दिल को अक्सर प्यार, भावनाओं और एहसासों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन शरीर के अंदर इसकी भूमिका इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह दिन-रात बिना रुके पूरे शरीर में खून पहुंचाने का काम करता है। हम सो रहे हों या काम कर रहे हों, तनाव में हों या आराम कर रहे हों, दिल लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाता रहता है। इसके बावजूद दिल की सेहत को लेकर लापरवाही आम है।
आज की बदलती जीवनशैली में घंटों एक जगह बैठे रहना, देर रात तक मोबाइल और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल करना, नींद पूरी न लेना, बाहर का खाना खाना, तनाव में रहना और शारीरिक गतिविधि से दूरी बनाना सामान्य होता जा रहा है। इन आदतों का असर तुरंत दिखाई नहीं देगा, लेकिन लंबे समय में ये ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, वजन और कोलेस्ट्रॉल जैसे हार्ट रिस्क फैक्टर्स को बढ़ा सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कार्डियोवस्कुलर डिजीज के कई महत्वपूर्ण जोखिम ऐसे हैं, जिन पर जीवनशैली में बदलाव के जरिए नियंत्रण पाया जा सकता है। अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का सेवन और शराब का हानिकारक इस्तेमाल इनमें प्रमुख हैं।
लगातार बैठे रहना भी बन सकता है हार्ट के लिए खतरा
ऑफिस का काम हो या घर पर मोबाइल और टीवी देखने की आदत, लंबे समय तक बैठे रहना शरीर की सक्रियता को काफी कम कर देता है। घंटों तक लगातार बैठे रहने से कैलोरी खर्च कम होगा और समय के साथ वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। इसका असर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और शरीर में फैट के स्तर पर भी पड़ सकता है।
2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में लंबे समय तक बैठे रहने और हार्ट फेल्योर सहित कुछ कार्डियोवस्कुलर जोखिमों के बीच संबंध देखा गया था। इसका मतलब यह नहीं होगा कि हर व्यक्ति में लंबे समय तक बैठने से सीधे हार्ट डिजीज हो जाएगी, लेकिन लगातार कम सक्रिय रहने की आदत को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होगा।
यहां एक और बात महत्वपूर्ण है। रोजाना 30 से 60 मिनट एक्सरसाइज करने के बावजूद अगर कोई व्यक्ति दिन के बाकी 10-12 घंटे लगभग लगातार बैठा रहता है, तो उसे पूरे दिन की गतिविधि पर भी ध्यान देना होगा। बीच-बीच में उठकर चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और छोटे-छोटे एक्टिव ब्रेक लेना मददगार हो सकता है।
देर रात तक मोबाइल चलाने से बिगड़ सकती है नींद
मोबाइल की स्क्रीन पर देर रात तक समय बिताना आज की सबसे आम आदतों में शामिल है। इसका असर सिर्फ आंखों या नींद पर नहीं, बल्कि पूरी दिनचर्या पर पड़ सकता है। देर रात तक स्क्रीन देखने से सोने का समय आगे खिसक सकता है और नींद की अवधि या गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
अगर लंबे समय तक नींद पूरी नहीं होगी, तो शरीर में तनाव, ब्लड प्रेशर, वजन और ब्लड शुगर से जुड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नींद के दौरान शरीर और कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को आराम का समय मिलता है। इसलिए लगातार कम या खराब नींद दिल की सेहत के लिए अच्छी स्थिति नहीं मानी जाएगी।
हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाना, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और पर्याप्त नींद लेना हार्ट हेल्थ के लिए उपयोगी लाइफस्टाइल बदलाव हो सकते हैं।
बाहर का खाना बढ़ा सकता है कई हार्ट रिस्क फैक्टर्स
फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड में अक्सर नमक, अतिरिक्त चीनी और अस्वास्थ्यकर फैट की मात्रा ज्यादा हो सकती है। अगर इस तरह का खाना नियमित रूप से लिया जाएगा, तो वजन बढ़ने के साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर भी असर पड़ सकता है।
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और संतुलित मात्रा में प्रोटीन शामिल करना जरूरी होगा। ज्यादा नमक, अतिरिक्त चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन को सीमित करना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
बाहर का खाना पूरी तरह बंद करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होगा, लेकिन रोजाना इसे मुख्य भोजन बना लेना हार्ट हेल्थ के लिहाज से सही आदत नहीं मानी जाएगी।
शरीर में पानी की कमी को भी नजरअंदाज न करें
पर्याप्त पानी पीना शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। डिहाइड्रेशन होने पर शरीर के सामान्य सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में दिल को शरीर में रक्त संचार बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।
हालांकि, सिर्फ ज्यादा पानी पीने से हार्ट डिजीज से बचाव की गारंटी नहीं होगी। पानी की जरूरत व्यक्ति की उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग होगी। इसलिए शरीर को पर्याप्त रूप से हाइड्रेट रखना जरूरी होगा, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सही तरीका नहीं है।
लगातार तनाव और गुस्सा भी डाल सकते हैं दिल पर दबाव
काम का दबाव, आर्थिक चिंता, पारिवारिक तनाव और लगातार गुस्सा या चिड़चिड़ापन सिर्फ मानसिक स्थिति को प्रभावित नहीं करते। लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव हो सकते हैं।
तनाव के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और नींद, खान-पान तथा शारीरिक गतिविधि भी प्रभावित हो सकती है। 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में गुस्से के बाद ब्लड वेसल्स के सामान्य रूप से फैलने की क्षमता में अस्थायी कमी देखी गई थी। हालांकि, किसी एक अध्ययन के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि गुस्सा अकेले हार्ट डिजीज का कारण है।
इसलिए तनाव को नियंत्रित करने के लिए नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, रिलैक्सेशन और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।
शराब और धूम्रपान से बढ़ सकता है हार्ट डिजीज का जोखिम
शराब का ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ा सकता है। लंबे समय तक अत्यधिक शराब लेने से हार्ट की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। कुछ लोगों में ज्यादा शराब का संबंध एट्रियल फाइब्रिलेशन जैसी अनियमित हार्ट रिदम से भी हो सकता है।
वहीं धूम्रपान हार्ट और ब्लड वेसल्स के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। तंबाकू का सेवन ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और हार्ट अटैक समेत कई कार्डियोवस्कुलर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। CDC भी धूम्रपान को हार्ट डिजीज के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल करता है। इसलिए दिल की सेहत सुधारने के लिए धूम्रपान और तंबाकू छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक होगा।
क्या होती है हार्ट एज?
