DA विवाद पर पंजाब सरकार और कर्मचारियों में टकराव बढ़ा, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी AAP सरकार

DA विवाद पर पंजाब सरकार और कर्मचारियों में टकराव बढ़ा, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी AAP सरकार

चंडीगढ़: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और आम आदमी पार्टी सरकार के बीच लंबित महंगाई भत्ते (DA) को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने जा रहा है। हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की मांगों के बीच पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को सर्वोच्च अदालत में चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें कर्मचारियों को लंबित DA का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार के इस कदम से कर्मचारियों और सरकार के बीच पहले से चल रहा गतिरोध और बढ़ने के आसार हैं।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय सामने आया है, जब 31 अगस्त को उसे हाईकोर्ट में DA के भुगतान संबंधी आदेश पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है। इससे पहले ही कर्मचारी संगठनों ने संभावित सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को देखते हुए कैविएट दाखिल कर दी है। कर्मचारियों की ओर से दाखिल कैविएट में आग्रह किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट यदि इस मामले में कोई सुनवाई या आदेश करता है तो उससे पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।

DA को लेकर कर्मचारियों और पंजाब सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि वे अपने वैधानिक और लंबित वित्तीय अधिकारों की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया गया है। अब हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के फैसले के बाद मामला राज्य की अदालत से निकलकर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचने की स्थिति में आ गया है।

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, उन्होंने इस मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के साथ-साथ डबल बेंच में भी जीत हासिल की है। दोनों स्तरों पर उनके पक्ष में फैसला आने के बाद कर्मचारी सरकार से आदेश लागू करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, अब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है।

सरकार के इस रुख से कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ सकती है। पहले से ही विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज करने की रणनीति तैयार कर ली है।

रविवार को लुधियाना में कर्मचारी संगठनों के सांझा मोर्चा की बैठक हुई। बैठक में सरकार के साथ चल रहे विवाद और आंदोलन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठनों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को कर्मचारियों पर कार्रवाई से संबंधित पत्र वापस लेने के लिए 7 सितंबर तक का समय दिया है।

कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने 7 सितंबर तक यह पत्र वापस नहीं लिया तो 8 सितंबर को कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जाने का फैसला करेंगे। इसके बाद भी यदि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की चेतावनी दी गई है।

कर्मचारी संगठनों ने 12 और 13 सितंबर को पंजाब सरकार के मंत्रियों के आवासों का घेराव करने का भी ऐलान किया है। संगठन नेताओं का कहना है कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में कर्मचारियों ने अपने आंदोलन के लिए एक अलग अभियान की घोषणा भी की। इस अभियान को ‘मुख्यमंत्री की चंडीगढ़ सचिवालय से गांव सतोज की वापसी’ नाम दिया गया है। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि इस अभियान के जरिए वे मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ अपना राजनीतिक और कर्मचारी आंदोलन आगे बढ़ाएंगे।

संगठनों के नेताओं का कहना है कि अभियान का उद्देश्य मुख्यमंत्री को यह संदेश देना है कि कर्मचारियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत और समाधान के बजाय कार्रवाई की चेतावनी दे रही है। उनके अनुसार, कर्मचारियों को डराने या दबाव में लाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

DA विवाद के अलावा कर्मचारी संगठनों की ओर से पुरानी पेंशन योजना सहित कई अन्य मांगें भी उठाई जाती रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को उनके वित्तीय और सेवा संबंधी मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

कर्मचारी नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से यदि आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है तो इसका विरोध और तेज किया जाएगा। इसी संदर्भ में 7 सितंबर तक कार्रवाई संबंधी पत्र वापस लेने की मांग रखी गई है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सामूहिक अवकाश का निर्णय सरकार के लिए एक स्पष्ट चेतावनी होगा। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार ने कदम नहीं उठाया तो बड़ी संख्या में कर्मचारी सामूहिक रूप से छुट्टी लेकर आंदोलन में शामिल होंगे। इसके बाद मंत्रियों के आवासों के घेराव के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

इस बीच सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला मामले को कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण बना रहा है। हाईकोर्ट के सिंगल और डबल बेंच के फैसलों के बाद अब सर्वोच्च अदालत में सरकार की चुनौती पर कर्मचारियों की ओर से भी अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है।

कर्मचारी संगठनों द्वारा दाखिल कैविएट का मकसद यही है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिका पर एकतरफा आदेश न हो। कर्मचारी चाहते हैं कि अदालत कोई अंतरिम या अन्य आदेश जारी करने से पहले उनकी दलीलें भी सुने।

सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ते टकराव का असर आने वाले दिनों में पंजाब के सरकारी कामकाज पर भी पड़ सकता है। यदि कर्मचारी सामूहिक अवकाश और मंत्रियों के आवासों के घेराव जैसे फैसलों को लागू करते हैं तो सरकार के सामने प्रशासनिक स्तर पर चुनौती खड़ी हो सकती है।

कर्मचारी नेताओं ने अपने आंदोलन को केवल DA के मुद्दे तक सीमित नहीं रखने के संकेत भी दिए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा और जब तक समाधान नहीं निकलता, आंदोलन जारी रहेगा।

लुधियाना की बैठक में कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को जमीनी स्तर पर और व्यापक बनाने की रणनीति पर भी चर्चा की। नेताओं ने कर्मचारियों से एकजुट रहने और घोषित कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।

कर्मचारी संगठन अब 7 सितंबर की समय सीमा पर सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। यदि इस अवधि में सरकार कार्रवाई संबंधी पत्र वापस नहीं लेती है तो 8 सितंबर के सामूहिक अवकाश के फैसले को लागू करने की तैयारी है। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को मंत्रियों के घरों के घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

इसी बीच कर्मचारी यूनियन के एक नेता ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बनी फिल्म को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पर एक फिल्म आने वाली है और सरकार लोगों से उसे देखने की अपील कर रही है। कर्मचारी नेता ने आंदोलन के संदर्भ में फिल्म का बहिष्कार करने का आह्वान किया।

उन्होंने कर्मचारियों और समर्थकों से फिल्म नहीं देखने की अपील करते हुए कहा कि कर्मचारी संगठन इसका बॉयकॉट करेंगे। इस बयान से कर्मचारियों का आंदोलन अब प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों के साथ राजनीतिक संदेश देने की दिशा में भी आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

फिलहाल पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव का अगला केंद्र अदालत और सड़कों दोनों पर बनता नजर आ रहा है। एक तरफ सरकार हाईकोर्ट के DA संबंधी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन के अगले चरणों की घोषणा कर दी है।

आने वाले दिनों में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली चुनौती और 31 अगस्त को हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली अनुपालन रिपोर्ट पर नजर रहेगी। वहीं कर्मचारियों की नजर सरकार के उस फैसले पर होगी कि वह 7 सितंबर तक कार्रवाई संबंधी पत्र वापस लेती है या नहीं।

यदि दोनों पक्ष अपने मौजूदा रुख पर कायम रहते हैं तो पंजाब में सरकार और सरकारी कर्मचारियों के बीच विवाद और लंबा खिंच सकता है। ऐसे में बातचीत के जरिए समाधान निकालना ही इस टकराव को और बढ़ने से रोकने का सबसे अहम रास्ता हो सकता है।