पंजाब के लुधियाना जिले के गांव घुंगराणा से जुड़े अंगद सिंह ढिल्लों ने महज 35 वर्ष की उम्र में कनाडा की कूटनीति में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। कनाडा सरकार ने उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अपना अगला राजदूत नियुक्त किया है। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने 25 सितंबर को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। अंगद ढिल्लों ‘राजदूत असाधारण और पूर्णाधिकारी’ के तौर पर यूएई में कनाडा का प्रतिनिधित्व करेंगे और राधा कृष्ण पांडेय का स्थान लेंगे।
अंगद की नियुक्ति की खबर सामने आने के बाद उनके पैतृक गांव घुंगराणा में खुशी का माहौल है। गांव के लोगों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि विदेश में रहते हुए भी अंगद अपने पारिवारिक और गांव से जुड़े रिश्तों को बनाए हुए हैं। उनका जन्म चंडीगढ़ में हुआ और उनके माता-पिता भी चंडीगढ़ में रहते हैं, जबकि उनके पैतृक परिवार की जड़ें लुधियाना के घुंगराणा गांव में हैं।
घुंगराणा से गहरा रिश्ता
अंगद सिंह ढिल्लों का परिवार लंबे समय से पंजाब से जुड़ा रहा है। उनके परिवार की सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनके परदादा गुरनाम सिंह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य रहे थे। उनके दादा जगजीत सिंह ढिल्लों भी पंजाब में सार्वजनिक जीवन से जुड़े रहे और खेती-किसानी के क्षेत्र में उनकी पहचान थी। परिवार की यही पृष्ठभूमि अंगद के बचपन और सोच पर भी असर डालती रही।
अंगद ने अपने पैतृक गांव से अपने जुड़ाव को लेकर कहा है कि विदेश में रहने और कनाडा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने के बावजूद पंजाब उनके जीवन का हिस्सा बना हुआ है। भारत आने पर वे घुंगराणा जाना नहीं भूलते। बचपन में भी वे छुट्टियों के दौरान अपने दादा-दादी के साथ समय बिताने के लिए गांव आते थे। गांव में उनके परिवार की पहचान और पुराने सामाजिक रिश्ते आज भी कायम हैं।
चंडीगढ़ में जन्म, मोहाली में पढ़ाई
अंगद का जन्म चंडीगढ़ में हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा मोहाली में हुई। इसके बाद उन्होंने पुणे के महिंद्रा यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। वर्ष 2010 में 19 वर्ष की उम्र में वे उच्च शिक्षा के लिए कनाडा चले गए। वहां न्यू ब्रंसविक स्थित माउंट एलिसन यूनिवर्सिटी से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्नातक की पढ़ाई की।
कनाडा पहुंचने के बाद अंगद ने शिक्षा के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन और राजनीति में अपनी जगह बनानी शुरू की। वर्ष 2015 में उन्होंने कनाडा की लिबरल पार्टी के साथ जमीनी स्तर पर काम करना शुरू किया। इसके बाद उनका राजनीतिक और सरकारी करियर लगातार आगे बढ़ता गया।
कम उम्र में कनाडा की राजनीति में प्रवेश करने के बाद अंगद ने संगठनात्मक और सरकारी स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। आगे चलकर वे दो संघीय मंत्रियों के चीफ ऑफ स्टाफ रहे। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने कनाडा सरकार के कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और संपर्कों में भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री कार्यालय में भी निभाई अहम जिम्मेदारी
अंगद की पेशेवर यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय में रहा। कनाडा सरकार के अनुसार, यूएई में राजदूत नियुक्त होने से पहले वे प्रधानमंत्री कार्यालय में संचालन एवं हितधारक संबंधों के निदेशक के तौर पर काम कर रहे थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के करीबी सलाहकारों में शामिल रहते हुए उन्होंने कनाडा के प्रमुख द्विपक्षीय साझेदारों के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने की प्रक्रिया में सहयोग किया। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं।
उनकी जिम्मेदारियों में निवेश से जुड़े हितधारकों के साथ समन्वय और कनाडा के पहले राष्ट्रीय निवेश सम्मेलन की योजना बनाने में सहयोग भी शामिल रहा। इससे पहले संघीय मंत्रियों के साथ काम करते हुए उन्होंने कनाडा की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैठकों और मंचों से जुड़े कार्यों में भी हिस्सा लिया।
