पंचकूला में संविधान पखवाड़े के तहत जनप्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन, ओम बिरला ने किया उद्घाटन; भूपेंद्र हुड्डा बोले- जनता की बात सुनना, जवाब देना और जवाबदेही निभाना हर प्रतिनिधि की जिम्मेदारी
पंचकूला। हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि विकसित हरियाणा का सपना तभी साकार हो सकता है, जब विकास की प्रक्रिया में समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके लिए एक जागरूक और जिम्मेदार समाज तैयार करना जरूरी है। जनप्रतिनिधि इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि आम लोग उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हैं और उनके व्यवहार तथा कार्यशैली से प्रेरणा लेते हैं। ऐसे में प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने आचरण और कामकाज के माध्यम से समाज के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्हें संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और जनता की भागीदारी बढ़ाने का संकल्प लेना होगा।
हरविन्द्र कल्याण सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में प्रदेश के वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा के राजनीतिक और विधायी सफर पर विचार-विमर्श करने के साथ-साथ प्रदेश के भविष्य के विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सामूहिक दृष्टिकोण तैयार करना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा सहित प्रदेश के मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
छह दशक की यात्रा से सीख लेकर भविष्य की दिशा तय करने का अवसर
विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि हरियाणा के इतिहास में यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि प्रदेश के गठन के बाद से अब तक सार्वजनिक जीवन में योगदान देने वाले वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं। यह सम्मेलन केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि पिछले छह दशकों के अनुभवों के आधार पर आने वाले समय के लिए विकास की दिशा तय करने का भी मंच है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में हरियाणा अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। उस समय प्रदेश के पास संसाधन सीमित थे और विकास के रास्ते में अनेक चुनौतियां थीं। नए राज्य के सामने प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य थे। उस दौर में लोगों के सामने यह सवाल था कि सीमित संसाधनों के बावजूद हरियाणा किस तरह आगे बढ़ेगा।
कल्याण ने कहा कि प्रदेश के बुजुर्गों के परिश्रम, किसानों और मजदूरों की मेहनत, उद्यमियों के योगदान तथा समय-समय पर मिले कुशल नेतृत्व ने हरियाणा को नई पहचान दिलाई। आज प्रदेश ने देश के मानचित्र पर अपनी अलग जगह बनाई है। खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर राज्य का गौरव बढ़ाया है, वहीं वीर जवानों ने अपने साहस और बलिदान से प्रदेश का सम्मान ऊंचा किया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की विकास यात्रा किसी एक व्यक्ति या सरकार के प्रयासों का परिणाम नहीं है। इसमें समाज के विभिन्न वर्गों, जनप्रतिनिधियों और संस्थाओं का योगदान रहा है। किसानों ने कृषि क्षेत्र में, मजदूरों ने औद्योगिक और निर्माण गतिविधियों में तथा उद्यमियों ने रोजगार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन सभी के सामूहिक प्रयासों से प्रदेश ने अपनी पहचान मजबूत की है।
पुराने जनप्रतिनिधियों के अनुभव नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने अपने संघर्ष, अनुभव और परिश्रम से हरियाणा की प्रगति में योगदान दिया है। विधानसभा में बहस और चर्चा के माध्यम से उन्होंने जनता की समस्याओं को उठाया, नीतियों के निर्माण में भागीदारी की और कानून बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। कई बार कठिन परिस्थितियों में जनप्रतिनिधियों ने समाज को दिशा देने का काम भी किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में वरिष्ठ जनप्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे नए और युवा विधायकों को सीखने का अवसर मिलेगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनुभव का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है। पुराने जनप्रतिनिधियों ने अपने कार्यकाल के दौरान जिन चुनौतियों का सामना किया, उनसे मिली सीख वर्तमान जनप्रतिनिधियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
कल्याण ने कहा कि विधायिका केवल कानून बनाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी करने के साथ-साथ अपने निर्वाचन क्षेत्रों में भी लोगों से निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए।
विधायिका को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता पर जोर
हरविन्द्र कल्याण ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का स्वागत करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश के विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं और विधायिकाओं को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग विधानमंडलों के बीच अच्छी कार्यप्रणालियों और नए प्रयोगों को साझा करने से संस्थाओं को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा के मार्गदर्शन और सहयोग से हरियाणा विधानसभा में भी संसदीय प्रणाली को मजबूत करने तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां शुरू की गई हैं। विधानसभा की ओर से जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं।
कल्याण ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए केवल जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षित होना पर्याप्त नहीं है। आम नागरिकों को भी संसदीय व्यवस्था, संविधान और अपने अधिकारों तथा कर्तव्यों की जानकारी होनी चाहिए। जब नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझते हैं, तभी वे शासन व्यवस्था में प्रभावी भागीदारी कर सकते हैं। उन्होंने इन प्रयासों में सहयोग के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का विशेष आभार व्यक्त किया।
