सर्वाइकल दर्द को हल्के में न लें! आपकी रोजमर्रा की ये 5 आदतें बन सकती हैं गर्दन की सबसे बड़ी दुश्मन, जानिए बचाव के आसान तरीके

सर्वाइकल दर्द को हल्के में न लें! आपकी रोजमर्रा की ये 5 आदतें बन सकती हैं गर्दन की सबसे बड़ी दुश्मन, जानिए बचाव के आसान तरीके

आज की आधुनिक जीवनशैली ने लोगों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। ज्यादातर लोग दिन का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल स्क्रीन के सामने बिताते हैं। लगातार कई घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठे रहना, चलते-फिरते भी मोबाइल का इस्तेमाल करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी आने के कारण गर्दन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं परेशानियों में सबसे आम समस्या सर्वाइकल पेन या गर्दन के दर्द की है। पहले जहां यह परेशानी मुख्य रूप से बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती थी, वहीं अब युवाओं और ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारियों में भी इसके मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया जाए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।

दरअसल, गर्दन केवल सिर को संभालने का काम नहीं करती, बल्कि यह रीढ़ की हड्डी का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। गर्दन के अंदर मौजूद सर्वाइकल स्पाइन सात छोटी-छोटी हड्डियों से मिलकर बनी होती है। इन हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क झटकों को कम करती हैं और गर्दन को आसानी से अलग-अलग दिशाओं में घुमाने में मदद करती हैं। जब लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने, अधिक दबाव पड़ने या अन्य कारणों से इन हड्डियों, डिस्क और आसपास की नसों पर असर पड़ता है तो दर्द, अकड़न और खिंचाव जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। कई बार यह दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता बल्कि कंधों, बाजुओं और उंगलियों तक फैल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार आज के समय में गलत बैठने की आदत सर्वाइकल दर्द की सबसे बड़ी वजहों में शामिल है। ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर झुककर काम करना, लैपटॉप को नीचे रखकर लगातार स्क्रीन देखना या गर्दन को आगे की ओर झुकाकर बैठना धीरे-धीरे मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लगातार ऐसा करने से गर्दन की प्राकृतिक स्थिति बिगड़ने लगती है और दर्द की शुरुआत हो सकती है। शुरुआत में हल्की अकड़न महसूस होती है, लेकिन समय के साथ परेशानी बढ़ सकती है।

मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी इस समस्या को तेजी से बढ़ा रहा है। आज अधिकांश लोग घंटों तक गर्दन नीचे करके सोशल मीडिया, वीडियो या चैटिंग में व्यस्त रहते हैं। इस दौरान सिर का भार गर्दन पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव डालता है। यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहती है तो मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है और सर्वाइकल दर्द की आशंका कई गुना बढ़ सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ समय-समय पर मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करने और स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखने की सलाह देते हैं।

केवल बैठने की गलत आदत ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक बिना ब्रेक लिए एक ही स्थिति में बैठे रहना भी गर्दन के लिए नुकसानदायक माना जाता है। लगातार कई घंटों तक बिना उठे काम करने से मांसपेशियां कठोर होने लगती हैं और उनमें रक्त संचार भी प्रभावित होता है। इसका असर धीरे-धीरे गर्दन और कंधों में दर्द के रूप में दिखाई देता है। इसलिए काम के दौरान हर 30 से 40 मिनट में कुछ मिनट के लिए उठना, थोड़ा चलना और हल्की स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद माना जाता है।

सोने का तरीका भी सर्वाइकल की समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई लोग बहुत ऊंचा या बहुत कठोर तकिया इस्तेमाल करते हैं, जिससे पूरी रात गर्दन असामान्य स्थिति में रहती है। सुबह उठते समय गर्दन में जकड़न, दर्द या उसे घुमाने में परेशानी महसूस होना इसी का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा तकिया चुनना चाहिए जो गर्दन और रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति को बनाए रखे। सही तकिया गर्दन पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में मदद करता है।

अचानक भारी वजन उठाना या गर्दन पर चोट लगना भी सर्वाइकल दर्द की वजह बन सकता है। कई बार लोग बिना तैयारी के भारी सामान उठा लेते हैं, जिससे गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर अचानक जोर पड़ता है। इसके अलावा सड़क दुर्घटना, खेल के दौरान लगी चोट या किसी अन्य कारण से गर्दन प्रभावित होने पर भी यह समस्या विकसित हो सकती है। ऐसी स्थिति में दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सर्वाइकल दर्द के शुरुआती लक्षणों को पहचानना भी बेहद जरूरी है। शुरुआत में गर्दन में हल्का दर्द, अकड़न या थकान महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को सिर के पीछे भारीपन या लगातार सिरदर्द की शिकायत भी होती है। कई बार दर्द कंधों तक पहुंच जाता है और हाथों या उंगलियों में झनझनाहट महसूस होने लगती है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, हाथों में कमजोरी महसूस हो या सामान्य काम करने में दिक्कत आने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू स्तर पर कुछ आसान उपाय अपनाकर भी इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे पहले काम करने की सही मुद्रा अपनाना जरूरी है। कुर्सी पर पीठ सीधी रखकर बैठें और कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों की सीध में रखें। इससे गर्दन को बार-बार झुकाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरूरत पड़ने पर लैपटॉप स्टैंड या बाहरी कीबोर्ड का उपयोग किया जा सकता है।

रोजाना हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग करना भी गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। सुबह या शाम कुछ मिनट गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे घुमाने वाले व्यायाम किए जा सकते हैं। हालांकि, यदि पहले से तेज दर्द या गंभीर समस्या हो तो किसी भी व्यायाम को शुरू करने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

इसके अलावा दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, संतुलित भोजन करना और नियमित रूप से शरीर को सक्रिय रखना भी मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। लंबे समय तक बैठे रहने की बजाय बीच-बीच में टहलना और हल्की शारीरिक गतिविधि करना गर्दन और रीढ़ दोनों के लिए लाभकारी होता है।

यदि गर्दन में हल्का दर्द महसूस हो रहा है तो शुरुआती अवस्था में कुछ लोगों को हल्की सिकाई से आराम मिल सकता है। हालांकि दर्द लगातार बढ़ रहा हो, हाथों में सुन्नपन, कमजोरी या तेज झनझनाहट महसूस हो रही हो तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय तुरंत चिकित्सा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि सर्वाइकल दर्द से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे लेकिन जरूरी बदलाव करना है। सही तरीके से बैठना, मोबाइल का सीमित उपयोग, उचित तकिया चुनना, नियमित व्यायाम करना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहना जैसी आदतें अपनाकर इस समस्या के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि दर्द बार-बार लौट रहा हो या लगातार बना रहे तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।