रोहतक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के बाहर कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर हरियाणा की राजनीति में बुधवार को नया सियासी टकराव देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक मर्यादाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए रोहतक में व्यापक विरोध मार्च निकाला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय तक पहुंचा, जहां भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने धरना देकर कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित रहा और मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सुभाष चौक से शुरू हुआ भाजपा का मार्च अंबेडकर चौक से होते हुए कांग्रेस प्रदेश कार्यालय पहुंचा। पूरे रास्ते कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए तथा प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए प्रदर्शन की आलोचना की।
जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय के बाहर पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी जवाबी नारेबाजी शुरू कर दी। दोनों दलों के समर्थकों के आमने-सामने आने से कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने तत्काल मोर्चा संभाला और दोनों पक्षों के बीच पर्याप्त दूरी बनाकर कानून-व्यवस्था बनाए रखी। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के बाद किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया गया।
मार्च के समापन पर भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के बाहर इस प्रकार का प्रदर्शन लोकतांत्रिक परंपराओं और सुरक्षा व्यवस्था दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है। उनके अनुसार देश के प्रधानमंत्री के आवास की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है और इस प्रकार की गतिविधियां लोकतांत्रिक विरोध की सीमाओं से आगे जाती हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यम उपलब्ध हैं, लेकिन ऐसे संवेदनशील स्थानों पर प्रदर्शन करना उचित नहीं माना जा सकता। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार ऐसे राजनीतिक कदम उठा रही है जिनका उद्देश्य केवल टकराव की राजनीति को बढ़ावा देना है।
डॉ. अर्चना गुप्ता ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए उन्हें “मौसमी नेता” बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केवल राजनीतिक अवसरों के समय सक्रिय दिखाई देते हैं और युवाओं को भ्रमित कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करते हैं। उनके अनुसार देश का युवा अब विकास, सुशासन, पारदर्शिता और स्थिर नेतृत्व के पक्ष में खड़ा है तथा वह केवल राजनीतिक नारों से प्रभावित होने वाला नहीं है।
उन्होंने भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए भी कांग्रेस पर हमला बोला। उनका कहना था कि कांग्रेस को इन मामलों पर वर्तमान सरकार को घेरने का नैतिक अधिकार नहीं है क्योंकि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने अपने संबोधन में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला कांग्रेस शासन के दौरान हुआ था और इसलिए लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करने से पहले कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिए। उनके अनुसार भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और संवैधानिक व्यवस्थाओं का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़ ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लगातार देश की संवैधानिक तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार यह राजनीति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है और जनता अब ऐसे प्रयासों को समझ चुकी है।
धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के नाम पर ऐसी गतिविधियां नहीं होनी चाहिए जिनसे संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रीय नेतृत्व की गरिमा प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए जनता के बीच अपने विचार रखती है और विपक्ष से भी जिम्मेदार आचरण की अपेक्षा करती है।
पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस वास्तविक जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार विकास, बुनियादी ढांचे, रोजगार, निवेश और जनकल्याण के क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में विकास कार्यों की गति पहले की तुलना में तेज हुई है और जनता इसका लाभ महसूस कर रही है। ऐसे में कांग्रेस विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक विवादों को हवा देने में लगी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं से अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की। हालांकि कांग्रेस कार्यालय के बाहर दोनों दलों के समर्थकों के बीच नारेबाजी लगातार जारी रही, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण स्थिति नियंत्रण में रही और कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया।
कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया। मार्च और धरने में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओम प्रकाश धनखड़, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, पूर्व राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा, प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पूनिया, प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय बंसल, प्रदेश सचिव रेनू डाबला, रोहतक जिला अध्यक्ष रणवीर ढाका, राजकुमार कपूर, जोगेंद्र सैनी, प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी शमशेर सिंह, झज्जर जिला अध्यक्ष विकास वाल्मीकि, जींद जिला अध्यक्ष तेजेंद्र ढुल, गोहाना जिला अध्यक्ष बिजेंद्र मलिक, रेवाड़ी जिला अध्यक्ष वंदना पोपली, जिला उपाध्यक्ष नवीन ढुल, पूर्व चेयरमैन प्रतिभा सुमन, जिला मीडिया प्रभारी पंकज भारद्वाज, हरिओम मित्तल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राज्यों तक पहुंच गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। हरियाणा में रोहतक का यह प्रदर्शन इसी सियासी टकराव का हिस्सा माना जा रहा है, जहां दोनों दलों ने एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक आचरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
फिलहाल भाजपा ने इस विरोध मार्च के जरिए कांग्रेस के प्रदर्शन का राजनीतिक जवाब देने की कोशिश की है, जबकि कांग्रेस भी अपने रुख पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




