हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक और धमकी भरी सामग्री साझा करने के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हमीरपुर जिले के सदर थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सोशल मीडिया गतिविधियों और संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुट गई है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई हमीरपुर शहर के वार्ड नंबर-6, शिव नगर निवासी एक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फेसबुक पर संचालित एक अकाउंट से मुख्यमंत्री के खिलाफ एक वीडियो साझा किया गया, जिसमें न केवल अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया, बल्कि कथित रूप से उन्हें धमकी भी दी गई।
शिकायत में कहा गया कि संबंधित वीडियो सार्वजनिक मंच पर प्रसारित किया गया था, जिससे बड़ी संख्या में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं तक उसकी पहुंच बनी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस प्रकार की सामग्री न केवल सार्वजनिक शालीनता के विरुद्ध है, बल्कि इससे सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो सकता है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।
जानकारी के अनुसार, यह मामला मंगलवार शाम करीब 4:30 बजे सदर थाना में दर्ज किया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने वीडियो, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों को एकत्रित करना शुरू कर दिया है। साइबर पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तकनीकी जांच भी की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि वीडियो किसने बनाया, किस डिवाइस से अपलोड किया गया और उसके प्रसार की स्थिति क्या रही।
सूत्रों के मुताबिक, मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित फेसबुक अकाउंट से कथित वीडियो हटा दिया गया। हालांकि, पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वीडियो को कितने लोगों ने देखा, साझा किया या उस पर प्रतिक्रिया दी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली किसी भी सामग्री का कानूनी दायित्व संबंधित व्यक्ति पर होता है। यदि कोई पोस्ट कानून का उल्लंघन करती है या किसी व्यक्ति के खिलाफ धमकी, घृणा या अशोभनीय भाषा का प्रयोग करती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 296, 351(2), 352 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत दर्ज शिकायत की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडीशनल एसपी) राजेश उपाध्याय ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच निष्पक्ष और कानून के अनुरूप की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसके उपयोग के दौरान कानूनी और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। किसी भी सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति या सामान्य नागरिक के खिलाफ धमकीपूर्ण, आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री साझा करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित व्यक्ति से पूछताछ, डिजिटल उपकरणों की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी अपनाई जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि मामले में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



