हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए केवल तब सतर्क होना पर्याप्त नहीं है, जब किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या हृदय से जुड़ी कोई समस्या हो जाए। दिल की सेहत काफी हद तक हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली पर निर्भर करती है। हम दिनभर कितना चलते हैं, क्या खाते हैं, मांसपेशियों को कितना सक्रिय रखते हैं और तनाव से किस तरह निपटते हैं—इन सभी चीजों का लंबे समय में शरीर और हृदय पर असर पड़ सकता है।
आज की व्यस्त जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि कम होना, घंटों एक ही जगह बैठे रहना, अनियमित खान-पान और लगातार तनाव जैसी आदतें आम हो गई हैं। ऐसे में रोज के रूटीन में छोटे लेकिन लगातार किए जाने वाले बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
एक कार्डियोलॉजिस्ट ने सोशल मीडिया पर अपने दैनिक जीवन से जुड़ी कुछ आदतों के बारे में बताया है। करीब 25 वर्षों से कार्डियोलॉजी की प्रैक्टिस कर रहे इस विशेषज्ञ के मुताबिक, वह अपने दिल और पूरे शरीर की सेहत को बनाए रखने के लिए अपने रूटीन में चार प्रमुख चीजों को शामिल करते हैं। इनमें शरीर को एक्टिव रखना, खान-पान पर ध्यान देना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और तनाव को नियंत्रित करने वाली गतिविधियां शामिल हैं।
तनाव को नजरअंदाज नहीं करते, रिलैक्सेशन के लिए निकालते हैं समय
दिल की सेहत की चर्चा करते समय अक्सर खान-पान और एक्सरसाइज पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, लेकिन मानसिक तनाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लगातार तनाव में रहने से शरीर पर कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं। यही वजह है कि अपने दिन में ऐसी गतिविधियों के लिए भी समय निकालना जरूरी है, जो मानसिक रूप से शांत रहने में मदद करें।
इसके लिए म्यूजिक सुनना, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन जैसी गतिविधियों को रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है। इनका उद्देश्य केवल कुछ देर आराम करना नहीं, बल्कि दिनभर की व्यस्तता के बीच शरीर और दिमाग को रिलैक्स करने का समय देना है।
आज के समय में काम का दबाव, लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल, व्यक्तिगत जिम्मेदारियां और लगातार भागदौड़ तनाव को बढ़ा सकती है। ऐसे में हर व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार कुछ ऐसी गतिविधियां चुन सकता है, जिनसे उसे मानसिक शांति महसूस हो। महत्वपूर्ण बात यह है कि तनाव कम करने के लिए रोजाना कुछ समय निकाला जाए। इसे किसी कठिन प्रक्रिया की तरह लेने के बजाय दैनिक जीवन का सामान्य हिस्सा बनाया जा सकता है।
सिर्फ कार्डियो नहीं, मांसपेशियों को मजबूत रखने पर भी ध्यान
आमतौर पर हार्ट हेल्थ की बात होने पर लोग वॉकिंग, रनिंग या दूसरी कार्डियो एक्सरसाइज के बारे में सोचते हैं। लेकिन शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना भी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्डियोलॉजिस्ट ने अपने रूटीन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी जगह दी है। इसके लिए पर्सनल ट्रेनर की सहायता ली जाती है और नियमित रूप से मसल्स को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज की जाती है। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
लगभग 50 वर्ष की उम्र में मसल्स को मजबूत बनाए रखना उनके हार्ट-हेल्थ प्लान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। नियमित रेजिस्टेंस एक्सरसाइज शरीर की ताकत और कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद कर सकती है।
यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति जिम में घंटों बिताए। अपनी क्षमता के अनुसार हल्की स्ट्रेंथ एक्सरसाइज, बॉडी-वेट एक्सरसाइज या विशेषज्ञ की निगरानी में रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल किया जा सकता है।
रोजाना चलने-फिरने को बनाएं जीवन का हिस्सा
हार्ट हेल्थ के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहना जरूरी है। लेकिन इसके लिए हर दिन बहुत कठिन या लंबे वर्कआउट करना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में वॉकिंग को शामिल करना भी शरीर को एक्टिव रखने का आसान तरीका हो सकता है। कार्डियोलॉजिस्ट अपने डॉग को टहलाने के लिए नियमित रूप से वॉक करते हैं। उनका ध्यान इस बात पर रहता है कि दिन का ज्यादातर समय लगातार बैठे हुए न बीते।
