एचआरटीसी की नई रणनीति: समतल और बेहतर सड़कों पर ही चलेंगी नई इलेक्ट्रिक बसें, ऊना-हमीरपुर को मिला सबसे बड़ा बेड़ा

एचआरटीसी की नई रणनीति: समतल और बेहतर सड़कों पर ही चलेंगी नई इलेक्ट्रिक बसें, ऊना-हमीरपुर को मिला सबसे बड़ा बेड़ा

हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने नई रणनीति तैयार की है। राज्य सरकार और निगम का लक्ष्य आने वाले वर्षों में प्रदेश के बस बेड़े का आधुनिकीकरण करना है, ताकि यात्रियों को बेहतर यात्रा अनुभव मिलने के साथ-साथ प्रदूषण को भी कम किया जा सके। इसी योजना के तहत खरीदी जा रही नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

एचआरटीसी ने स्पष्ट किया है कि नई इलेक्ट्रिक बसों को फिलहाल उन मार्गों पर नहीं चलाया जाएगा, जहां सड़कें अत्यधिक खराब, संकरी, टूटी हुई या तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हैं। शुरुआती चरण में इन बसों को ऐसे रूटों पर प्राथमिकता दी जाएगी, जहां सड़कें अच्छी स्थिति में हैं और सुरक्षित संचालन संभव है। निगम का मानना है कि इससे बसों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी, बैटरी प्रदर्शन प्रभावित नहीं होगा और यात्रियों को भी अधिक आरामदायक तथा सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

यह निर्णय केवल परिचालन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की लंबी उम्र, रखरखाव लागत में कमी और ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखकर लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को सफल बनाने के लिए सड़क अवसंरचना और चार्जिंग नेटवर्क दोनों का मजबूत होना आवश्यक है।

सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने पर सरकार का फोकस

हिमाचल प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से परिवहन क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। इसका उद्देश्य केवल बसों को बदलना नहीं, बल्कि पूरे सार्वजनिक परिवहन तंत्र को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से डीजल पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और भविष्य में परिवहन संचालन की लागत भी नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली पर्यटन राज्य हिमाचल प्रदेश की पर्यावरणीय आवश्यकताओं के अनुरूप भी है।

खराब सड़कों पर फिलहाल नहीं चलेगी नई ई-बसें

एचआरटीसी अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में कुछ तकनीकी आवश्यकताओं पर अधिक निर्भर करता है। लगातार खराब सड़क, अत्यधिक झटके, गड्ढे और कठिन चढ़ाई वाले मार्गों पर संचालन से वाहन के विभिन्न पुर्जों के साथ-साथ बैटरी प्रणाली पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

इसी कारण निगम ने फिलहाल ऐसे रूटों से बचने का निर्णय लिया है जहां—

  • सड़कें अत्यधिक क्षतिग्रस्त हैं।
  • लगातार मरम्मत कार्य चल रहा है।
  • मार्ग अत्यधिक संकरा है।
  • संचालन के दौरान तकनीकी जोखिम अधिक रहता है।
  • बसों की सुरक्षा और नियमित सेवा प्रभावित हो सकती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में यदि संबंधित मार्गों की स्थिति बेहतर होती है तो इलेक्ट्रिक बसों को वहां भी चरणबद्ध तरीके से चलाने पर विचार किया जाएगा।

297 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया

एचआरटीसी अपने बेड़े को मजबूत बनाने के लिए कुल 297 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद कर रहा है। यह प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में अब तक की महत्वपूर्ण पहलों में से एक मानी जा रही है।

निगम के अनुसार—

  • कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों का ऑर्डर दिया गया है।
  • इनमें से लगभग 150 बसें निगम को प्राप्त हो चुकी हैं।
  • शेष बसों की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
  • बसों को अलग-अलग डिपो में भेजने की प्रक्रिया जारी है।

इन बसों के शामिल होने से प्रदेश में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ जाएगा।

तकनीकी परीक्षण के बाद ही शुरू होगा संचालन

एचआरटीसी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बस को सीधे यात्री सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा।

सभी नई बसों के लिए निम्न प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं—

  • प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI)
  • तकनीकी परीक्षण
  • सुरक्षा मानकों की जांच
  • बैटरी एवं चार्जिंग सिस्टम का परीक्षण
  • ब्रेक, सस्पेंशन और इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली की जांच
  • परिचालन परीक्षण

इन सभी प्रक्रियाओं में संतोषजनक परिणाम मिलने के बाद ही बसों को नियमित रूटों पर चलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री करेंगे नई बसों का शुभारंभ

एचआरटीसी प्रबंधन ने नई इलेक्ट्रिक बसों के औपचारिक शुभारंभ के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कार्यक्रम का अनुरोध किया है।

कार्यक्रम की अंतिम तिथि तय होने के बाद मुख्यमंत्री नई बसों को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न जिलों के लिए रवाना करेंगे।

निगम का मानना है कि यह प्रदेश में हरित परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

किन क्षेत्रों में चलेगी नई ई-बसें?

