यूरोप के एनर्जी मार्केट में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में अडानी ग्रुप, 27 हजार करोड़ रुपये में खरीदेगा Evos

यूरोप के एनर्जी मार्केट में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में अडानी ग्रुप, 27 हजार करोड़ रुपये में खरीदेगा Evos

भारत के बड़े कारोबारी समूहों में शामिल अडानी ग्रुप अब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पोर्ट और कार्गो हैंडलिंग के कारोबार से अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह अब यूरोप के लिक्विड स्टोरेज सेक्टर में बड़ी एंट्री करने जा रहा है। इसके लिए अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) यूरोप की प्रमुख लिक्विड स्टोरेज कंपनी Evos BV को खरीदने की तैयारी में है। इस अधिग्रहण पर करीब 27 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

यह सौदा अडानी ग्रुप की अब तक की बड़ी अंतरराष्ट्रीय कारोबारी योजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसके जरिए कंपनी को यूरोप के कई अहम बंदरगाहों और ऊर्जा भंडारण केंद्रों तक पहुंच मिलेगी। खास बात यह है कि Evos का कारोबार केवल पारंपरिक पेट्रोलियम उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी भविष्य में इस्तेमाल होने वाले वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधनों के भंडारण से जुड़े क्षेत्र में भी काम कर रही है।

2.88 अरब डॉलर के सौदे से यूरोप में बढ़ेगा कारोबार

अडानी पोर्ट्स ने गुरुवार को जानकारी दी कि Evos BV के अधिग्रहण के लिए करीब 2.88 अरब डॉलर का एंटरप्राइज वैल्यू वाला सौदा किया जाएगा। यूरोपीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 2.56 अरब यूरो और भारतीय रुपये में करीब 27 हजार करोड़ रुपये बैठती है। यह पूरी डील नकद भुगतान के आधार पर पूरी की जाएगी।

इस अधिग्रहण के लिए अडानी पोर्ट्स कर्ज के माध्यम से जरूरी पूंजी जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, कंपनी को सौदे को अंतिम रूप देने से पहले कई औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसमें संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी के साथ अन्य जरूरी अनुमतियां लेना भी शामिल है। इसके अलावा Evos के कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की जाएगी।

कंपनी के मूल्यांकन की बात करें तो Evos की वैल्यू लगभग 1.18 अरब यूरो बताई गई है। वहीं, यह सौदा वर्ष 2025 के EV/EBITDA के 11.7 गुना के आधार पर तय किया गया है। इस खरीद के बाद अडानी पोर्ट्स को यूरोप के उन बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जहां ईंधन और अन्य तरल उत्पादों के सुरक्षित भंडारण की बड़ी जरूरत है।

2025 में कंपनी ने कमाया 392 मिलियन यूरो का रेवेन्यू

Evos की वित्तीय स्थिति भी इस अधिग्रहण को महत्वपूर्ण बनाती है। कंपनी ने कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान 392 मिलियन यूरो का राजस्व दर्ज किया था। इसी अवधि में उसका EBITDA 219 मिलियन यूरो रहा। कंपनी का EBITDA मार्जिन करीब 56 प्रतिशत था, जो उसके कारोबार की मजबूत परिचालन क्षमता को दर्शाता है।

अडानी पोर्ट्स और Evos के वित्तीय आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो दोनों कंपनियों का संयुक्त नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात लगभग 2.76 गुना रहने का अनुमान है। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 तक यह अनुपात कम होकर करीब 2.5 गुना तक पहुंच सकता है।

इसका मतलब है कि अधिग्रहण के बाद अडानी पोर्ट्स अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ-साथ कर्ज के स्तर को भी नियंत्रित रखने की कोशिश करेगी। कंपनी के लिए यह सौदा केवल एक विदेशी कंपनी को खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

