सेंधा नमक को सेहतमंद समझकर ज्यादा खाना पड़ सकता है भारी, शरीर में कैल्शियम की कमी से कमजोर हो सकती हैं हड्डियां

सेंधा नमक को सेहतमंद समझकर ज्यादा खाना पड़ सकता है भारी, शरीर में कैल्शियम की कमी से कमजोर हो सकती हैं हड्डियां

रोजमर्रा के खाने में नमक का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। कोई साधारण सफेद नमक पसंद करता है, तो कोई सेंधा नमक को ज्यादा प्राकृतिक और सेहत के लिए बेहतर मानकर अपनी डाइट में शामिल करता है। व्रत के दौरान इसका इस्तेमाल बढ़ जाता है और कई लोग सलाद, फल, रायता और दूसरे व्यंजनों में भी इसे नियमित रूप से खाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी भी तरह के नमक का जरूरत से ज्यादा सेवन शरीर पर क्या असर डाल सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, नमक की अधिक मात्रा सिर्फ ब्लड प्रेशर के लिए ही चिंता का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध शरीर में कैल्शियम के संतुलन और हड्डियों की सेहत से भी हो सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि सेंधा नमक खाते ही हड्डियां खोखली होने लगती हैं। असल चिंता लंबे समय तक अधिक सोडियम का सेवन, खानपान में कैल्शियम की कमी और हड्डियों को मजबूत रखने वाली दूसरी जरूरी आदतों की अनदेखी को लेकर है।

सेंधा नमक को लेकर क्यों बढ़ रही है चर्चा?

सेंधा नमक को आमतौर पर रॉक सॉल्ट कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से मिलने वाला नमक है, जिसका इस्तेमाल भारतीय खानपान में लंबे समय से किया जाता रहा है। खासकर व्रत के भोजन में इसे प्राथमिकता दी जाती है। कुछ लोग इसे साधारण नमक की तुलना में ज्यादा फायदेमंद समझते हैं और इसी वजह से इसके सेवन की मात्रा पर ध्यान नहीं देते।

लेकिन किसी खाद्य पदार्थ का प्राकृतिक होना अपने आप यह साबित नहीं करता कि उसे कितनी भी मात्रा में खाया जा सकता है। सेंधा नमक में भी सोडियम होता है। इसलिए इसकी अधिक मात्रा शरीर में सोडियम की कुल खपत बढ़ा सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, वयस्कों को प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम का सेवन करना चाहिए। यह मात्रा पांच ग्राम से कम नमक के बराबर है। इस सीमा में खाने में ऊपर से डाला गया नमक ही नहीं, बल्कि भोजन में पहले से मौजूद नमक भी शामिल होता है। यानी नमक की कुल खपत पर ध्यान देना जरूरी है।

ज्यादा सोडियम से हड्डियों को कैसे हो सकता है नुकसान?

हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम की अहम भूमिका होती है। यह खनिज हड्डियों और दांतों की संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शरीर में कैल्शियम का संतुलन बिगड़ने या लंबे समय तक पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलने पर हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है।

सोडियम और कैल्शियम का शरीर में आपस में जुड़ा हुआ संबंध है। जब भोजन के जरिए सोडियम की मात्रा बढ़ती है, तो कुछ परिस्थितियों में पेशाब के रास्ते कैल्शियम का उत्सर्जन भी बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि शरीर से सामान्य से अधिक कैल्शियम बाहर निकल सकता है।

यदि कोई व्यक्ति लगातार ज्यादा नमक खाता है और उसकी डाइट में कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो यह स्थिति हड्डियों की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। उम्र, खानपान, हार्मोन, शारीरिक गतिविधि और दूसरे स्वास्थ्य संबंधी कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

वैज्ञानिक शोध में अधिक सोडियम सेवन और मूत्र के जरिए कैल्शियम की बढ़ी हुई हानि के बीच संबंध पाया गया है। कुछ अध्ययनों में कम कैल्शियम लेने वाले लोगों में हड्डियों के खनिज घनत्व को लेकर भी चिंता जताई गई है। फिर भी, केवल सेंधा नमक खाने को सीधे ऑस्टियोपोरोसिस का कारण बताना सही नहीं होगा।

क्या सेंधा नमक और साधारण नमक में बड़ा अंतर है?

सेंधा नमक और सामान्य खाने के नमक के स्रोत, बनावट और खनिज संरचना में अंतर हो सकता है। सेंधा नमक में कुछ अन्य खनिज बहुत कम मात्रा में मौजूद हो सकते हैं। दूसरी ओर, साधारण आयोडीन युक्त नमक में आयोडीन मिलाया जाता है, जो शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।

आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होता है। इसकी कमी से थायरॉयड संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सेंधा नमक को आयोडीन युक्त नमक का पूरी तरह समान विकल्प मान लेना इसलिए उचित नहीं है, खासकर जब व्यक्ति को अपने भोजन से पर्याप्त आयोडीन नहीं मिल रहा हो।

यह भी समझना जरूरी है कि सेंधा नमक को किसी विशेष बीमारी से बचाने वाला या हड्डियों को मजबूत बनाने वाला खाद्य पदार्थ नहीं माना जा सकता। इसके प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि इसमें मौजूद सोडियम शरीर पर कोई असर नहीं डालेगा।

इसलिए नमक का चुनाव करते समय केवल उसके रंग, बनावट या प्राकृतिक होने पर ध्यान देने के बजाय अपनी कुल सोडियम खपत और आयोडीन की जरूरत को भी समझना चाहिए।

किन लोगों को नमक की मात्रा पर खास ध्यान देना चाहिए?

हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है, लेकिन कुछ लोगों को नमक का सेवन सीमित रखने को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए।

1. अधिक उम्र के लोग: उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है। ऐसे में पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

2. मेनोपॉज के बाद महिलाएं: इस अवधि में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने के कारण हड्डियों के नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच उपयोगी हो सकती है।

3. कम कैल्शियम लेने वाले लोग: जो लोग दूध, दही या कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ बहुत कम खाते हैं, उन्हें अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए। केवल नमक कम करने से कैल्शियम की कमी पूरी नहीं होती।

4. हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग: अधिक सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाने में योगदान दे सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के मुताबिक नमक की मात्रा सीमित करनी चाहिए।

5. किडनी संबंधी परेशानी वाले लोग: किडनी शरीर में पानी और खनिजों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। किडनी की बीमारी होने पर सोडियम और अन्य पोषक तत्वों के सेवन को लेकर डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह जरूरी हो सकती है।

इनमें से किसी भी स्थिति में केवल नमक को दोष देना उचित नहीं होगा। हड्डियों की सेहत और शरीर में कैल्शियम के स्तर पर कई कारक एक साथ असर डालते हैं।

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या खाएं?

हड्डियों की देखभाल के लिए सबसे जरूरी है कि भोजन में कैल्शियम और विटामिन डी समेत दूसरे आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिलें। दूध, दही और पनीर कैल्शियम के उपयोगी स्रोत हैं। जो लोग डेयरी उत्पाद नहीं खाते, वे अपनी जरूरत के अनुसार कैल्शियम से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थ चुन सकते हैं।

कुछ हरी सब्जियां, कैल्शियम से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ और हड्डियों सहित खाई जाने वाली कुछ मछलियां भी कैल्शियम उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग खाद्य पदार्थों से मिलने वाले कैल्शियम की मात्रा और शरीर में उसके अवशोषण की क्षमता अलग हो सकती है।

विटामिन डी भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है। इसके लिए उपयुक्त धूप, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह उपयोगी हो सकती है। विटामिन डी या कैल्शियम के सप्लीमेंट बिना जरूरत और सलाह के शुरू नहीं करने चाहिए।

इसके अलावा, पैदल चलना, नियमित व्यायाम और उम्र के अनुसार वजन सहन करने वाली गतिविधियां हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित रखना भी समग्र स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

नमक कम करने के लिए आज से अपनाएं ये आदतें

नमक की खपत कम करने के लिए सबसे पहले यह देखें कि आप दिनभर में कितने स्रोतों से सोडियम ले रहे हैं। सिर्फ सब्जी या दाल में डाला गया नमक ही कुल मात्रा तय नहीं करता। अचार, पापड़, नमकीन, पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स और कई तैयार खाद्य पदार्थों में भी सोडियम अधिक हो सकता है।

खाना बनाते समय नमक नापकर डालना, मेज पर अलग से नमक रखने से बचना और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ना उपयोगी कदम हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू, अदरक, लहसुन और अन्य मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

यदि आप व्रत में सेंधा नमक खाते हैं, तो उसकी मात्रा को भी अपनी दिनभर की कुल खपत में शामिल करें। केवल सेंधा नमक इस्तेमाल करने से ज्यादा नमक खाने के जोखिम समाप्त नहीं हो जाते।

क्या हड्डियां कमजोर होने पर जांच करानी चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को मामूली चोट में बार-बार फ्रैक्चर हो रहा है, उम्र बढ़ने के साथ लंबाई कम होती महसूस हो रही है या ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम अधिक है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना उचित है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर हड्डियों के खनिज घनत्व की जांच की सलाह दे सकते हैं।

हड्डियां कमजोर होने के पीछे उम्र, हार्मोन में बदलाव, पोषण की कमी, कुछ दवाएं और अन्य बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए समस्या का कारण पता किए बिना सिर्फ नमक बंद कर देना पर्याप्त समाधान नहीं है।

निष्कर्ष: सेंधा नमक को पूरी तरह नुकसानदेह मानने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सेहतमंद समझकर ज्यादा मात्रा में खाना भी सही नहीं है। शरीर को सोडियम की सीमित मात्रा चाहिए, जबकि हड्डियों को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त कैल्शियम, विटामिन डी और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी हैं। संतुलित खानपान अपनाना और नमक की कुल मात्रा पर नजर रखना हड्डियों के साथ-साथ दिल और किडनी की सेहत के लिए भी बेहतर कदम है।

स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और PubMed में प्रकाशित सोडियम, कैल्शियम तथा हड्डियों की सेहत से संबंधित शोध।

(Photo : AI Generated)