लुधियाना: चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘वुमन इन मेडिसिन एंड एलाइड स्पेशलिटीज’ (WIMA) का औपचारिक शुभारंभ किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम में लुधियाना और आसपास के इलाकों से 60 से अधिक महिला चिकित्सकों ने भाग लिया। इस मंच के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, पेशेवर विकास और महिला डॉक्टरों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर कल्याण से जुड़े विषयों पर निरंतर काम करने की योजना बनाई गई है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके सामने स्वास्थ्य, कार्य-जीवन संतुलन, नेतृत्व के अवसर, करियर में प्रगति और वित्तीय सुरक्षा जैसी कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। डब्ल्यूआईएमए का उद्देश्य इन विषयों पर खुला संवाद शुरू करना और महिला चिकित्सकों को एक-दूसरे से सीखने तथा सहयोग करने के लिए प्रभावी मंच प्रदान करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. वंदना मिड्ढा ने कहा कि डब्ल्यूआईएमए का दायरा केवल महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। मंच महिला चिकित्सकों के समग्र कल्याण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करेगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर स्वयं दूसरों के स्वास्थ्य की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन कई बार अपने स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जरूरतों को पीछे कर देती हैं। ऐसे में महिला चिकित्सकों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि डब्ल्यूआईएमए के माध्यम से महिला डॉक्टरों को ऐसा वातावरण देने का प्रयास किया जाएगा, जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकें, पेशेवर चुनौतियों पर चर्चा कर सकें और एक-दूसरे का सहयोग कर सकें। इसके साथ ही चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और उपलब्धियों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाएगा।
कार्यक्रम की पैट्रन डॉ. मैरी जॉन ने चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के विकास में महिलाओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है और कई महिला चिकित्सकों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद नई मिसाल कायम की है।
उन्होंने कहा कि महिला चिकित्सकों के योगदान को पहचानना और आने वाली पीढ़ी की डॉक्टरों को उनसे प्रेरणा दिलाना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि डब्ल्यूआईएमए चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं के लिए सहयोग, नेतृत्व और ज्ञान के आदान-प्रदान का मजबूत नेटवर्क तैयार करेगा।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। पहले वैज्ञानिक सत्र में डॉ. अक्षता देसाई ने महिलाओं में मोटापे की समस्या पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
उन्होंने महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों में मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उम्र, हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली और अन्य कारकों के कारण महिलाओं में वजन बढ़ने की समस्या अलग-अलग चरणों में अलग तरीके से सामने आ सकती है। इसका असर महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
डॉ. अक्षता देसाई ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के स्वास्थ्य को देखते हुए मोटापे को केवल वजन बढ़ने की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके व्यापक स्वास्थ्य प्रभावों को समझते हुए समय पर जागरूकता, उचित जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह पर ध्यान देना आवश्यक है।
कार्यक्रम में डब्ल्यूआईएमए की जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. प्रेरणा गोयल ने महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य से संबंधित शोध और संवाद को बढ़ावा देने के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि महिला स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर नियमित चर्चा और शोध के लिए संरचित कार्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं।
उनके अनुसार, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई विषय ऐसे हैं जिन पर निरंतर शोध और चिकित्सकीय संवाद की आवश्यकता है। डब्ल्यूआईएमए के माध्यम से विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर इन विषयों पर ज्ञान साझा करने और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।
कार्यक्रम में गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. गीतांजलि पवार ने डब्ल्यूआईएमए की प्रेसिडेंट डॉ. गुरशरण सिद्धू को सम्मानित किया। इस अवसर पर संगठन के आधिकारिक लोगो का भी अनावरण किया गया। यह लोगो डॉ. कमलप्रीत द्वारा तैयार किया गया है।
आयोजकों ने बताया कि लोगो के माध्यम से संगठन की पहचान और उसके उद्देश्यों को दर्शाने का प्रयास किया गया है। WIMA के गठन को महिला चिकित्सकों के लिए एक ऐसे नेटवर्क की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जो चिकित्सा ज्ञान के साथ-साथ व्यक्तिगत और पेशेवर विकास को भी महत्व देगा।