पांच यूरोपीय देशों में फैला है Evos का नेटवर्क

Evos यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज कंपनियों में गिनी जाती है। इसका मुख्य काम विभिन्न प्रकार के तरल ईंधनों और औद्योगिक उत्पादों को बड़े टर्मिनलों में सुरक्षित रखना है। कंपनी के पास नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा जैसे देशों में बंदरगाहों पर स्टोरेज टर्मिनल मौजूद हैं।

इन सभी टर्मिनलों की कुल भंडारण क्षमता लगभग 63 लाख क्यूबिक मीटर है। इस बड़े नेटवर्क के कारण कंपनी यूरोप के ऊर्जा और समुद्री परिवहन कारोबार में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। वर्ष 2025 के दौरान Evos ने करीब 3.7 करोड़ मीट्रिक टन उत्पादों का संचालन किया था।

कंपनी के टर्मिनलों पर पेट्रोल, डीजल, समुद्री जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और विमानन ईंधन का भंडारण किया जाता है। इसके अलावा बदलती ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए Evos ने नए प्रकार के ईंधनों से जुड़े कारोबार में भी अपनी जगह बनाई है।

पारंपरिक ईंधन के साथ ग्रीन एनर्जी पर भी नजर

दुनिया के कई देश कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसका असर ऊर्जा भंडारण और परिवहन से जुड़े कारोबार पर भी पड़ रहा है। ऐसे में Evos का वैकल्पिक ईंधनों के क्षेत्र में अनुभव अडानी पोर्ट्स के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

कंपनी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायोफ्यूल, मेथनॉल और बायोएथेनॉल जैसे उत्पादों के भंडारण से जुड़े कारोबार में भी सक्रिय है। आने वाले वर्षों में इन ईंधनों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इस क्षेत्र में मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।

अडानी पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी के मुताबिक, Evos का अधिग्रहण कंपनी के एक अरब टन कार्गो हैंडलिंग के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। इससे कंपनी को दुनिया के प्रमुख लिक्विड स्टोरेज और ऊर्जा केंद्रों में अपना नेटवर्क बढ़ाने का मौका मिलेगा। साथ ही यूरोप के ऊर्जा बाजार में कंपनी की स्थिति मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते बदलाव में भागीदारी का रास्ता खुलेगा।

सीमेंट कारोबार में भी कई बड़ी कंपनियां खरीद चुका है समूह

अडानी ग्रुप की विस्तार रणनीति केवल पोर्ट और ऊर्जा कारोबार तक सीमित नहीं रही है। पिछले कुछ वर्षों में समूह ने सीमेंट उद्योग में भी कई बड़े अधिग्रहण किए हैं। वर्ष 2022 में स्विट्जरलैंड की कंपनी होल्सिम से अंबुजा सीमेंट्स और ACC को खरीदकर समूह ने भारतीय सीमेंट बाजार में बड़ी जगह बनाई थी। इस सौदे की कीमत करीब 10.5 अरब डॉलर थी।

इसके बाद वर्ष 2023 में अंबुजा सीमेंट्स के माध्यम से सांघी इंडस्ट्रीज में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल की गई। जून 2024 में समूह ने पेन्ना सीमेंट का अधिग्रहण करीब 10,422 करोड़ रुपये में किया। वहीं, 2024 के अंतिम महीनों में ओरिएंट सीमेंट में भी लगभग 8,100 करोड़ रुपये में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने का सौदा किया गया।

इन अधिग्रहणों के जरिए अडानी ग्रुप ने सीमेंट उत्पादन और वितरण के क्षेत्र में अपना कारोबार बढ़ाया। कंपनी की रणनीति अलग-अलग क्षेत्रों में पहले से मौजूद कारोबार को खरीदकर अपनी बाजार हिस्सेदारी और परिचालन क्षमता बढ़ाने की रही है।

