सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त संस्थानों के पात्र कर्मचारियों को राहत; 30 अक्टूबर तक राशि जारी करने का लक्ष्य, 10 किस्तों में होगी वसूली
त्योहारों के मौसम में हरियाणा सरकार ने प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। राज्य के सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त संस्थानों में कार्यरत पात्र नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 15 हजार रुपये का ब्याजमुक्त एडवांस दिया जाएगा। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को 24 अक्टूबर 2026 तक आवेदन करना होगा। सरकार की ओर से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पात्र कर्मचारियों के आवेदन मंजूर करने और राशि वितरित करने की प्रक्रिया 30 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जा सकेगी।
इस फैसले से उन कर्मचारियों को अस्थायी आर्थिक सहायता मिल सकेगी, जिन्हें त्योहारों के दौरान घरेलू खर्चों और अन्य जरूरी जरूरतों के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है। एडवांस पर ब्याज नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसकी वसूली निर्धारित समय के भीतर की जाएगी। सरकार ने इसके लिए स्पष्ट पात्रता शर्तें तय की हैं, ताकि सुविधा का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिले जो निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं।
एडवांस स्वीकृत करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग के आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) को सौंपी गई है। अधिकारियों को आवेदन की जांच करते समय कर्मचारियों की सेवा स्थिति और अन्य जरूरी शर्तों का ध्यान रखना होगा। सरकार ने राशि की वसूली, लेखा-जोखा और वित्त विभाग को रिपोर्ट भेजने के लिए भी विस्तृत व्यवस्था निर्धारित की है।
स्थायी और अस्थायी नियमित कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
सरकार की इस सुविधा के दायरे में सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त संस्थानों में स्थायी या अस्थायी आधार पर कार्यरत नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आएंगे। इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि संबंधित कर्मचारी के अगले 10 महीने तक सेवा में बने रहने की संभावना होनी चाहिए।
पात्रता तय करते समय कर्मचारी की सेवा संबंधी स्थिति की जांच की जाएगी। केवल चतुर्थ श्रेणी के नियमित कर्मचारी ही इस सुविधा के लिए आवेदन कर सकेंगे। कार्यभारित, आकस्मिक वेतनभोगी, दैनिक वेतनभोगी और संविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
अस्थायी आधार पर कार्यरत पात्र नियमित कर्मचारी को एडवांस प्राप्त करने के लिए किसी स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारी की जमानत देनी होगी। इस शर्त का उद्देश्य राशि की वसूली सुनिश्चित करना है, ताकि निर्धारित किस्तों के माध्यम से एडवांस की रकम वापस ली जा सके।
सरकार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे आवेदन मंजूर करने से पहले पात्रता से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि करें। इससे किसी अपात्र कर्मचारी को गलती से राशि जारी होने की स्थिति से बचा जा सकेगा।
10 समान मासिक किस्तों में लौटानी होगी रकम
पात्र कर्मचारियों को मिलने वाले 15 हजार रुपये के एडवांस की वसूली 10 समान मासिक किस्तों में की जाएगी। इस तरह कर्मचारी को हर महीने 1,500 रुपये लौटाने होंगे। चूंकि यह एडवांस ब्याजमुक्त है, इसलिए निर्धारित शर्तों के अनुसार कर्मचारी को मूल राशि ही चुकानी होगी।
सरकार ने पति-पत्नी दोनों के सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति में भी स्पष्ट नियम बनाया है। यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, तो उनमें से केवल एक ही इस सुविधा का लाभ ले सकेगा। यानी एक ही परिवार में दोनों कर्मचारियों को अलग-अलग 15 हजार रुपये का एडवांस नहीं दिया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत आवेदन करने वाले कर्मचारी और संबंधित विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सुविधा के नियमों का पालन किया जाए। डीडीओ की जिम्मेदारी होगी कि आवेदन की पात्रता जांचने के बाद ही राशि मंजूर की जाए और वसूली का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखा जाए।
इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा एडवांस
हरियाणा सरकार ने इस आर्थिक सुविधा के लिए कुछ श्रेणियों को स्पष्ट रूप से अपात्र घोषित किया है। कार्यभारित, आकस्मिक वेतनभोगी, दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारी इसके लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। इसी तरह, यदि कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दूसरे सरकारी विभाग, बोर्ड-निगम या स्थानीय निकाय में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत है, तो उसे उसके मूल विभाग से यह एडवांस नहीं मिलेगा।
निलंबित कर्मचारियों के आवेदन भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम-7 के तहत कार्रवाई का सामना कर रहे कर्मचारी भी इस सुविधा के पात्र नहीं होंगे।