कनाडा सरकार के अनुसार, अंगद ने जी-7, जी-20, संयुक्त राष्ट्र महासभा, एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय परिवहन मंच और संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है।
भारत और चीन के साथ संबंधों में भी भूमिका
प्रधानमंत्री कार्यालय में अपनी जिम्मेदारी के दौरान अंगद ने कनाडा के प्रमुख द्विपक्षीय साझेदारों के साथ संवाद और सहयोग को फिर से सक्रिय करने के प्रयासों में काम किया। कनाडा सरकार ने विशेष रूप से भारत और चीन के साथ राजनयिक संबंधों में उच्चस्तरीय संवाद और सहयोग के चैनल मजबूत करने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया है।
अब यूएई में राजदूत के रूप में उनकी जिम्मेदारी कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात के बीच राजनयिक संबंधों से जुड़े काम को आगे बढ़ाने की होगी। राजदूत किसी देश का दूसरे देश में सर्वोच्च स्तर का राजनयिक प्रतिनिधि होता है। ऐसे में 35 वर्ष की उम्र में यह जिम्मेदारी मिलना अंगद के अब तक के सरकारी और राजनीतिक अनुभव के महत्वपूर्ण पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है।
परिवार को भी उपलब्धि पर गर्व
अंगद की नियुक्ति की जानकारी सामने आने के बाद घुंगराणा में उनके परिवार और परिचितों के बीच खुशी है। गांव के लोगों के मुताबिक अंगद का परिवार लंबे समय से गांव से जुड़ा रहा है। विदेश में रहने के बावजूद उनके परिवार ने गांव के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं।
अंगद के माता-पिता चंडीगढ़ में रहते हैं। उनके पिता नैनिंदर सिंह ढिल्लों कृषि क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जुड़े रहे हैं, जबकि उनकी मां हरप्रीत कौर ढिल्लों पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकील हैं। परिवार की अगली पीढ़ी का सार्वजनिक जीवन और शिक्षा से जुड़ा यह सफर अब कनाडा की कूटनीतिक जिम्मेदारी तक पहुंच गया है।
गांव आने पर आज भी पुराना रिश्ता कायम
अंगद ने अपने पैतृक गांव से जुड़ाव को लेकर बताया है कि जब भी वे भारत आते हैं, समय कम होने के बावजूद घुंगराणा जाने का प्रयास करते हैं। उनके मुताबिक बचपन में गांव में दादा-दादी के साथ बिताया समय उनकी यादों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके दादा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय थे, इसलिए गांव में होने वाली गतिविधियों और लोगों के साथ उनका संपर्क बचपन से ही रहा।
यही वजह है कि कनाडा सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने के बाद भी उनका अपने गांव से रिश्ता बना हुआ है। उनके लिए घुंगराणा केवल पैतृक गांव नहीं, बल्कि परिवार की पहचान और अतीत से जुड़ा स्थान है।
19 साल की उम्र में कनाडा गए, अब राजदूत की जिम्मेदारी
अंगद के सफर पर नजर डालें तो 19 वर्ष की उम्र में उच्च शिक्षा के लिए कनाडा जाना उनके जीवन का अहम मोड़ रहा। अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई के बाद उन्होंने कनाडा के राजनीतिक और सरकारी तंत्र में काम शुरू किया। कुछ ही वर्षों में जमीनी राजनीतिक संगठन से संघीय सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद अब उन्हें राजदूत की जिम्मेदारी मिली है।
कनाडा सरकार की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक अंगद यूएई में राधा कृष्ण पांडेय का स्थान लेंगे। उनकी नियुक्ति कनाडा की नई राजनयिक नियुक्तियों की घोषणा का हिस्सा है।
लुधियाना के घुंगराणा से जुड़ा यह नाम अब कनाडा और यूएई के बीच आधिकारिक कूटनीतिक संबंधों में दिखाई देगा। एक ओर उनकी जिम्मेदारी कनाडा के हितों का प्रतिनिधित्व करने की होगी, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार और पैतृक गांव के लिए यह उपलब्धि उनकी लंबी यात्रा का नया अध्याय है।
पंजाब से कनाडा तक अंगद की यात्रा में शिक्षा, राजनीति, सरकारी जिम्मेदारियों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काम का अनुभव शामिल रहा है। अब यूएई में कनाडा के राजदूत के रूप में उनकी नई भूमिका उनके पेशेवर जीवन की एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। घुंगराणा से शुरू हुआ पारिवारिक जुड़ाव और चंडीगढ़ में बीता बचपन उनकी पहचान का हिस्सा बना हुआ है, जबकि उनकी पेशेवर जिम्मेदारियां अब कनाडा की विदेश नीति और कूटनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ गई हैं।