संविधान पखवाड़े में होंगे कई जागरूकता कार्यक्रम
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि संविधान पखवाड़े के दौरान प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य आमजन को संविधान के मूल सिद्धांतों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से यह भी समझने का प्रयास किया जाएगा कि शासन और विकास की प्रक्रिया में आम नागरिकों की भागीदारी किस तरह बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने बताया कि संविधान पखवाड़े के तहत युवा संसद का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा संविधान दिवस के अवसर पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र भी आयोजित होगा। महिलाओं तथा पंचायतों और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग सम्मेलन आयोजित करने की योजना भी है।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं, युवाओं और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा। पंचायत और स्थानीय निकाय लोकतंत्र की बुनियादी इकाइयां हैं। गांवों और शहरों में विकास योजनाओं को लागू करने तथा लोगों की समस्याओं का समाधान करने में इन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
कल्याण ने कहा कि विकसित हरियाणा के निर्माण के लिए जरूरी है कि विकास योजनाओं में लोगों की जरूरतों और सुझावों को शामिल किया जाए। प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने के साथ उन्हें विकास की प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।
समान मताधिकार संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक: भूपेंद्र हुड्डा
सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का स्वागत करते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर अपने विचार रखने और एक-दूसरे के अनुभव सुनने का अवसर दिया है।
हुड्डा ने संविधान के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि संविधान लागू होने से पहले देश में प्रत्येक नागरिक को समान रूप से मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं था। उस समय मतदान का अधिकार आय, जमीन की मिल्कियत और शिक्षा जैसी निर्धारित योग्यताओं पर निर्भर करता था। आजादी के बाद संविधान ने सभी नागरिकों को समान मताधिकार प्रदान किया। अब व्यक्ति गरीब हो या अमीर, उसकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, प्रत्येक नागरिक को समान वोट देने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि समान मताधिकार भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस अधिकार ने देश के प्रत्येक नागरिक को शासन व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर दिया है। लोकतंत्र की मजबूती इसी बात पर निर्भर करती है कि नागरिकों के अधिकारों का सम्मान हो और जनप्रतिनिधि जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें।
जनता की बात सुनना और जवाबदेही निभाना जरूरी
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने का दायरा केवल सांसदों और विधायकों तक सीमित नहीं है। पंच, सरपंच, पार्षद, विधायक और सांसद सभी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह जनता की अपेक्षाओं को समझे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करे।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों के कामकाज की तीन प्रमुख कसौटियां बताते हुए कहा कि जनता की बात सुनना, उसकी बात का जवाब देना और अपने काम के प्रति जवाबदेही निभाना हर प्रतिनिधि का दायित्व है। जनता अपने प्रतिनिधियों से उम्मीद करती है कि वे उसकी समस्याओं को गंभीरता से समझेंगे और उनके समाधान के लिए उचित कदम उठाएंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कानून और नीतियां बनाते समय आम लोगों की जरूरतों तथा अपेक्षाओं को ध्यान में रखना चाहिए। ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिसमें नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और उनकी समस्याओं का प्रभावी समाधान हो सके।
हुड्डा ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष की विचारधारा अलग-अलग हो सकती है। दोनों के बीच नीतियों और मुद्दों पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जनता का हित और प्रदेश की प्रगति दोनों का साझा लक्ष्य होना चाहिए। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद जनहित के मुद्दों पर मिलकर काम करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।
कई वरिष्ठ नेताओं ने साझा किए विचार
सम्मेलन में प्रदेश के अनेक वरिष्ठ नेताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। इनमें पूर्व मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा, अशोक कुमार अरोड़ा, ओमप्रकाश धनखड़, गीता भुक्कल, प्रो. संपत सिंह, किरण चौधरी और करण सिंह दलाल शामिल रहे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, कंवर पाल और ज्ञान चंद गुप्ता ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधायक सावित्री जिंदल, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष संतोष यादव, पूर्व विधायक लहरी सिंह और कैलाश चंद्र शर्मा ने भी अपने विचार रखे। मुख्य सचेतक रामकुमार कश्यप, पूर्व मंत्री प्रो. छत्तर पाल और डॉ. शिवशंकर भारद्वाज सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
सम्मेलन में अलग-अलग समय पर प्रदेश की राजनीति और विधायी व्यवस्था में योगदान देने वाले नेताओं की मौजूदगी ने इसे अनुभव साझा करने का मंच बनाया। वरिष्ठ नेताओं के विचारों के माध्यम से हरियाणा की छह दशक की राजनीतिक यात्रा, विधानसभा की परंपराओं और लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम का व्यापक संदेश यही रहा कि हरियाणा की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद, संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता तथा समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। अतीत के अनुभवों से सीख लेकर और वर्तमान की चुनौतियों को समझते हुए सभी जनप्रतिनिधियों को प्रदेश के भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।




