हिमाचल में छात्रवृत्ति के इंतजार में 38,720 विद्यार्थी, आधार लिंक नहीं होने से चार सत्रों का भुगतान अटका

हिमाचल में छात्रवृत्ति के इंतजार में 38,720 विद्यार्थी, आधार लिंक नहीं होने से चार सत्रों का भुगतान अटका

उच्च शिक्षा निदेशालय ने शिक्षण संस्थानों को 15 दिन में कमियां दूर करने का दिया निर्देश, लापरवाही पर संस्थान प्रमुखों और नोडल अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही

शिमला। हिमाचल प्रदेश में बैंक खातों की आधार सीडिंग पूरी नहीं होने के कारण 38,720 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का भुगतान अटक गया है। राज्य की छह प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत लंबित मामलों में चार शैक्षणिक सत्रों के विद्यार्थी शामिल हैं। इनमें स्कूलों के साथ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं भी हैं। शिक्षा विभाग की ओर से बार-बार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद बैंक खातों को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसका असर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जो अपनी पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए छात्रवृत्ति की आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने अब सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों को 15 दिन के भीतर आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूरी करने और अनुपालन रिपोर्ट जमा कराने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संस्थान प्रमुखों और संबंधित नोडल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।

विद्यार्थियों के आवेदन सत्यापन के विभिन्न चरणों से गुजर चुके हैं, लेकिन बैंक खातों से जुड़ी कमियों के कारण भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में विभाग ने संस्थानों को लंबित मामलों की समीक्षा करने, विद्यार्थियों के बैंक खातों की स्थिति जांचने और आवश्यक सुधार जल्द पूरा करवाने को कहा है।

चार शैक्षणिक सत्रों के आवेदन लंबित

उच्च शिक्षा निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक लंबित मामले शैक्षणिक सत्र 2024-25 के हैं। इस सत्र के 20,120 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति से संबंधित मामले अभी निपटाए जाने बाकी हैं। इसके अलावा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के 12,084, वर्ष 2023-24 के 3,654 और वर्ष 2022-23 के 2,862 मामले लंबित हैं।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि समस्या केवल मौजूदा शैक्षणिक सत्र तक सीमित नहीं है। पिछले वर्षों के विद्यार्थी भी छात्रवृत्ति की राशि मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पुराने मामलों के लंबित रहने से भुगतान प्रक्रिया को समय पर पूरा करने की चुनौती और बढ़ गई है।

लंबित आवेदनों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक तथा पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के मामले शामिल हैं। इसके अलावा पीएम-यशस्वी योजना के तहत आवेदन करने वाले विद्यार्थी भी प्रभावित हैं।

छात्रवृत्ति योजनाओं का उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता देना है। ऐसे में बैंक खातों से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण भुगतान रुकने से विद्यार्थियों को निर्धारित सहायता प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त इंतजार करना पड़ रहा है।

पीएम-यशस्वी योजना के 16 हजार से अधिक मामले लंबित

शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पीएम-यशस्वी योजना के तहत भी बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के 9,694 और प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के 7,131 मामले भुगतान की प्रतीक्षा में हैं।

इन दोनों श्रेणियों को मिलाकर 16,825 मामले बनते हैं। इससे स्पष्ट है कि पीएम-यशस्वी योजना से जुड़े आवेदनों का निपटारा भी विभाग के लिए महत्वपूर्ण है।

छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए आवेदन जमा करने के बाद पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। संबंधित संस्थान और राज्य स्तर पर सत्यापन पूरा होने के बावजूद यदि बैंक खाते की आधार सीडिंग में कमी रह जाती है, तो भुगतान आगे नहीं बढ़ पाता।

ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को आवेदन की अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी राशि मिलने का इंतजार करना पड़ता है। विभाग अब इन कमियों को दूर करने के लिए संस्थानों की भूमिका को महत्वपूर्ण मान रहा है।

संस्थानों को विद्यार्थियों से संपर्क कर बैंक खातों की स्थिति की पुष्टि करने और जिन मामलों में आधार सीडिंग नहीं हुई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाने के निर्देश दिए गए हैं।

15 दिन में प्रक्रिया पूरी करने का अल्टीमेटम

उच्च शिक्षा निदेशालय ने लंबित छात्रवृत्ति मामलों को निपटाने के लिए शिक्षण संस्थानों को 15 दिन का समय दिया है। इस अवधि में संस्थानों को विद्यार्थियों के बैंक खातों की जांच करनी होगी और आधार सीडिंग से संबंधित कमियों को दूर करवाना होगा।

निर्देशों के मुताबिक, संस्थानों को प्रक्रिया पूरी करने के बाद अनुपालन रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। इससे विभाग को यह जानकारी मिल सकेगी कि कितने विद्यार्थियों के बैंक खातों से संबंधित कमियां दूर कर दी गई हैं और किन मामलों में अभी कार्रवाई की जरूरत है।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित संस्थान प्रमुखों और नोडल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। यह कदम लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने और संस्थागत स्तर पर जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विद्यार्थियों के आवेदन सत्यापन के विभिन्न चरणों से गुजरने के बावजूद भुगतान नहीं होना इस बात की ओर संकेत करता है कि आवेदन प्रक्रिया और बैंकिंग संबंधी औपचारिकताओं के बीच समन्वय जरूरी है। इसलिए संस्थानों को अब केवल आवेदन सत्यापित करने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि भुगतान में बाधा बन रही कमियों को दूर करने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर भी तकनीकी दिक्कतें

छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल यानी एनएसपी पर भुगतान रिकॉर्ड से संबंधित समस्याएं भी सामने आई हैं। पोर्टल पर पुराने भुगतान लॉग हटने और शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए भुगतान प्रक्रिया प्रतिबंधित होने के कारण अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के केंद्रांश से संबंधित डेटा आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

इस समस्या के कारण पुराने मामलों के निपटारे में अतिरिक्त कठिनाई आ रही है। भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित रिकॉर्ड और पोर्टल से जुड़ी बाधाओं का समाधान भी आवश्यक होगा।

छात्रवृत्ति का भुगतान कई प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। इसमें आवेदन का सत्यापन, बैंक खाते की सही जानकारी, आधार सीडिंग और संबंधित पोर्टल पर भुगतान रिकॉर्ड का उपलब्ध होना शामिल है। इनमें से किसी भी स्तर पर कमी रहने से भुगतान प्रभावित हो सकता है।

ऐसे में केवल बैंक खातों को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी करना ही पर्याप्त नहीं होगा। जिन मामलों में एनएसपी पर रिकॉर्ड या भुगतान से संबंधित समस्या है, उनका समाधान भी संबंधित स्तर पर करना होगा।

बैंक खातों के लिए विशेष शिविर लगाने की तैयारी

उच्च शिक्षा निदेशालय ने शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों के बैंक खातों की स्थिति जांचने और आधार सीडिंग से जुड़ी कमियों को दूर करवाने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर विशेष शिविर लगाने को भी कहा गया है, ताकि विद्यार्थियों को बैंक संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में सहायता मिल सके।

विशेष शिविरों के माध्यम से संस्थान ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर सकते हैं, जिनके खातों में आधार सीडिंग या अन्य जरूरी औपचारिकताएं अधूरी हैं। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग स्तर पर जानकारी जुटाने और प्रक्रिया पूरी करने में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

विभाग ने विद्यार्थियों को भी अपने बैंक से संपर्क करने की सलाह दी है। उन्हें यह जांचना होगा कि उनके बैंक खाते में आधार सीडिंग पूरी है या नहीं और भुगतान के लिए आवश्यक एनपीसीआई मैपिंग की स्थिति क्या है।

एनपीसीआई यानी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के साथ खाते की मैपिंग और आधार सीडिंग भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी अलग-अलग आवश्यकताएं हैं। इसलिए विद्यार्थियों को दोनों की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए और कोई कमी सामने आने पर संबंधित बैंक से संपर्क कर उसे ठीक करवाना चाहिए।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को अपने शिक्षण संस्थान के छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी से संपर्क बनाए रखना चाहिए, ताकि आवेदन और भुगतान की स्थिति से संबंधित जानकारी मिल सके।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी प्रभावित

लंबित छात्रवृत्ति मामलों में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं। इससे समस्या का दायरा स्कूल स्तर से आगे उच्च शिक्षा तक फैला हुआ है।

उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस, किताबें, आवागमन और अन्य शैक्षणिक जरूरतों पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे में छात्रवृत्ति की राशि समय पर नहीं मिलने से उनकी आर्थिक योजना प्रभावित हो सकती है। हालांकि, सभी प्रभावित विद्यार्थियों पर पड़ने वाले वास्तविक आर्थिक प्रभाव से संबंधित अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पुराने और नए मामलों की समीक्षा कर भुगतान में आ रही बाधाओं को दूर करना है। इसके लिए संस्थानों, नोडल अधिकारियों, विद्यार्थियों और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।

पुराने शैक्षणिक सत्रों के मामलों का निपटारा भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन विद्यार्थियों को पहले से लंबित सहायता का इंतजार है। बैंक खातों और भुगतान रिकॉर्ड से संबंधित कमियां दूर होने के बाद ही संबंधित मामलों में भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

अब विभाग की कार्रवाई पर टिकी नजरें

हिमाचल प्रदेश में 38,720 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबित होने के मामले ने बैंकिंग औपचारिकताओं और छात्रवृत्ति भुगतान के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को सामने रखा है। छह प्रमुख योजनाओं के तहत चार शैक्षणिक सत्रों के मामलों में सबसे अधिक आवेदन वर्ष 2024-25 के हैं।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने अब 15 दिन के भीतर आधार सीडिंग पूरी करने और अनुपालन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। तय समयसीमा का पालन नहीं होने पर संस्थान प्रमुखों और नोडल अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की चेतावनी भी दी गई है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षण संस्थान निर्धारित अवधि में कितने मामलों की कमियां दूर कर पाते हैं और एनएसपी पर भुगतान रिकॉर्ड से संबंधित समस्याओं का समाधान किस तरह होता है।

विद्यार्थियों को राहत दिलाने के लिए बैंक खातों की आधार सीडिंग, एनपीसीआई मैपिंग और पोर्टल से जुड़ी बाधाओं को दूर करना आवश्यक होगा। इन प्रक्रियाओं के प्रभावी निपटारे से ही लंबित छात्रवृत्ति मामलों को आगे बढ़ाने और पात्र विद्यार्थियों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने का रास्ता साफ हो सकेगा।