हरियाणा सरकार ने राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से वर्ष 2047 को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करना नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे शहर विकसित करना है जो आधुनिक, तकनीक आधारित, पर्यावरण के अनुकूल और नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक हों।
इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक में कई अहम निर्णय लिए। बैठक में जल संरक्षण, ठोस कचरा प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस, पेयजल आपूर्ति, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, नई ग्रीनफील्ड सिटी और नागरिक सेवाओं के आधुनिकीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है, उनके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहरों को केवल आबादी के हिसाब से नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित करना जरूरी है। इसी सोच के तहत कई नई योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
वर्ष 2047 को ध्यान में रखकर तैयार हो रही विकास रणनीति
भारत वर्ष 2047 में अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा। केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारें इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक विकास योजनाएं तैयार कर रही हैं। हरियाणा सरकार भी इसी दिशा में अपने शहरों को आधुनिक स्वरूप देने की योजना पर काम कर रही है।
सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में प्रदेश के शहर बेहतर आधारभूत सुविधाओं, स्वच्छ वातावरण, मजबूत जल प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और टिकाऊ विकास मॉडल के साथ देश के अग्रणी शहरी क्षेत्रों में शामिल हों।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय सीमा के भीतर किया जाए और प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
250 वर्ग गज या उससे बड़े मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग होगी अनिवार्य
बैठक में भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट को गंभीर विषय माना गया। कई शहरी क्षेत्रों में तेजी से घटते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
अब शहरी क्षेत्रों में 250 वर्ग गज या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि वर्षा जल का संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। यदि प्रत्येक बड़े भवन में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली प्रभावी रूप से लागू होती है तो इससे भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने में काफी सहायता मिलेगी।
इसके अलावा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए ताकि रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम वास्तव में कार्यशील रहे।
जल संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
हरियाणा के कई हिस्सों में पिछले कुछ वर्षों से भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। विशेषज्ञ लंबे समय से वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते रहे हैं।
सरकार की नई नीति का उद्देश्य केवल कानूनी प्रावधान बनाना नहीं बल्कि नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है।
यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में भूजल पुनर्भरण में सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है। इससे भविष्य में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना भी बढ़ेगी।
गुरुग्राम और फरीदाबाद में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति की तैयारी
शहरी क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक नियमित पेयजल आपूर्ति भी रही है। इसे देखते हुए सरकार ने गुरुग्राम और फरीदाबाद में पायलट परियोजना के रूप में 24 घंटे स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि इस परियोजना की टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए ताकि कार्य समय पर शुरू हो सके।
यदि योजना सफल रहती है तो लोगों को पूरे दिन नियमित जलापूर्ति मिल सकेगी और घरों में अलग से बूस्टर पंप लगाने की आवश्यकता भी कम होगी।
इससे पानी की बर्बादी पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भविष्य में अन्य शहरों तक बढ़ सकता है दायरा
सरकार का उद्देश्य इस योजना को केवल दो शहरों तक सीमित रखना नहीं है।
यदि गुरुग्राम और फरीदाबाद में यह मॉडल सफल साबित होता है तो भविष्य में प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी प्रकार की 24×7 पेयजल व्यवस्था लागू की जा सकती है।
यह शहरी आधारभूत सुविधाओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
नगर निगम सेवाओं के लिए आएगा इंटीग्रेटेड सुपर ऐप
डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत बनाने के लिए सरकार एक नया इंटीग्रेटेड सुपर ऐप विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है।
इस ऐप को नागरिकों की प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ा जाएगा।
इसके माध्यम से लोग विभिन्न नगर निगम सेवाओं का लाभ ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए नगर निगम कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
ऑनलाइन मिल सकेंगी कई नागरिक सेवाएं
सुपर ऐप के माध्यम से भविष्य में विभिन्न प्रकार की नगर निगम सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे आवेदन प्रक्रिया सरल होगी।
सेवाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी।
समय की बचत होगी।
डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे।
ऑनलाइन निगरानी भी आसान होगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल सेवाओं से प्रशासन अधिक जवाबदेह और नागरिक-अनुकूल बनेगा।
केएमपी एक्सप्रेसवे के पास विकसित होगी नई ‘नमो सिटी’
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक नई ग्रीनफील्ड सिटी विकसित करने की योजना भी रही।
सरकार लगभग 5,000 एकड़ क्षेत्र में केएमपी एक्सप्रेसवे के निकट “नमो सिटी” विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
यह शहर आधुनिक शहरी नियोजन और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के सिद्धांतों पर आधारित होगा।
यहां आवासीय, व्यावसायिक तथा औद्योगिक गतिविधियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
निवेश और रोजगार पर रहेगा विशेष जोर
सरकार का मानना है कि नमो सिटी केवल नया शहर नहीं होगी बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र भी बन सकती है।
यदि परियोजना सफल रहती है तो—
- नए निवेश आकर्षित होंगे।
- उद्योगों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- आसपास के क्षेत्रों का विकास तेज होगा।
- आधुनिक शहरी नियोजन को बढ़ावा मिलेगा।
पांच शहरों में वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाएं
ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, यमुनानगर और अंबाला में प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं की समीक्षा की।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
इन संयंत्रों में शहरों से निकलने वाले ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर ऊर्जा और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
कचरा प्रबंधन में आ सकता है बड़ा बदलाव
यदि वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाएं सफल रहती हैं तो कई लाभ मिल सकते हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- लैंडफिल पर दबाव कम होगा।
- शहरों में कचरे के बड़े ढेर कम होंगे।
- स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी।
- ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा।
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार इसे स्वच्छ और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
बैठक के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि भविष्य के शहर केवल बड़े भवनों और चौड़ी सड़कों तक सीमित नहीं होने चाहिए।
जल संरक्षण, हरित क्षेत्र, ऊर्जा दक्षता, कचरा प्रबंधन और संसाधनों के संतुलित उपयोग को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
इसी सोच के तहत सरकार विभिन्न परियोजनाओं को आपस में जोड़कर एक दीर्घकालिक शहरी विकास मॉडल तैयार कर रही है।
समयबद्ध क्रियान्वयन पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत परियोजनाओं में अनावश्यक देरी बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करे और नियमित समीक्षा के माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति सुनिश्चित करे।
सरकार चाहती है कि नागरिकों को योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द मिलना शुरू हो।
नागरिक सुविधाओं में होगा व्यापक सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की घोषित योजनाएं निर्धारित समय के भीतर लागू होती हैं तो हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
24 घंटे की पेयजल आपूर्ति से लोगों की दैनिक समस्याएं कम होंगी।
डिजिटल सुपर ऐप से सरकारी सेवाएं अधिक आसान और पारदर्शी बनेंगी।
नमो सिटी जैसी परियोजनाएं निवेश और रोजगार को गति देंगी।
वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि विजन-2047 के तहत तैयार की जा रही यह व्यापक रणनीति हरियाणा के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि सभी परियोजनाओं का सफल क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं, मजबूत आधारभूत ढांचा, आधुनिक डिजिटल सेवाएं और अधिक टिकाऊ विकास मॉडल का लाभ मिलने की उम्मीद है।




