अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों और कुछ पूर्व अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समूह से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के दो अलग-अलग मामलों में अदालतों के सामने चार्जशीट और पूरक चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन में कथित गड़बड़ी, रकम के डायवर्जन और समूह से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के बीच धन के कथित हस्तांतरण को अपनी जांच के केंद्र में रखा है।
इन दोनों मामलों में जांच की दिशा अलग-अलग है। एक मामला रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उससे जुड़े पूर्व अधिकारियों पर कथित तौर पर करीब 187 करोड़ रुपये की हेराफेरी से संबंधित है। वहीं दूसरा और बड़ा मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड तथा उससे जुड़ी कंपनियों के वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है, जिसमें ED ने अपराध से हासिल रकम का अनुमान करीब 40,185 करोड़ रुपये लगाया है।
दो अदालतों में पहुंचा मामला
ED ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, समूह के पूर्व अधिकारी सतीश सेठ और अन्य आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की द्वारका स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से फरवरी में दर्ज की गई एफआईआर के बाद सामने आया।
दूसरी तरफ रिलायंस कम्युनिकेशंस से संबंधित केस में एजेंसी ने राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पूरक चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में ED पहले ही मार्च में मुख्य चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी। अब नए विवरण और जांच में सामने आए तथ्यों को शामिल करते हुए पूरक चार्जशीट अदालत के समक्ष रखी गई है।
जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों मामलों में वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की गई है। ED ने यह भी पता लगाने की कोशिश की है कि कंपनियों से निकली रकम किन संस्थाओं और बैंक खातों तक पहुंची तथा उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
187 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का पूरा मामला
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित मामले में जांच का मुख्य बिंदु चार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की टोल रोड परियोजनाएं हैं। ED के मुताबिक इन परियोजनाओं से संबंधित करीब 187 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी सामने आई है।
जिन परियोजनाओं का उल्लेख जांच में किया गया है, उनमें त्रिची-करूर, त्रिची-दिंडीगुल, सेलम-उलुंदरपेट और जयपुर-रींगस टोल रोड प्रोजेक्ट शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार इन परियोजनाओं से जुड़ी रकम को वास्तविक निर्माण कार्यों पर खर्च किए जाने के बजाय कथित तौर पर अलग-अलग संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
ED का आरोप है कि सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी उप-ठेकेदारी व्यवस्था तैयार की गई। इसके अलावा पिछली तारीख के दस्तावेजों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक इन माध्यमों से करीब 187 करोड़ रुपये को विभिन्न संस्थाओं के बीच ट्रांसफर किया गया।
एजेंसी का दावा है कि जिन कंपनियों या संस्थाओं तक पैसा पहुंचाया गया, उनका सड़क निर्माण के वास्तविक काम से सीधा संबंध नहीं था। इसी आधार पर ED ने इन लेन-देन को संदिग्ध मानते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ाई।
संपत्तियों और शेयरों पर भी कार्रवाई
इस मामले में जांच के दौरान ED ने कथित अपराध से जुड़ी संपत्तियों पर कार्रवाई भी की है। एजेंसी के मुताबिक करीब 187 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं। इसके साथ ही रिलायंस पावर के शेयर भी जब्त किए गए हैं।
ED की कार्रवाई का उद्देश्य कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम से बनाई या हासिल की गई संपत्तियों को जांच के दायरे में रखना है। एजेंसी ने अदालत के समक्ष अपनी जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े विवरण भी प्रस्तुत किए हैं।
रिलायंस कम्युनिकेशंस केस में 40,185 करोड़ रुपये का आंकड़ा
दूसरा मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस टेलीकॉम समेत कई कंपनियों से जुड़ा है। इस केस में ED ने वित्तीय लेनदेन के बड़े नेटवर्क की जांच की है। एजेंसी के मुताबिक नई क्रेडिट सुविधाओं और कर्ज की रकम के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल सामने आए।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ नई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल पुराने कर्ज और देनदारियों को चुकाने के लिए किया गया। इसके साथ ही रकम को अलग-अलग कंपनियों और संस्थाओं के माध्यम से घुमाए जाने की बात भी सामने आई है।
ED ने इस मामले में अपराध से हासिल रकम का अनुमान करीब 40,185 करोड़ रुपये लगाया है। यह आंकड़ा मामले की वित्तीय गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि यह एजेंसी द्वारा जांच में लगाया गया आरोप और अनुमान है, जिसका अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है।
किन लोगों के नाम चार्जशीट में हैं?