आधुनिक जीवनशैली में ऑफिस का काम, कंप्यूटर, मोबाइल और घर पर आराम के दौरान लंबे समय तक बैठना आम हो गया है। अगर किसी व्यक्ति को कई घंटे बैठकर काम करना पड़ता है तो बीच-बीच में उठना और कुछ कदम चलना दैनिक गतिविधि बढ़ाने का सरल तरीका हो सकता है।
थोड़ी दूरी के लिए पैदल जाना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना या लंबे समय तक बैठने के बीच कुछ देर टहलना जैसी छोटी आदतें भी दिनभर की गतिविधि बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
प्लेट में क्या जा रहा है, इस पर रखें नजर
हार्ट हेल्थ को लेकर एक और अहम पहलू खान-पान है। डाइट का संबंध केवल वजन से नहीं, बल्कि शरीर की ओवरऑल मेटाबॉलिक हेल्थ से भी जुड़ा होता है।
इसलिए रोज के भोजन में किन चीजों को कितनी मात्रा में लिया जा रहा है, इस पर ध्यान देना जरूरी है। संतुलित आहार में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को जगह देना और जरूरत से ज्यादा प्रोसेस्ड, अत्यधिक मीठे या अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना सामान्य तौर पर उपयोगी माना जाता है।
डाइट में बदलाव करते समय किसी एक फूड को चमत्कारी समाधान मानने के बजाय पूरे खान-पान के पैटर्न पर ध्यान देना ज्यादा व्यावहारिक है। घर का संतुलित भोजन, पर्याप्त पोषण और खाने की मात्रा पर नियंत्रण लंबे समय तक अपनाई जा सकने वाली आदतें हो सकती हैं।
हार्ट हेल्थ के लिए सिर्फ बीमारी का इंतजार न करें
दिल की सेहत को लेकर एक आम गलती यह होती है कि लोग समस्या सामने आने के बाद ही अपनी जीवनशैली बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन स्वस्थ रहने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर पहले से ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।
बताई गई दिनचर्या में किसी एक बेहद कठिन या असामान्य गतिविधि पर निर्भरता नहीं है। इसके बजाय कई छोटी आदतों का संयोजन दिखाई देता है, चलना, शरीर को मजबूत रखना, भोजन को लेकर जागरूक रहना और तनाव कम करने के लिए समय निकालना।
इन आदतों को अपनी सुविधा और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार दैनिक जीवन में शामिल किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति रोजाना कुछ समय पैदल चलने से शुरुआत कर सकता है। अगर दिनभर डेस्क पर काम करना पड़ता है तो लगातार कई घंटों तक बैठे रहने से बचने की कोशिश की जा सकती है।
इसी तरह, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करने वाले व्यक्ति को अपनी उम्र और फिटनेस स्तर के अनुसार एक्सरसाइज चुननी चाहिए। भोजन में भी अचानक बहुत बड़े बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे बेहतर विकल्पों को शामिल किया जा सकता है।
चार आदतों का आसान फॉर्मूला
हार्ट हेल्थ के लिए चार चीजों पर खास ध्यान दिया जा सकता है। पहली, शरीर को रोजाना किसी न किसी तरीके से सक्रिय रखना। दूसरी, खाने की गुणवत्ता और मात्रा पर ध्यान देना। तीसरी, मांसपेशियों की ताकत बनाए रखने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना और चौथी, मानसिक तनाव कम करने के लिए रिलैक्सेशन एक्टिविटी के लिए समय निकालना।
हार्ट हेल्थ को केवल एक्सरसाइज या केवल डाइट से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। शरीर की फिटनेस, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और रोजमर्रा की गतिविधियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली के लिए इन सभी पहलुओं पर संतुलित तरीके से ध्यान देना जरूरी है।
हालांकि, किसी व्यक्ति को पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो उसके लिए एक्सरसाइज और डाइट का प्लान अलग हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही रूटीन में बदलाव करना चाहिए।
आज से ही शुरू कर सकते हैं छोटे बदलाव
हार्ट हेल्थ के लिए अपनी पूरी जिंदगी एक दिन में बदलने की जरूरत नहीं है। छोटे कदमों से शुरुआत की जा सकती है। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत है तो दिन में कई बार थोड़ी देर चलना शुरू करें। रोज के भोजन पर ध्यान दें और संतुलित विकल्प चुनने की कोशिश करें। अपनी क्षमता के अनुसार मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करें और दिन में कुछ मिनट तनाव कम करने वाली गतिविधियों के लिए निकालें।
इन आदतों का मुख्य संदेश यही है कि दिल की देखभाल किसी एक दिन या किसी एक एक्सरसाइज तक सीमित नहीं है। यह रोजाना अपनाई जाने वाली जीवनशैली का हिस्सा है। नियमित गतिविधि, संतुलित खान-पान, मांसपेशियों की मजबूती और तनाव प्रबंधन जैसे कदम समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में योगदान दे सकते हैं।




