शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार दूसरे चरण में 100 और सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध करने की योजना पर काम कर रही है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों की बढ़ती शैक्षणिक जरूरतों को देखते हुए करीब चार हजार शिक्षकों की नियुक्ति भी प्रस्तावित है।
सरकार का मानना है कि सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने से वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिलेगा। सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने के साथ स्कूलों में शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक गतिविधियों में भी बदलाव किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
सरकार की योजना के अनुसार सीबीएसई से संबद्ध किए जाने वाले इन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अलग से तैयार की गई व्यवस्था के तहत भर्ती की जाएगी। प्रस्तावित शिक्षकों को प्रति माह 30 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा। हालांकि यह मानदेय पूरे वर्ष के बजाय शैक्षणिक सत्र के 10 महीनों के लिए दिया जाएगा।
कैबिनेट के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव
राज्य सरकार से प्रारंभिक मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने इस योजना पर काम शुरू कर दिया है। विभाग की ओर से प्रस्ताव का कैबिनेट नोट तैयार किया जा चुका है। अब इसे 10 अक्टूबर को प्रस्तावित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जा सकता है।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद स्कूलों के चयन, संबद्धता की प्रक्रिया और शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े अगले चरण की कार्रवाई शुरू होगी। सरकार की कोशिश है कि चयनित स्कूलों में सीबीएसई के अनुरूप शैक्षणिक ढांचा तैयार करने के साथ पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।
सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर विधायकों और मंत्रियों की ओर से भी रुचि दिखाई जा रही है। कई जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि उनके विधानसभा क्षेत्रों के अधिक से अधिक सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया जाए। इससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी बेहतर शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकेगी।
हालांकि सरकार की ओर से स्कूलों के चयन का मुख्य आधार शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना बताया जा रहा है। विभाग स्तर पर उन स्कूलों की पहचान की जा रही है, जहां सीबीएसई व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और अन्य शैक्षणिक संसाधन विकसित किए जा सकते हैं।
पहले चरण में 151 स्कूल हो चुके संबद्ध
हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। वर्तमान में 151 सरकारी स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हो चुके हैं और इन संस्थानों में सीबीएसई का पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसके अलावा सात अन्य स्कूलों की संबद्धता की प्रक्रिया चल रही है।
अब दूसरे चरण में 100 और स्कूलों को इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इसके बाद प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों की संख्या और बढ़ जाएगी।
इन स्कूलों में केंद्रीय बोर्ड के अनुरूप पाठ्यक्रम लागू करने के साथ पढ़ाने की पद्धति, मूल्यांकन व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों में भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य केवल स्कूलों का बोर्ड बदलना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की पूरी शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
सीबीएसई से संबद्धता के बाद इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे पाठ्यक्रम और शैक्षणिक मानकों के अनुरूप शिक्षा मिलने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिल सकती है।
4 हजार शिक्षकों की भर्ती पर जोर
100 नए स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने की योजना के साथ ही करीब चार हजार शिक्षकों की नियुक्ति का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। सरकार का मानना है कि बोर्ड बदलने के साथ शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पहले से तैयार योजना के तहत ही नई भर्ती की जाएगी। प्रस्तावित शिक्षकों को 30 हजार रुपये मासिक मानदेय देने की व्यवस्था होगी। यह भुगतान शैक्षणिक सत्र के 10 महीनों के लिए किया जाएगा।
शिक्षा विभाग की योजना है कि संबद्ध होने वाले स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी नहीं होगी और नए पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
सरकार की ओर से शिक्षकों की भर्ती पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका एक कारण यह भी है कि सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षण के लिए स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ होना आवश्यक होगा।
एक सरकार में सबसे ज्यादा शिक्षक भर्ती का दावा
राज्य सरकार शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर भर्तियों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। सरकार का दावा है कि मौजूदा कांग्रेस सरकार अब तक करीब 10 हजार शिक्षकों की भर्ती कर चुकी है। अब चार हजार और शिक्षकों की भर्ती प्रस्तावित है।
सरकार के अनुसार, यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो एक ही सरकार के कार्यकाल में शिक्षा विभाग में होने वाली शिक्षक भर्तियों का आंकड़ा काफी अधिक हो जाएगा। सरकार इसे शिक्षा व्यवस्था में मानव संसाधन मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में पेश कर रही है।
शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को विषयवार बेहतर मार्गदर्शन देने में मदद मिलने की उम्मीद है। सीबीएसई से संबद्ध किए जा रहे स्कूलों में यह जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वहां केंद्रीय बोर्ड के मानकों के अनुसार शिक्षण व्यवस्था विकसित करनी होगी।
सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ रहा विद्यार्थियों का रुझान
सरकार का कहना है कि सीबीएसई से संबद्ध किए जाने के बाद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि अभिभावकों के बीच सरकारी स्कूलों को लेकर भरोसा बढ़ाने की कोशिशों को कुछ हद तक सफलता मिल रही है।
सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को ऐसी शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ना है, जहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षण संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो। सीबीएसई संबद्धता को इसी व्यापक योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
स्कूलों में बोर्ड परिवर्तन के साथ शिक्षकों की पर्याप्त संख्या, पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता के आकलन पर भी ध्यान दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर जो अंतर महसूस किया जाता है, उसे कम किया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी लाभ
सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आम तौर पर सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों की संख्या शहरी क्षेत्रों में अधिक होती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों के पास ऐसे विकल्प सीमित रहते हैं।
यदि उनके क्षेत्र में ही सरकारी स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हो जाता है तो विद्यार्थियों को दूसरे शहरों या निजी संस्थानों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे अभिभावकों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ भी कम करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की कोशिश है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिलें।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी
सरकार की योजना को केवल 100 स्कूलों के बोर्ड परिवर्तन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके साथ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने, पाठ्यक्रम में बदलाव करने और शैक्षणिक स्तर सुधारने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में केंद्रीय बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों की क्षमता, तार्किक सोच और विषय की समझ विकसित करने पर जोर दिया जा सकता है। इसके लिए शिक्षकों को भी नए पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति के अनुसार तैयार करना जरूरी होगा।
शिक्षा विभाग इसी वजह से संबद्धता के साथ शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। सरकार की मंशा है कि बोर्ड परिवर्तन के बाद स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
10 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक पर नजर
100 और सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने तथा करीब चार हजार शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा प्रस्ताव अब कैबिनेट के सामने रखा जाना है। 10 अक्टूबर को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर फैसला होने की संभावना है।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग स्कूलों की अंतिम सूची, संबद्धता की प्रक्रिया और शिक्षक भर्ती से जुड़े अगले चरण की कार्रवाई आगे बढ़ाएगा। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि दूसरे चरण में किन क्षेत्रों के कितने स्कूलों को सीबीएसई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
सरकार की इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले चरण में 151 स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने और सात अन्य स्कूलों की प्रक्रिया चलने के बाद अब 100 नए स्कूलों को शामिल करने की योजना से राज्य में केंद्रीय बोर्ड से संबद्ध सरकारी स्कूलों का दायरा और बढ़ेगा।
यदि प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो करीब चार हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति भी शिक्षा विभाग के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया होगी। सरकार के लिए अब चुनौती यह होगी कि स्कूलों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं और सीबीएसई की शैक्षणिक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
कुल मिलाकर हिमाचल सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बोर्ड परिवर्तन और शिक्षक भर्ती, दोनों को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। आने वाले समय में इस योजना का असर स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या, अभिभावकों के भरोसे और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर दिखाई दे सकता है।