कार्यक्रम के दूसरे वैज्ञानिक सत्र में डॉ. शिबा टक्कर छाबड़ा ने अपनी प्रस्तुति दी। सत्र का संचालन डॉ. मोनिका बंसल ने किया। चर्चा के दौरान महिला डॉक्टरों की पेशेवर उपलब्धियों के साथ-साथ उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. मोनिका बंसल ने कहा कि महिला डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र के लगभग हर हिस्से में अपनी क्षमता साबित की है। हालांकि, पेशेवर सफलता के साथ उन्हें कार्यस्थल पर कई तरह की चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए ऐसा मंच जरूरी है, जहां महिलाएं अपने अनुभव साझा कर सकें और व्यावहारिक समाधान तलाश सकें।
उन्होंने कहा कि महिला चिकित्सकों की उपलब्धियों को सामने लाने से युवा डॉक्टरों को भी प्रेरणा मिलेगी। साथ ही वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुभवों से नई पीढ़ी को अपने करियर की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में महिला डॉक्टरों के वित्तीय भविष्य से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। ट्रेजरर डॉ. वंदना राजपूत और डॉ. रिशु ने वित्तीय योजना, सेवानिवृत्ति की तैयारी और चिकित्सकों की अन्य रुचियों से संबंधित गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय पेशे के व्यस्त कार्यक्रम के बीच वित्तीय योजना और भविष्य की तैयारी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसे में महिला डॉक्टरों के लिए वित्तीय जागरूकता और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े कार्यक्रम उपयोगी साबित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि डब्ल्यूआईएमए के तहत चिकित्सा के अलावा महिला चिकित्सकों की अन्य रुचियों को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को भी स्थान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य डॉक्टरों को पेशेवर जीवन के साथ अपनी व्यक्तिगत रुचियों और रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी अवसर उपलब्ध करवाना है।
आयोजकों ने कहा कि चिकित्सा पेशा लंबे समय तक चलने वाली जिम्मेदारियों और निरंतर सीखने की मांग करता है। ऐसे में चिकित्सकों के मानसिक, सामाजिक और आर्थिक कल्याण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। WIMA इसी व्यापक सोच के साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
कार्यक्रम में मौजूद महिला चिकित्सकों ने भी मंच की स्थापना को सकारात्मक पहल बताया। उनका मानना था कि अलग-अलग विशेषज्ञताओं में काम करने वाली महिला डॉक्टरों के बीच संवाद बढ़ने से नए विचार सामने आएंगे और पेशेवर सहयोग के अवसर भी मजबूत होंगे।
डब्ल्यूआईएमए की गतिविधियों में भविष्य में चिकित्सा शिक्षा, महिला स्वास्थ्य, शोध, नेतृत्व विकास, वित्तीय जागरूकता और चिकित्सकों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को शामिल करने की योजना है। मंच का उद्देश्य महिला डॉक्टरों को केवल एक संगठनात्मक नेटवर्क देना नहीं, बल्कि ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार करना है, जहां वे अपने अनुभव और विशेषज्ञता को साझा कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि महिला स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए चिकित्सकों की भूमिका अहम है। महिला डॉक्टर अपने पेशेवर अनुभव के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में योगदान दे सकती हैं।
डब्ल्यूआईएमए के पदाधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में विभिन्न विशेषज्ञताओं की महिला चिकित्सकों को साथ जोड़कर नियमित बैठकें, वैज्ञानिक सत्र, कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसरों और सहयोग के रास्ते तलाशे जाएंगे।
कार्यक्रम के समापन पर डब्ल्यूआईएमए की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. मोहनजीत कौर ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में महिला चिकित्सकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने मंच के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि डब्ल्यूआईएमए भविष्य में महिला डॉक्टरों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी अन्य पेशेवर महिलाओं के लिए उपयोगी मंच साबित होगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने और महिला स्वास्थ्य तथा चिकित्सकों के कल्याण से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
डब्ल्यूआईएमए के औपचारिक शुभारंभ के साथ लुधियाना में महिला चिकित्सकों के लिए एक ऐसा मंच अस्तित्व में आया है, जो स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ करियर, नेतृत्व, वित्तीय सुरक्षा और व्यक्तिगत कल्याण जैसे व्यापक विषयों पर काम करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। 60 से अधिक महिला चिकित्सकों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम ने आने वाले समय में संगठन की गतिविधियों के विस्तार की नींव रख दी है।




