स्वास्थ्य योजनाओं से लेकर सोशल मीडिया प्रचार तक, जयराम ठाकुर ने सरकार पर साधा निशाना; कहा- जनता के हितों को कमजोर किया जा रहा
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर स्वास्थ्य योजनाओं और सरकारी कार्यप्रणाली को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार पूर्व भाजपा शासनकाल में शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजनाओं को मजबूत बनाने के बजाय उनके दायरे को सीमित करने और उनकी प्रभावशीलता कम करने की कोशिश की जा रही है।
मंडी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन उसके द्वारा शुरू की गई नई पहलों और विकास कार्यों से होता है, लेकिन वर्तमान सरकार का ध्यान अपनी उपलब्धियां गिनाने की बजाय पूर्व सरकार की योजनाओं को निशाना बनाने पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि जनता के हित में शुरू की गई योजनाओं को राजनीतिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक आवश्यकता के आधार पर देखा जाना चाहिए।
स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सहारा योजना और हिमकेयर जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने हजारों जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत प्रदान की थी। उनका दावा था कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए ये योजनाएं संबल का काम करती थीं और इलाज का खर्च उठाने में मददगार साबित हुई थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इन योजनाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दे रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि किसी योजना से जनता को लाभ मिल रहा है तो सरकार को उसे और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इसके विपरीत, यदि योजनाओं के बजट या दायरे में कटौती होती है तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो पहले से ही आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
उनका कहना था कि जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर सरकार की सोच सकारात्मक और दूरदर्शी होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं।
‘जीवित व्यक्ति को रिकॉर्ड में मृत दिखाना गंभीर मामला’
जयराम ठाकुर ने सराज क्षेत्र से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के एक व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया, जबकि वह जीवित है। इस कारण उसे मिलने वाली सहायता प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर ऐसी गलतियां होती हैं तो इसका सीधा नुकसान आम नागरिक को उठाना पड़ता है। विशेष रूप से उन लोगों को, जो पहले से बीमारी या आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य राहत पहुंचाना होता है, लेकिन रिकॉर्ड संबंधी त्रुटियां लाभार्थियों को परेशानियों में डाल देती हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि गलती किस स्तर पर हुई। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
जनप्रतिनिधियों के साथ की बैठक
मंडी जिले में अपने दौरे के दौरान जयराम ठाकुर ने पंचायत समिति जंजैहली और बालीचौकी के नवनिर्वाचित सदस्यों सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय विकास, ग्रामीण समस्याओं और स्थानीय जरूरतों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में उनकी अहम भूमिका होती है। उन्होंने नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
बैठक में मौजूद लोगों ने क्षेत्रीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं, सड़क, पानी और अन्य विकास संबंधी मुद्दों को भी उठाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी भाजपा जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाती रहेगी।
सोशल मीडिया प्रचार को लेकर भी सरकार पर हमला
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की प्रचार रणनीति को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संसाधनों का उपयोग विकास योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने के बजाय राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने में किया जा रहा है।
उनका कहना था कि सरकार को अपनी उपलब्धियों और योजनाओं के प्रचार पर ध्यान देना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की आलोचना पर। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं होना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने दावा किया कि सरकार के कुछ तंत्र विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से सक्रिय हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और अंतिम फैसला हमेशा जनता ही करती है।
‘सेवा और विश्वास से बनती है राजनीतिक पहचान’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता की पहचान प्रचार अभियानों से नहीं बल्कि जनता के बीच किए गए कार्यों और सेवा भावना से बनती है। उन्होंने कहा कि लोगों का विश्वास जीतने के लिए पारदर्शी प्रशासन, ईमानदार नीयत और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान देगी तो उसे अलग से अपनी छवि बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विकास कार्य और जनकल्याण की योजनाएं स्वयं सरकार की उपलब्धियों को सामने ले आती हैं।
उनके अनुसार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए और उसका केंद्र जनता का हित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां होती हैं तथा दोनों को जनहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए प्रश्न
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश इस समय आर्थिक चुनौतियों, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सरकार को अपने संसाधन और ऊर्जा इन समस्याओं के समाधान पर केंद्रित करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर अपेक्षित गति से काम नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि जनता को घोषणाओं से अधिक धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों की जरूरत है। इसलिए सरकार को राजनीतिक बहसों से ऊपर उठकर विकास और जनसेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
भाजपा जनता के मुद्दे उठाती रहेगी
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पानी और रोजगार जैसे विषय राजनीति से ऊपर हैं और इन पर हर दल को गंभीरता से काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहां सरकार अच्छा काम करेगी वहां भाजपा उसका समर्थन करेगी, लेकिन यदि जनता के हितों की अनदेखी होती है तो विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए आवाज भी उठाएगा। लोकतंत्र में यही स्वस्थ परंपरा है।
आने वाले समय में और तेज हो सकती है सियासी बहस
स्वास्थ्य योजनाओं, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी प्रचार तंत्र को लेकर जयराम ठाकुर द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में बहस और तेज होने के संकेत हैं। एक ओर विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार अपने कार्यों और उपलब्धियों को जनता के सामने रख रही है।
आने वाले महीनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बन सकता है, विशेषकर तब जब स्वास्थ्य योजनाओं और जनकल्याण कार्यक्रमों के प्रभाव को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। फिलहाल इतना तय है कि हिमाचल प्रदेश में सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी का दौर अभी जारी रहेगा और जनता की नजरें दोनों पक्षों के दावों तथा कार्यों पर बनी रहेंगी।