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में कंपनियों के अलावा समूह के कुछ पूर्व अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में सतीश सेठ, गौतम दोशी, अमिताभ झुनझुनवाला और अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।
ED के मुताबिक जांच में इन अधिकारियों की भूमिका और विभिन्न वित्तीय लेनदेन के बीच संबंधों की पड़ताल की गई। एजेंसी का आरोप है कि कर्ज से हासिल धन को समूह की अलग-अलग कंपनियों की ओर मोड़ा गया और बैंक खातों तथा संस्थाओं के माध्यम से उसका प्रवाह किया गया।
जांच में यह आरोप भी लगाया गया है कि रकम का एक हिस्सा विदेश में प्रमोटरों की निजी संपत्तियां खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया। ED अब इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है।
सतीश सेठ और गौतम दोशी की गिरफ्तारी
मामले में पूर्व अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की गई है। ED के अनुसार सतीश सेठ को जून में गिरफ्तार किया गया था और वह न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं गौतम दोशी को भी जून में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी एजेंसी की ओर से दी गई है।
सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों लंबे समय तक समूह से जुड़े रहे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार गौतम दोशी ने वर्ष 2020 में अनिल अंबानी समूह से अपना संबंध समाप्त कर लिया था, जबकि सतीश सेठ के समूह से अलग होने की जानकारी वर्ष 2025 में सामने आई।
ED की जांच में इन दोनों अधिकारियों की कथित भूमिका के साथ-साथ अन्य लोगों और संस्थाओं से जुड़े वित्तीय संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।
8,078 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में ED ने अब तक करीब 8,078 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच करने की जानकारी दी है। एजेंसी का कहना है कि ये कार्रवाई कथित अपराध से अर्जित रकम और उससे जुड़ी संपत्तियों की पहचान के आधार पर की गई है।
जांच एजेंसी ने अदालत से अटैच की गई संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति मांगी है। इसके लिए अदालत के सामने जांच से जुड़े दस्तावेज और आरोपों का आधार रखा गया है। आगे की कार्रवाई अदालत में होने वाली सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
कर्ज की रकम के डायवर्जन का आरोप
रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में ED की जांच का एक अहम हिस्सा कर्ज की रकम के कथित डायवर्जन से जुड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से हासिल धन का इस्तेमाल उस उद्देश्य से अलग तरीके से किया गया, जिसके लिए क्रेडिट सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं।
ED के मुताबिक रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग समूह कंपनियों, संस्थाओं और बैंक खातों के जरिए आगे भेजा गया। एजेंसी अब इस पूरी प्रक्रिया में शामिल संस्थाओं और लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ रकम विदेश तक पहुंची और उसका इस्तेमाल प्रमोटरों से जुड़ी निजी संपत्तियां खरीदने में किया गया। इन आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जारी है।
आगे भी जारी रहेगी जांच
ED ने संकेत दिया है कि दोनों मामलों में जांच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एजेंसी अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में मामले में और नाम सामने आ सकते हैं या अतिरिक्त कार्रवाई हो सकती है।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में आरोपों और जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूतों की न्यायिक समीक्षा होगी। किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।
फिलहाल दोनों मामलों में ED की कार्रवाई ने अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों के पुराने वित्तीय लेनदेन को एक बार फिर जांच के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मामले में करीब 187 करोड़ रुपये के कथित डायवर्जन की जांच हो रही है, वहीं रिलायंस कम्युनिकेशंस मामले में एजेंसी ने करीब 40,185 करोड़ रुपये की अपराध से हासिल रकम का अनुमान लगाया है। इसके अलावा करीब 8,078 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।




