हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों के साथ सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कथित व्यवहार को लेकर अब मामला सदन से बाहर भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए इसे विधानसभा की गरिमा और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ दिया है। पार्टी ने फैसला किया है कि वह 31 अगस्त को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराएगी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक अशोक अरोड़ा ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें विधानसभा के पहले दिन सुरक्षा कर्मियों द्वारा कांग्रेस विधायकों के साथ कथित तौर पर किए गए व्यवहार के अलावा प्रदेश से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया जाएगा।
अशोक अरोड़ा के मुताबिक, विधानसभा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण संस्थान है और वहां चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ व्यवहार में मर्यादा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि विधायकों को जनता ने चुनकर विधानसभा भेजा है और सदन के भीतर तथा परिसर में उनके अधिकारों और गरिमा की रक्षा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पहले दिन सामने आए घटनाक्रम को कांग्रेस केवल एक सामान्य प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी मामला नहीं मानती। पार्टी के लिए यह लोकतांत्रिक अधिकारों और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए कांग्रेस विधायक दल इस विषय को राज्यपाल के समक्ष विस्तार से रखेगा और पूरे मामले में उचित हस्तक्षेप की मांग करेगा।
अशोक अरोड़ा ने नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा की वरिष्ठता का उल्लेख करते हुए कहा कि हुड्डा चार बार सांसद, छह बार विधायक और करीब दस वर्षों तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे वरिष्ठ नेता के साथ यदि विधानसभा परिसर में अनुचित व्यवहार हुआ है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अन्य विधायकों के साथ भी जिस प्रकार के व्यवहार की बात सामने आई है, उसकी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की गरिमा और अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए। पार्टी इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करवाना चाहती है कि विधानसभा परिसर में सुरक्षा प्रोटोकॉल क्या हैं और उनके पालन के दौरान जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार के लिए क्या नियम निर्धारित हैं।
अशोक अरोड़ा ने कहा कि 31 अगस्त को राज्यपाल को दिया जाने वाला ज्ञापन केवल सुरक्षा कर्मियों के कथित व्यवहार तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस विधायक दल इसमें प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े कई मुद्दों को भी शामिल करेगा। पार्टी इन विषयों के माध्यम से सरकार की नीतियों और कामकाज पर अपनी चिंताओं को राज्यपाल के सामने रखेगी।
ज्ञापन में बेरोजगारी का मुद्दा कांग्रेस की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहेगा। अशोक अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकारी भर्तियों, नियुक्तियों की प्रक्रिया और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं होने को लेकर युवाओं में असंतोष है।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए सरकार को स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति अपनाने की जरूरत है। पार्टी का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और युवाओं को सरकारी नौकरियों के लिए बार-बार अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। राज्यपाल को सौंपे जाने वाले ज्ञापन में रोजगार के आंकड़ों, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।
हरियाणा कौशल रोजगार निगम यानी HKRN भी कांग्रेस के एजेंडे में शामिल रहेगा। कांग्रेस लंबे समय से HKRN के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों और रोजगार की प्रकृति को लेकर सरकार से सवाल करती रही है। पार्टी का मानना है कि इस व्यवस्था में काम करने वाले युवाओं के भविष्य, रोजगार की स्थिरता और सेवा शर्तों को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
अशोक अरोड़ा के अनुसार, HKRN से जुड़े कई सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए। कांग्रेस इन मुद्दों को अब राज्यपाल के सामने रखेगी और यह बताने का प्रयास करेगी कि युवाओं के रोजगार से जुड़े विषयों पर उसकी क्या चिंताएं हैं।
कांग्रेस कानून व्यवस्था के मुद्दे को भी ज्ञापन में शामिल करने जा रही है। पार्टी का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा किसी भी सरकार की मूल जिम्मेदारी है। प्रदेश में अपराध और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर कांग्रेस समय-समय पर सरकार को घेरती रही है।
अशोक अरोड़ा के मुताबिक, जिन घटनाओं को लेकर कांग्रेस पहले विधानसभा में और सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठाती रही है, उन्हें अब राज्यपाल के संज्ञान में भी लाया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को केवल दावे करने के बजाय जमीनी स्तर पर लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना चाहिए।
बैंकिंग से जुड़े कथित घोटालों का मामला भी कांग्रेस के प्रस्तावित ज्ञापन का हिस्सा होगा। अशोक अरोड़ा ने कहा कि प्रदेश में सामने आए बैंक घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि सार्वजनिक धन या आम लोगों की जमा पूंजी से जुड़े मामलों में गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो सरकार और संबंधित एजेंसियों को उसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े मामलों में यदि बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। पार्टी राज्यपाल के समक्ष यह मांग रखेगी कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अशोक अरोड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष केवल सरकार की आलोचना करने के लिए नहीं होता। विपक्ष की जिम्मेदारी जनता की आवाज को सदन तक पहुंचाना और सरकार से सवाल पूछना भी है। इसलिए विपक्षी विधायकों को अपनी बात रखने के लिए उचित अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विधानसभा के भीतर सरकार से सवाल पूछना, नीतियों पर चर्चा करना और जनहित के मुद्दे उठाना विपक्ष का संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायित्व है। यदि किसी कारण से विपक्षी विधायकों की भूमिका प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ता है।
कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात के दौरान विधानसभा परिसर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामले पर भी विस्तृत चर्चा करेगा। पार्टी यह जानना चाहती है कि पहले दिन जो घटनाक्रम हुआ, उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस ज्ञापन के जरिए एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान जिन मुद्दों पर पार्टी सरकार से जवाब मांग रही है, उन्हें अब राज्यपाल के समक्ष भी रखा जाएगा।
31 अगस्त को होने वाली इस कार्रवाई को कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा के भीतर सरकार को घेरने के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना विपक्ष की ओर से अपने मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विधानसभा के पहले दिन हुए कथित घटनाक्रम पर विरोध दर्ज कराना नहीं है, बल्कि प्रदेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, युवाओं के रोजगार, कानून व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता जैसे विषयों पर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है।
अशोक अरोड़ा ने कहा कि कांग्रेस सभी मुद्दों को तथ्यों और अपनी चिंताओं के साथ राज्यपाल के सामने रखेगी। पार्टी उम्मीद करेगी कि इन मामलों पर उचित संज्ञान लिया जाए और सरकार से आवश्यक जवाब मांगा जाए।
फिलहाल 31 अगस्त को होने वाले कांग्रेस के इस प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। एक तरफ विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायकों के साथ कथित व्यवहार को लेकर पार्टी नाराज है, तो दूसरी तरफ बेरोजगारी, HKRN, कानून व्यवस्था और बैंक घोटालों जैसे मुद्दों को जोड़कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक मोर्चा तैयार करती दिखाई दे रही है।
राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में और गर्माने की संभावना है। कांग्रेस जहां इसे विधायकों के सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादा का प्रश्न बता रही है, वहीं सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि 31 अगस्त को वह इन सभी मुद्दों को एक साथ लेकर राजभवन पहुंचेगी और राज्यपाल के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।




