पिछले कुछ वर्षों में कार्यस्थल की परिभाषा तेजी से बदली है। एक समय था जब ऑफिस जाकर काम करना ही सामान्य माना जाता था, लेकिन कोविड-19 महामारी के बाद रिमोट वर्क और वर्क फ्रॉम होम मॉडल ने दुनिया भर में अपनी मजबूत जगह बना ली। आज लाखों कर्मचारी अपने घरों से ही ऑफिस का काम संभाल रहे हैं। कई लोगों के लिए यह व्यवस्था सुविधाजनक साबित हुई है, क्योंकि इससे यात्रा का समय बचता है और परिवार के साथ अधिक समय बिताने का अवसर मिलता है। हालांकि अब एक नई रिसर्च ने इस व्यवस्था के दूसरे पहलू को उजागर किया है, जो चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक घर से काम करना लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कार्यशैली कर्मचारियों में सामाजिक दूरी बढ़ाने के साथ-साथ अकेलेपन और अवसाद जैसी समस्याओं को भी जन्म दे रही है।
मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ रहा दबाव
प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल साइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि लगातार रिमोट मोड में काम करने वाले लोगों में सामाजिक संपर्क कम होता जा रहा है। जब कर्मचारी नियमित रूप से अपने सहकर्मियों से नहीं मिलते, तो उनके बीच होने वाली सामान्य बातचीत और मानवीय जुड़ाव धीरे-धीरे खत्म होने लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफिस का माहौल केवल काम करने की जगह नहीं होता, बल्कि यह सामाजिक संवाद का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है। सहकर्मियों से बातचीत, टीम मीटिंग्स, एक साथ भोजन करना और दैनिक बातचीत मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। वर्क फ्रॉम होम में ये सभी अवसर काफी सीमित हो जाते हैं।
13 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण
इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 2011 से 2024 तक के सर्वेक्षणों का विस्तृत अध्ययन किया। इसमें लगभग पांच लाख अमेरिकी नागरिकों के आंकड़ों को शामिल किया गया। विशेष बात यह रही कि कोविड महामारी के दौरान के वर्षों 2020 और 2021 को विश्लेषण से बाहर रखा गया, ताकि महामारी की असामान्य परिस्थितियों का असर परिणामों पर न पड़े।
अध्ययन में विभिन्न प्रकार के पेशों को शामिल किया गया। कुछ नौकरियां ऐसी थीं जिन्हें किसी भी स्थान से किया जा सकता था, जबकि कुछ कार्य ऐसे थे जिनके लिए कर्मचारियों की ऑफिस में मौजूदगी आवश्यक थी। दोनों समूहों के व्यवहार और मानसिक स्थिति की तुलना के बाद कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए।
घर से काम करने वालों में बढ़ा अकेलापन
रिसर्च के दौरान यह पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से घर से काम कर रहे थे, वे अपने कार्यदिवस का बड़ा हिस्सा अकेले बिताते थे। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 58 प्रतिशत कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि वे काम के दौरान कई घंटे बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय संपर्क के रहते हैं।
इसके अलावा लगभग 72 प्रतिशत लोगों ने बताया कि कई बार उनका पूरा दिन किसी व्यक्ति से आमने-सामने मिले बिना ही गुजर जाता है। यह स्थिति विशेष रूप से उन कर्मचारियों में अधिक देखी गई जो अकेले रहते हैं या जिनके परिवार के सदस्य दिनभर घर पर मौजूद नहीं रहते।
शोधकर्ताओं के अनुसार, लगातार ऐसी जीवनशैली अपनाने से व्यक्ति सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस करने लगता है। समय के साथ यह भावनात्मक दूरी मानसिक तनाव और अवसाद का कारण बन सकती है।
इलाज लेने के मामलों में भी बढ़ोतरी
अध्ययन में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। जिन लोगों ने लंबे समय तक रिमोट मोड में काम किया, उनमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता लेने के मामले अपेक्षाकृत अधिक पाए गए। शोधकर्ताओं ने देखा कि इस वर्ग के लोगों में काउंसलिंग, थेरेपी और मानसिक स्वास्थ्य उपचार की आवश्यकता अधिक महसूस की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब व्यक्ति नियमित सामाजिक संपर्क से दूर हो जाता है, तो उसके लिए भावनात्मक चुनौतियों से निपटना कठिन हो सकता है। ऑफिस में मौजूद सहकर्मियों से मिलने वाला सहयोग और संवाद कई बार तनाव कम करने में मदद करता है, जबकि घर से काम करने वालों को यह सहारा कम मिल पाता है।
सामाजिक गतिविधियों से भी बढ़ रही दूरी
रिसर्च में यह भी पाया गया कि केवल कार्यस्थल पर ही नहीं, बल्कि निजी जीवन में भी कई लोग सामाजिक मेलजोल से दूरी बनाने लगे हैं। घर से काम करने वाले कर्मचारियों में दोस्तों और परिचितों से मिलने-जुलने की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत कम देखी गई।
शोधकर्ताओं का मानना है कि जब व्यक्ति लंबे समय तक घर के वातावरण में सीमित रहता है, तो उसकी सामाजिक सक्रियता धीरे-धीरे कम हो सकती है। इससे नए रिश्ते बनाने और पुराने संबंधों को मजबूत बनाए रखने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
फिर भी लोग क्यों पसंद कर रहे हैं वर्क फ्रॉम होम?
दिलचस्प बात यह है कि इन संभावित समस्याओं के बावजूद अधिकांश कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम को पसंद करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह सुविधा मानी जा रही है। लोगों को रोजाना यात्रा नहीं करनी पड़ती, समय की बचत होती है और कई मामलों में काम के घंटे अधिक लचीले हो जाते हैं।
हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश लोग इस व्यवस्था के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह नहीं समझते। यही कारण है कि वे इसके नकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति घर से काम कर रहा है तो उसे नियमित सामाजिक संपर्क बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना, सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेना और समय-समय पर ऑफिस विजिट करना लाभदायक हो सकता है।
इसके अलावा हाइब्रिड वर्क मॉडल को भी एक संतुलित विकल्प माना जा रहा है, जिसमें कर्मचारी कुछ दिन ऑफिस और कुछ दिन घर से काम करते हैं। इससे सुविधा और सामाजिक जुड़ाव दोनों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
क्या कहती है यह रिसर्च?
इस अध्ययन का मुख्य संदेश यह है कि वर्क फ्रॉम होम केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि इसके मानसिक और सामाजिक प्रभावों को भी गंभीरता से समझने की जरूरत है। घर से काम करने की व्यवस्था ने आधुनिक कार्य संस्कृति को नई दिशा दी है, लेकिन इसके साथ आने वाली चुनौतियों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को ऐसे उपाय अपनाने चाहिए जो कार्यक्षमता के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जुड़ाव को भी मजबूत बनाए रखें। तभी रिमोट वर्क का लाभ वास्तव में संतुलित और टिकाऊ साबित हो सकेगा।
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