हार्ट हेल्थ को समझने के लिए ‘हार्ट एज’ की अवधारणा भी इस्तेमाल की जाती है। यह वास्तविक जैविक उम्र नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के कार्डियोवस्कुलर रिस्क फैक्टर्स को उसकी उम्र के संदर्भ में समझाने का तरीका है।
CDC के अनुसार हार्ट एज का आकलन ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, डायबिटीज, वजन और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर किया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति की वास्तविक उम्र 40 साल है, लेकिन उसके कई रिस्क फैक्टर्स ज्यादा हैं, तो उसकी अनुमानित हार्ट एज वास्तविक उम्र से अधिक हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को डराना नहीं, बल्कि यह समझाना होगा कि किन जोखिमों को कम किया जा सकता है।
इन संकेतों पर रखें नजर
हार्ट हेल्थ सिर्फ सीने में दर्द होने या न होने से तय नहीं होगी। ब्लड प्रेशर बढ़ना, कोलेस्ट्रॉल का असंतुलित होना, वजन बढ़ना, कमर का आकार बढ़ना, ब्लड शुगर का बढ़ना और शारीरिक गतिविधि की कमी ऐसे संकेत हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी होगा।
परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास होने पर भी व्यक्ति को अपने जोखिम कारकों की नियमित जांच करानी चाहिए। उम्र और आनुवंशिक इतिहास जैसे कुछ कारक बदले नहीं जा सकते, लेकिन धूम्रपान, डाइट, शारीरिक गतिविधि और वजन जैसे कई जोखिमों पर काम किया जा सकता है।
अगले 10 साल के लिए तीन आदतें बदलना सबसे जरूरी
अगर कोई व्यक्ति अपनी हार्ट हेल्थ को लंबे समय तक बेहतर रखना चाहता है, तो उसे एक साथ बहुत सारे बदलाव करने के बजाय कुछ जरूरी आदतों पर लगातार काम करना चाहिए।
सबसे पहले धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना जरूरी होगा। इसके बाद नियमित फिजिकल एक्टिविटी को रोज की दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। तीसरा बड़ा बदलाव डाइट में करना होगा। जंक फूड, अत्यधिक नमक, अतिरिक्त चीनी और अनहेल्दी फैट को कम करके संतुलित भोजन को प्राथमिकता देनी होगी।
इसके साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन की समय-समय पर जांच कराना भी जरूरी होगा।
छोटी आदतों से बनेगा लंबे समय का फर्क
दिल की बीमारी कई बार एक दिन में पैदा होने वाली समस्या नहीं होगी। इसके पीछे वर्षों तक बनी रहने वाली आदतें और कई रिस्क फैक्टर्स एक साथ काम कर सकते हैं। इसलिए हार्ट हेल्थ के लिए किसी एक दिन या एक एक्सरसाइज पर निर्भर रहने के बजाय रोज की पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी होगा।
दिन में ज्यादा चलना, लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना, पर्याप्त नींद लेना, संतुलित खाना, तनाव को नियंत्रित करना, धूम्रपान से दूर रहना और नियमित हेल्थ चेकअप कराना ऐसे कदम हैं, जिन्हें लंबे समय तक अपनाया जा सकता है।
अगर सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी, बेहोशी या गंभीर असहजता जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
वर्ल्ड हार्ट डे का संदेश सिर्फ इतना नहीं है कि दिल की बीमारी से बचना है। असली जरूरत यह समझने की है कि दिल की सेहत रोज की जिंदगी से जुड़ी है। आज की छोटी और लगातार अच्छी आदतें आने वाले वर्षों में हार्ट हेल्थ पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
(Photo : AI Generated)




