के बाद यदि उन्हें ठीक से सुखाया नहीं जाए तो अंदर नमी फंसी रह जाती है।

पैरों से निकलने वाला पसीना और त्वचा की मृत कोशिकाएं जूतों के अंदर मौजूद सूक्ष्मजीवों के संपर्क में आती हैं। इनके कारण दुर्गंध पैदा करने वाले पदार्थ बन सकते हैं। यही वजह है कि कई बार जूते बाहर से सूखे दिखाई देते हैं, लेकिन उनके अंदर से लगातार बदबू आती रहती है।

इस समस्या को सिर्फ परफ्यूम या शू स्प्रे से ढकने के बजाय जूतों को साफ और पूरी तरह सूखा रखना ज्यादा जरूरी है।

किन जूतों में नमी और फंगस का खतरा ज्यादा?

ऐसे फुटवियर जिनमें हवा आसानी से अंदर-बाहर नहीं जा पाती, उनमें नमी लंबे समय तक रह सकती है। टाइट फिटिंग वाले जूते इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।

कैनवास, लेदर और कुछ ऐसे बंद जूते जो लंबे समय तक नमी रोककर रखते हैं, बारिश के मौसम में अतिरिक्त देखभाल मांगते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इन सभी जूतों से फंगल इंफेक्शन होना तय है। सही सफाई, सुखाने और स्टोरेज से जोखिम कम किया जा सकता है।

मानसून में ऐसे फुटवियर अधिक सुविधाजनक हो सकते हैं जो जल्दी सूख जाएं और पैरों को पर्याप्त हवा मिलने दें।

जूते भीग जाएं तो सबसे पहले क्या करें?

बारिश में जूते भीगने के बाद उन्हें तुरंत इस्तेमाल करने के बजाय पहले अच्छी तरह सुखाना चाहिए। इसके लिए इन तरीकों को अपनाया जा सकता है—

  • इनसोल और लेस निकालें: जूते के अंदर मौजूद इनसोल और लेस को अलग करने से हवा आसानी से पहुंचती है और जूते जल्दी सूखते हैं।
  • अंदर पेपर रखें: अखबार या टिश्यू पेपर जूतों के अंदर की अतिरिक्त नमी सोखने में मदद कर सकते हैं। ज्यादा भीगने पर इन्हें कुछ घंटों के अंतराल पर बदलते रहें।
  • हवादार जगह चुनें: जूतों को बंद अलमारी में रखने के बजाय ऐसी जगह रखें जहां लगातार हवा आती-जाती हो।
  • पंखे की हवा दें: जूतों को पंखे की सामान्य हवा में रखने से नमी कम करने में मदद मिल सकती है।
  • जूते का मुंह खुला रखें: इन्हें इस तरह रखें कि अंदर तक हवा पहुंच सके।
  • बहुत तेज गर्मी से बचें: हीटर, ब्लोअर या बहुत तेज गर्म हवा जूतों के आकार और गोंद को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • लेदर फुटवियर का खास ध्यान रखें: इन्हें लंबे समय तक तेज धूप में रखने से सामग्री सूखकर खराब हो सकती है।

जूतों की बदबू कम करने के घरेलू उपाय

अगर जूते सूखने के बाद भी उनमें दुर्गंध बनी हुई है तो कुछ आसान उपाय आजमाए जा सकते हैं। जूतों के अंदर थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा डालकर कुछ घंटे के लिए छोड़ना बदबू को कम करने में मदद कर सकता है। बाद में जूतों को अच्छी तरह झाड़कर साफ कर लें।

सूखे टी-बैग भी कुछ समय के लिए जूतों के अंदर रखे जा सकते हैं। ये नमी और गंध को कुछ हद तक सोख सकते हैं। इसके अलावा बाजार में उपलब्ध एंटीफंगल फुट पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

पानी और सफेद सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर हल्का स्प्रे करने का तरीका भी कुछ लोग अपनाते हैं, लेकिन जूते के मैटेरियल पर इसका इस्तेमाल करने से पहले किसी छोटे हिस्से पर जांच करना बेहतर है। लेदर जैसे संवेदनशील मैटेरियल पर किसी भी घरेलू मिश्रण का इस्तेमाल सावधानी से करें।

पैरों की सफाई को न करें नजरअंदाज

सिर्फ जूतों को साफ रखना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में पैरों की स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बारिश से पैर गीले होने के बाद उन्हें साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं। खासकर उंगलियों के बीच की जगह को सूखा रखना जरूरी है, क्योंकि वहां नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है।

गीले मोजे तुरंत बदलें और रोज साफ मोजों का इस्तेमाल करें। कॉटन या ऐसे मोजे चुने जा सकते हैं जो पसीना सोखने या जल्दी सूखने में मदद करें। नाखूनों को छोटा और साफ रखें। जूते और मोजे किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करने से भी बचना चाहिए।

यदि पैरों में पहले से फंगल संक्रमण है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीफंगल क्रीम या अन्य उपचार का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। बिना जरूरत लंबे समय तक किसी दवा या क्रीम का इस्तेमाल करने के बजाय समस्या बनी रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

क्या नमक या नीम वाले पानी में पैर रखना जरूरी है?