बंदरगाहों से लेकर समुद्री सेवाओं तक बढ़ाया कारोबार

अडानी ग्रुप की शुरुआत से ही पोर्ट और लॉजिस्टिक्स कारोबार पर विशेष ध्यान रहा है। भारत में समुद्री व्यापार के बढ़ते महत्व को देखते हुए समूह ने समय-समय पर अलग-अलग बंदरगाहों को अपने नेटवर्क में शामिल किया।

आंध्र प्रदेश के गंगावरम पोर्ट और कृष्णापट्टनम पोर्ट का अधिग्रहण इसी विस्तार रणनीति का हिस्सा रहा। इन बंदरगाहों के जुड़ने से समूह की कार्गो हैंडलिंग क्षमता और दक्षिण भारत में मौजूदगी को मजबूती मिली।

इसके अलावा अडानी ग्रुप ने समुद्री सेवाएं देने वाली कंपनी ओशन स्पार्कल को भी अपने कारोबार का हिस्सा बनाया। यह कंपनी जहाजों को समुद्र में सहायता देने और अन्य समुद्री परिचालन सेवाएं उपलब्ध कराने का काम करती है। इस तरह समूह ने बंदरगाह संचालन के साथ उससे जुड़ी सेवाओं में भी अपनी पहुंच बढ़ाई।

एयरपोर्ट सेक्टर में भी बनाया बड़ा नेटवर्क

समूह ने विमानन क्षेत्र में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से विस्तार किया है। GVK ग्रुप के साथ हुए सौदे के बाद अडानी ग्रुप को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नियंत्रण हासिल हुआ। इसके अलावा नवी मुंबई एयरपोर्ट परियोजना में भी समूह की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में एयरपोर्ट संचालन का जिम्मा मिलने के बाद इस क्षेत्र में अडानी ग्रुप की मौजूदगी और मजबूत हुई। अहमदाबाद, गुवाहाटी, जयपुर, लखनऊ, मंगलुरु और तिरुवनंतपुरम के एयरपोर्ट का संचालन भी समूह को सौंपा गया। इन हवाई अड्डों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत लीज पर लिया गया था।

एयरपोर्ट कारोबार में प्रवेश से समूह को यात्रियों की आवाजाही, विमानन सेवाओं और एयरपोर्ट से जुड़े व्यावसायिक अवसरों में भागीदारी का मौका मिला।

बिजली और मीडिया में भी किए बड़े निवेश

अडानी ग्रुप ने बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी अधिग्रहण के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। दिसंबर 2017 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पावर ट्रांसमिशन कारोबार से संबंधित संपत्तियों को खरीदने का समझौता किया गया था। इस सौदे की कीमत करीब 18,800 करोड़ रुपये बताई गई थी। इससे समूह को बिजली ट्रांसमिशन के क्षेत्र में अपना नेटवर्क बढ़ाने में मदद मिली।

मीडिया कारोबार में भी समूह ने वर्ष 2022 में कदम रखा। AMG मीडिया नेटवर्क्स के माध्यम से NDTV का अधिग्रहण किया गया। इसके बाद अडानी ग्रुप की कारोबारी गतिविधियों में मीडिया सेक्टर भी शामिल हो गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बनाने की कोशिश

Evos को खरीदने की योजना अडानी ग्रुप के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके जरिए कंपनी को भारत के बाहर यूरोप के स्थापित ऊर्जा बाजार में सीधे कारोबार करने का अवसर मिलेगा। पांच देशों में फैले टर्मिनल, बड़ी स्टोरेज क्षमता और वैकल्पिक ईंधनों का अनुभव इस अधिग्रहण को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं।

अब इस सौदे की सफलता नियामकीय मंजूरियों और बाकी औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी। यदि अधिग्रहण पूरा हो जाता है तो अडानी पोर्ट्स का कारोबार भारतीय बंदरगाहों से आगे बढ़कर यूरोप के महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों तक पहुंच जाएगा। इससे कंपनी को वैश्विक लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा भंडारण उद्योग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का नया अवसर मिल सकता है।