इन शर्तों का उद्देश्य एडवांस वितरण की प्रक्रिया को नियमबद्ध रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन केवल निर्धारित पात्रता वाले कर्मचारियों को ही जारी किया जाए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपात्र कर्मचारी को एडवांस जारी किया जाता है, तो इसके लिए संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए अधिकारियों को आवेदन की जांच में विशेष सावधानी बरतनी होगी।
एडवांस के दुरुपयोग पर 10 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज
सरकार ने एडवांस के उपयोग और वसूली को लेकर भी सख्ती बरतने का प्रावधान किया है। यदि राशि का दुरुपयोग पाया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी से 10 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज वसूला जाएगा।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी निर्धारित नियमों के अनुरूप ही सुविधा का लाभ लें। एडवांस जारी करने वाले अधिकारी को भी यह देखना होगा कि कर्मचारी पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करता है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत राशि प्राप्त कर रहा है।
इसके साथ ही विभागों को एडवांस से संबंधित पूरी जानकारी का रिकॉर्ड रखना होगा। इसमें राशि जारी किए जाने, संबंधित कर्मचारी के विवरण और हर महीने होने वाली वसूली का हिसाब शामिल होगा। रिकॉर्ड के नियमित रखरखाव से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी कर्मचारी की बकाया राशि या किस्तों को लेकर विसंगति न रहे।
डीडीओ करेंगे आवेदन मंजूर
एडवांस देने की प्रक्रिया में संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी की भूमिका अहम होगी। कर्मचारियों से निर्धारित समयसीमा के भीतर प्राप्त आवेदनों की जांच करने के बाद पात्र मामलों में राशि स्वीकृत की जाएगी।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी अगले 10 महीने तक सेवा में बने रहने की शर्त पूरी करता हो। अस्थायी नियमित कर्मचारी के मामले में स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारी की जमानत की उपलब्धता की भी पुष्टि करनी होगी।
इसके अतिरिक्त यह देखना जरूरी होगा कि आवेदन करने वाला कर्मचारी किसी ऐसी श्रेणी में तो नहीं आता, जिसे नियमों के तहत इस सुविधा से बाहर रखा गया है। निलंबन, नियम-7 के तहत कार्रवाई, प्रतिनियुक्ति और रोजगार की प्रकृति जैसे पहलुओं की जांच भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होगी।
सरकार ने एडवांस की मंजूरी और वितरण के लिए 30 अक्टूबर 2026 तक की समयसीमा निर्धारित की है। ऐसे में संबंधित विभागों को आवेदन प्राप्त होने के बाद जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया समय पर पूरी करनी होगी।
हर महीने लेखा कार्यालय से करना होगा मिलान
सरकार ने केवल एडवांस जारी करने के नियम ही नहीं बनाए हैं, बल्कि राशि की वसूली और लेखांकन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सभी संबंधित विभागों को वसूली का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। हर महीने प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) के कार्यालय के साथ खातों का मिलान करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा प्रत्येक बिल के साथ एडवांस और उसकी वसूली से संबंधित विवरण देना होगा। इससे भुगतान और कटौती का हिसाब नियमित रूप से दर्ज किया जा सकेगा तथा किसी प्रकार की वित्तीय विसंगति सामने आने पर उसका पता लगाना आसान होगा।
विभागों को कुल खर्च की जानकारी भी वित्त विभाग को भेजनी होगी। इसके लिए नवंबर 2026 के अंत तक निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट के माध्यम से सरकार को यह जानकारी मिल सकेगी कि योजना के तहत कितनी राशि स्वीकृत की गई और कितना खर्च हुआ।
लेखा संबंधी इन शर्तों से एडवांस वितरण की प्रक्रिया पर निगरानी बनाए रखने और सरकारी धन का हिसाब व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि राशि जारी करने से लेकर उसकी पूरी वसूली तक प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड उपलब्ध हो।
कर्मचारियों को समयसीमा का रखना होगा ध्यान
हरियाणा सरकार की इस पहल के तहत पात्र नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 24 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन मिलने के बाद संबंधित डीडीओ पात्रता की जांच करेंगे और नियमों के अनुसार एडवांस स्वीकृत किया जाएगा। सरकार ने 30 अक्टूबर तक राशि वितरण की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
कर्मचारियों के लिए आवेदन करते समय अपनी सेवा स्थिति और अन्य निर्धारित शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी होगा। अस्थायी नियमित कर्मचारियों को स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारी की जमानत से जुड़ी शर्त पूरी करनी होगी। वहीं, पति-पत्नी दोनों के सरकारी कर्मचारी होने पर केवल एक ही व्यक्ति इस सुविधा का लाभ ले सकेगा।
कुल मिलाकर, त्योहारों से पहले 15 हजार रुपये का ब्याजमुक्त एडवांस देने का निर्णय पात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने के लिए पात्रता नियमों का पालन करना और तय समयसीमा में आवेदन करना आवश्यक होगा। सरकार ने एडवांस की वसूली, दुरुपयोग पर दंडात्मक ब्याज और लेखा मिलान के प्रावधानों के जरिए यह भी सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है कि पूरी प्रक्रिया वित्तीय नियमों के अनुरूप संचालित हो।