अब तक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन मुख्य रूप से—

  • शिमला
  • धर्मशाला
  • मनाली
  • मंडी

जैसे प्रमुख शहरों तक सीमित था।

नई योजना के तहत पहली बार मैदानी क्षेत्रों और बेहतर सड़क नेटवर्क वाले जिलों में भी इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार किया जा रहा है।

निगम का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक यात्रियों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जा सके।

ऊना और हमीरपुर को सबसे अधिक बसें

एचआरटीसी द्वारा तैयार प्रारंभिक आवंटन योजना के अनुसार विभिन्न डिपो को बसों का वितरण उनकी आवश्यकता और संचालन क्षमता के आधार पर किया गया है।

प्रमुख आवंटन इस प्रकार है—

  • ऊना – 35 बसें
  • हमीरपुर – 35 बसें
  • बिलासपुर – 20 बसें
  • नालागढ़ – 15 बसें
  • नाहन – 15 बसें
  • देहरा – 10 बसें
  • पालमपुर – 10 बसें
  • धर्मशाला – 5 बसें
  • तारादेवी (शिमला) – 5 बसें

इसके अतिरिक्त शेष बसों को अन्य डिपो में आवश्यकता के अनुसार एक या दो बसों के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

ट्रायल के दौरान सामने आई चुनौतियां

नियमित संचालन से पहले एचआरटीसी ने विभिन्न जिलों के लगभग 36 रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का परीक्षण किया।

अधिकांश मार्गों पर बसों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा, लेकिन एक मार्ग पर संचालन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका।

निगम के अनुसार—

  • बस में कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं मिली।
  • संबंधित कंपनी ने सड़क की स्थिति को मुख्य कारण बताया।
  • खराब सड़क के कारण बस का संचालन प्रभावित हुआ।

इसी घटना के बाद निगम ने रूट चयन की नीति में बदलाव करने का निर्णय लिया।

विशेष समिति करेगी जांच

इस मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए एचआरटीसी ने विशेष जांच समिति गठित की है।

समिति में—

  • एचआरटीसी अधिकारी
  • तकनीकी विशेषज्ञ
  • लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर

को शामिल किया गया है।

समिति यह जांच करेगी कि समस्या वास्तव में सड़क की गुणवत्ता के कारण उत्पन्न हुई या इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी कारण था।

जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की संचालन नीति तय की जाएगी।

इलेक्ट्रिक बसों से क्या होंगे लाभ?

नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से यात्रियों और राज्य दोनों को कई लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुख्य लाभों में शामिल हैं—

  • वायु प्रदूषण में कमी।
  • कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
  • डीजल की खपत घटेगी।
  • ईंधन खर्च में बचत होगी।
  • संचालन अपेक्षाकृत शांत रहेगा।
  • यात्रियों को कम कंपन और अधिक आरामदायक यात्रा मिलेगी।
  • आधुनिक सुविधाओं वाली बसों से यात्रा अनुभव बेहतर होगा।
  • भविष्य में परिवहन प्रणाली अधिक टिकाऊ बनेगी।

सड़क अवसंरचना भी होगी महत्वपूर्ण

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलेक्ट्रिक बसें खरीदना पर्याप्त नहीं होगा। यदि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में भी इनका सफल संचालन करना है, तो सड़क अवसंरचना को समान गति से मजबूत बनाना होगा।

इसीलिए एचआरटीसी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे मार्गों की पहचान कर रहा है जहां भविष्य में सड़क सुधार के बाद इलेक्ट्रिक बसों का संचालन संभव हो सके।

यदि सड़क नेटवर्क बेहतर होता है तो आने वाले वर्षों में अधिक पहाड़ी क्षेत्रों तक भी ई-बस सेवा का विस्तार किया जा सकता है।

भविष्य की योजना

एचआरटीसी का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाना और राज्य में स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना है। निगम भविष्य में चार्जिंग अवसंरचना, तकनीकी प्रशिक्षण, ऊर्जा दक्ष संचालन और बेहतर रखरखाव प्रणाली पर भी विशेष ध्यान देने की योजना बना रहा है।

नई बसों के नियमित संचालन के बाद यात्रियों की प्रतिक्रिया, रूट प्रदर्शन, बैटरी दक्षता और परिचालन लागत का भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर आगे और इलेक्ट्रिक बसों को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शामिल करने की रणनीति तैयार की जाएगी।

राज्य सरकार और एचआरटीसी दोनों का मानना है कि आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का यह विस्तार हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल, तकनीक आधारित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।