सुक्खू का दावा- जल संसाधनों से हिमाचल बनेगा आत्मनिर्भर, 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य

सुक्खू का दावा- जल संसाधनों से हिमाचल बनेगा आत्मनिर्भर, 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य

सोलन: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश अपने जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर जल्द आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों, राजस्व बढ़ाने के प्रयासों और वित्तीय प्रबंधन के जरिए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर लगातार काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2032 तक हिमाचल प्रदेश को देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य भी रखा है।

सोलन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने संसाधनों से अतिरिक्त आय जुटाने और अनावश्यक खर्च को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की कोशिशों से राज्य को करीब 4 से 5 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि हिमाचल की आरडीजी बंद नहीं की गई होती तो प्रदेश इसी वर्ष आत्मनिर्भर बनने की स्थिति में पहुंच जाता। उन्होंने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राजस्व बढ़ाने और खर्च नियंत्रित करने पर जोर

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ समय में सरकारी संसाधनों से अधिक राजस्व जुटाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके साथ ही फिजूलखर्ची को रोकने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन के कारण करीब 4 से 5 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य के सीमित संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करना मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सुक्खू ने कहा कि सरकार उन क्षेत्रों से भी राजस्व जुटाने का प्रयास कर रही है, जहां लंबे समय से राज्य को अपेक्षित आय नहीं मिल रही थी। उन्होंने वाइल्ड फ्लावर हॉल का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले 23 वर्षों से इससे प्रदेश को कोई राशि नहीं मिल रही थी, लेकिन अब सरकार को वहां से 401 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह जेएसडब्ल्यू कंपनी से भी प्रदेश को हर साल करीब 150 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। उनके अनुसार ऐसे संसाधनों से होने वाली अतिरिक्त आय राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगी।

जल संसाधनों को बनाया आर्थिक मजबूती का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के पास जल संसाधनों की बड़ी क्षमता है और इसका लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलना चाहिए। सरकार जल विद्युत और अन्य जल संसाधनों से जुड़े मामलों में राज्य के हितों की रक्षा करने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश को अपने प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा इस्तेमाल करना होगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आर्थिक आधार मजबूत हो सके। सुक्खू के अनुसार हिमाचल के पास पर्यटन, जलविद्युत और प्राकृतिक संसाधनों के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल तत्काल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि प्रदेश की आय के स्थायी स्रोत तैयार करना है। इससे राज्य को कर्ज और बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

किशाऊ बांध से 1500 करोड़ के लाभ का दावा

मुख्यमंत्री ने किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े समझौते को हिमाचल के हित में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना से आने वाले समय में प्रदेश को करीब 1500 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त होगा।

सुक्खू ने कहा कि किशाऊ परियोजना के मामले में राज्य सरकार ने हिमाचल के हितों की रक्षा की है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार होती तो इस परियोजना में हिमाचल को उत्तराखंड जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के हितों से जुड़े बड़े प्रोजेक्टों में सरकार किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। उनके अनुसार जल संसाधनों से होने वाली आय का उचित हिस्सा हिमाचल को मिलना जरूरी है।

बीबीएमबी के 500 करोड़ के एरियर का मुद्दा

सुक्खू ने बताया कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से करीब 500 करोड़ रुपये के एरियर का मामला अभी लंबित है। उन्होंने कहा कि यह राशि मिलने से प्रदेश के वित्तीय संसाधनों को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने वाटर सैस और शानन पावर प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि इन मामलों में फैसला हिमाचल के पक्ष में आता है तो राज्य की आर्थिक स्थिति को और मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार लगातार ऐसे मामलों को आगे बढ़ा रही है जिनसे प्रदेश को दीर्घकालिक राजस्व प्राप्त हो सकता है। जल संसाधनों से जुड़े अधिकारों और वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर सरकार अपना पक्ष मजबूती से रख रही है।

पर्यटन क्षेत्र में 6 हजार करोड़ की परियोजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पर्यटन क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार ने पर्यटन को नई दिशा देने के लिए करीब 6 हजार करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन में निवेश बढ़ने से बुनियादी ढांचे का विकास होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

सुक्खू ने कहा कि जब राज्य के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन होंगे तो युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो और प्रदेश में ही पर्यटन, ऊर्जा तथा अन्य क्षेत्रों में अवसर पैदा किए जाएं।

उन्होंने कहा कि पर्यटन परियोजना को इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। सरकार निजी निवेश और सरकारी परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय प्रदेश के अपने संसाधनों से आय बढ़ाने की जरूरत है।

सुक्खू के अनुसार जल संसाधन, पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र हिमाचल की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार बन सकते हैं। सरकार इन क्षेत्रों से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाकर प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए सरकार को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना होगा। राजस्व बढ़ाने, खर्च कम करने और नए निवेश को आकर्षित करने की रणनीति के जरिए प्रदेश की वित्तीय स्थिति को बेहतर किया जा सकता है।

11 दिसंबर से पहले मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बातचीत के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों में फेरबदल को लेकर भी संकेत दिए। जब उनसे इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा बनी रहनी चाहिए।

उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में मंत्रिमंडल में एक मंत्री का पद खाली है। इसके अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने कार्यकाल के चार वर्ष आगामी 11 दिसंबर को पूरे करने जा रही है।

उन्होंने संकेत दिया कि उनकी कोशिश रहेगी कि 11 दिसंबर से पहले मंत्रिमंडल विस्तार किया जाए। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार विभागों में फेरबदल भी किया जा सकता है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मंत्रिमंडल विस्तार में किसे शामिल किया जाएगा या विभागों में किन मंत्रियों के दायित्व बदले जा सकते हैं। इसको लेकर अंतिम निर्णय के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

आर्थिक एजेंडे के साथ राजनीतिक संदेश

सोलन में मुख्यमंत्री की बातचीत में प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सरकार के भविष्य के रोडमैप के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दों की झलक भी देखने को मिली। उन्होंने एक ओर जल संसाधनों और पर्यटन के जरिए आय बढ़ाने की बात कही, वहीं केंद्र से मिलने वाले वित्तीय संसाधनों को लेकर भी अपना पक्ष रखा।

सरकार के सामने बढ़ते खर्च, कर्ज और राजस्व बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे अमीर राज्य बनाने का लक्ष्य रखा जाना आने वाले वर्षों की आर्थिक नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

फिलहाल सरकार जल संसाधनों, पर्यटन और अन्य आय के स्रोतों से अतिरिक्त राजस्व जुटाने पर जोर दे रही है। अब यह देखना होगा कि इन योजनाओं से राज्य की वास्तविक आय में कितनी वृद्धि होती है और मुख्यमंत्री द्वारा तय किए गए आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में सरकार कितनी सफल रहती है।