कई घरों में मानसून के दौरान पैरों को गुनगुने पानी में नमक या नीम डालकर रखने की परंपरा है। इससे पैरों को साफ रखने का अनुभव मिल सकता है, लेकिन इसे फंगल इंफेक्शन का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

अगर पैरों में लगातार खुजली, त्वचा का छिलना, लाल चकत्ते, जलन या संक्रमण के अन्य लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

अलग-अलग जूतों की सफाई का तरीका भी अलग

हर फुटवियर को पानी में भिगोकर साफ करना सही नहीं होता। जूते के मैटेरियल के अनुसार सफाई करनी चाहिए।

लेदर के जूते:
इन्हें ज्यादा पानी में भिगोने से बचें। गीले या हल्के नम कपड़े से सतह साफ करें और फिर सामान्य हवा में सुखाएं। सूखने के बाद उपयुक्त लेदर कंडीशनर या पॉलिश का इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्पोर्ट्स शूज:
पहले जूतों पर लगी मिट्टी और गंदगी को ब्रश से हटाएं। इसके बाद हल्के साबुन और पानी से साफ किया जा सकता है। इनसोल को निकालकर अलग सुखाना बेहतर रहता है।

कैनवास शूज:
कैनवास जूतों को हल्के साबुन-पानी से साफ किया जा सकता है। दाग हटाने के लिए सॉफ्ट ब्रश उपयोग करें। इन्हें बहुत तेज धूप में लंबे समय तक रखने से रंग और कपड़े पर असर पड़ सकता है।

क्या जूते वॉशिंग मशीन में धो सकते हैं?

इसका जवाब जूते के मैटेरियल और निर्माता के निर्देशों पर निर्भर करता है। कुछ कैनवास या स्पोर्ट्स शूज मशीन के जेंटल या नाजुक वॉश मोड में धोने योग्य हो सकते हैं। लेकिन हर जूते को मशीन में डालना सही नहीं है।

लेदर, कुछ सिंथेटिक फुटवियर या ऐसे जूते जिनमें चिपकने वाले हिस्से ज्यादा हों, उन्हें मशीन में धोने से उनका आकार, सतह या गोंद खराब हो सकता है। इसलिए मशीन में धोने से पहले जूते पर दिए गए केयर इंस्ट्रक्शन जरूर देखें।

मानसून में कौन-से फुटवियर ज्यादा सुविधाजनक?

बारिश के मौसम में ऐसे फुटवियर बेहतर रहते हैं जो जल्दी सूख सकें और पानी के संपर्क में आने के बाद ज्यादा समय तक नमी न रोकें। जरूरत के अनुसार रबर या PVC फुटवियर, अच्छी एयर-फ्लो वाले स्पोर्ट्स शूज और वॉटर-रेसिस्टेंट जूते इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

इसके साथ यह भी ध्यान रखें कि जूता पैरों पर बहुत टाइट न हो। बहुत ज्यादा बंद और टाइट फुटवियर में पसीना और नमी फंस सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पैरों में खुजली या लालिमा कुछ दिनों तक बनी रहे, त्वचा छिलने लगे, दर्द या सूजन हो, बदबू के साथ घाव या पस दिखाई दे या समस्या बार-बार लौट रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। खासकर पैरों पर कट या घाव होने की स्थिति में संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मानसून में फुटवियर के लिए याद रखें ये बातें

बारिश में जूते भीगना सामान्य है, लेकिन उन्हें गीला छोड़कर दोबारा पहनना परेशानी बढ़ा सकता है। जूते भीगने के बाद इनसोल और लेस निकालकर उन्हें हवादार जगह पर सुखाएं। जरूरत पड़ने पर पेपर बदलते रहें और तेज गर्मी से बचाएं। पैरों को साफ और सूखा रखें, गीले मोजे तुरंत बदलें और फुटवियर को नियमित रूप से साफ करें।

सबसे जरूरी बात यह है कि बदबू को सिर्फ स्प्रे से छिपाने के बजाय उसके कारण यानी नमी और गंदगी को दूर किया जाए। थोड़ी सी सावधानी से मानसून के दौरान जूतों की उम्र भी बढ़ाई जा सकती है और पैरों को फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण के जोखिम से भी बचाने में मदद मिल सकती है।