अगले पांच वर्षों में पर्यटन ढांचे का होगा विस्तार, कांगड़ा एयरपोर्ट के लिए 3,000 करोड़ खर्च करेगी सरकार; 60 इको-टूरिज्म स्थलों से 22 करोड़ रुपये का राजस्व
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाने के लिए राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का मुख्य जोर उच्च मूल्य वाले पर्यटन को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार करने पर रहेगा। सरकार का प्रयास है कि बेहतर सुविधाओं और परिवहन व्यवस्था के माध्यम से राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाई जाए तथा पर्यटन गतिविधियों का लाभ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने शिमला जिले के नालदेहरा गोल्फ कोर्स में आयोजित ‘कोटी गोल्फ कप-2026’ के समापन समारोह में कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विकास, बेहतर परिवहन व्यवस्था और पर्यटकों के लिए नए आकर्षण तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है, ताकि प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई जा सके।
24 और 25 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय कोटी गोल्फ कप में 80 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के विजेताओं को ट्रॉफियां प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यटन विकास, हवाई सेवाओं के विस्तार और पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन गतिविधियों को लेकर सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया।
पांच साल में पर्यटन क्षेत्र की तस्वीर बदलने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिमला, मनाली, धर्मशाला, कांगड़ा, कुल्लू और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़, धार्मिक स्थल, साहसिक गतिविधियां और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश को पर्यटन के लिहाज से विशिष्ट बनाते हैं। हालांकि, पर्यटन की बढ़ती मांग के साथ बुनियादी ढांचे, परिवहन, ठहरने की सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित निवेश के तहत उच्च मूल्य वाले पर्यटन उत्पादों को प्रोत्साहित करने और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया जाएगा।
उच्च मूल्य वाले पर्यटन का उद्देश्य ऐसे पर्यटन अनुभव विकसित करना है, जिनसे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलें और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो। इसके अंतर्गत बेहतर आवास सुविधाएं, गोल्फ पर्यटन, पर्यावरण आधारित पर्यटन और अन्य विशेष पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं शामिल हैं।
सरकार के लिए चुनौती यह भी होगी कि पर्यटन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का लाभ स्थानीय कारोबारियों, युवाओं और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचे। होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े व्यवसायों को पर्यटन के विस्तार से नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित निवेश का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन और पर्यटकों की मांग पर निर्भर करेगा।
कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार पर खर्च होंगे 3,000 करोड़ रुपये
राज्य में हवाई संपर्क बेहतर बनाने के लिए कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि हवाई अड्डे के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
हवाई अड्डे का विस्तार होने से बड़े विमानों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे राज्य में आने वाले पर्यटकों को हवाई यात्रा के अधिक सुविधाजनक विकल्प मिल सकते हैं। विशेष रूप से कांगड़ा और धर्मशाला क्षेत्र तक पहुंच बेहतर होने से पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
धर्मशाला और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक स्थलों, धार्मिक पर्यटन और अन्य गतिविधियों के कारण पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। बेहतर हवाई संपर्क से देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है। इससे पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां और स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
हालांकि, हवाई अड्डे के विस्तार का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा, जब इसके साथ सड़क संपर्क, स्थानीय परिवहन, ठहरने की सुविधाओं और पर्यटन स्थलों तक पहुंच को भी बेहतर बनाया जाए। सरकार की व्यापक पर्यटन निवेश योजना में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिए जाने का उद्देश्य भी यही है।
उड़ान सेवाओं के लिए 35 करोड़ रुपये की सहायता
हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ व्यवस्था के तहत 35 करोड़ रुपये उपलब्ध करवा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्धारित शर्तों के तहत उन उड़ान सेवाओं को वित्तीय सहायता देना है, जिन्हें शुरुआती दौर में व्यावसायिक आधार पर संचालित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार हवाई सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए इस वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही शिमला से कनेक्टिंग उड़ानें शुरू करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों को दूसरे गंतव्यों तक पहुंचने के लिए बेहतर विकल्प मिल सकें।
हिमाचल प्रदेश का पहाड़ी भूगोल सड़क और रेल संपर्क के विस्तार को कई स्थानों पर चुनौतीपूर्ण बनाता है। ऐसे में हवाई सेवाएं पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय निवासियों और व्यावसायिक यात्रियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती हैं। बेहतर उड़ान संपर्क से यात्रा का समय कम करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
हालांकि, उड़ानों की नियमितता, उपलब्ध सीटों, किरायों और यात्रियों की मांग जैसे कारक भी हवाई सेवाओं की सफलता तय करेंगे। सरकार की योजना है कि परिवहन के इन विकल्पों को मजबूत करके राज्य में पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए।
सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपोर्ट से जोड़ने की योजना
हवाई संपर्क के विस्तार के तहत राज्य सरकार सभी जिला मुख्यालयों को हेलीपोर्ट सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश में कई क्षेत्रों तक पहुंचने में सड़क मार्ग से लंबा समय लग सकता है। ऐसे में हेलीकॉप्टर सेवाओं के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करना पर्यटन और आवागमन दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
हेलीपोर्ट सुविधाओं का विस्तार होने से पर्यटकों को कुछ गंतव्यों तक पहुंचने के वैकल्पिक साधन मिल सकते हैं। इसके अलावा, दूरस्थ क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ संचालन व्यवस्था, मौसम, सुरक्षा मानकों और सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
सरकार का जोर केवल हवाई अड्डों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रकार की हवाई सेवाओं के माध्यम से प्रदेश की पहुंच को बेहतर बनाना भी है। शिमला से कनेक्टिंग उड़ानें शुरू करने के प्रयास इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
यदि हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और उड़ान सेवाओं से संबंधित योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो प्रदेश के पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के विकल्प बढ़ सकते हैं। इससे पर्यटकों को अपनी यात्रा की बेहतर योजना बनाने में सहायता मिलेगी और पर्यटन सीजन के दौरान परिवहन व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
60 इको-टूरिज्म स्थलों से 22 करोड़ रुपये का राजस्व
पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को महत्व देने की बात करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि राज्य में 60 इको-टूरिज्म स्थलों को लीज पर दिया गया है। इन स्थलों से सरकार को 22 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
इको-टूरिज्म का उद्देश्य प्राकृतिक क्षेत्रों की विशेषताओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। हिमाचल प्रदेश के जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक स्थल इस प्रकार के पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। यदि इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों का संचालन निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाए, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
इको-टूरिज्म स्थलों को विकसित करने से पर्यटकों को पारंपरिक पर्यटन केंद्रों के अलावा नए गंतव्यों का अनुभव मिल सकता है। इससे पर्यटन गतिविधियों का विस्तार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक करने की संभावना भी बढ़ती है।
हालांकि, प्राकृतिक स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कचरा प्रबंधन, जल संसाधनों का संरक्षण, स्थानीय जैव विविधता की सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक होगा। पर्यटन का दीर्घकालिक लाभ इसी बात पर निर्भर करेगा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किस तरह संतुलित किया जाता है।
नालदेहरा गोल्फ कोर्स को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर
कोटी गोल्फ कप-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने नालदेहरा गोल्फ कोर्स की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने इसके विकास में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के योगदान की सराहना की।
नालदेहरा शिमला के निकट स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां प्राकृतिक वातावरण और गोल्फ जैसी गतिविधियों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता है। गोल्फ पर्यटन को उच्च मूल्य वाले पर्यटन उत्पादों में शामिल किया जा सकता है, क्योंकि इससे खेल गतिविधियों के साथ आवास, खानपान और अन्य स्थानीय सेवाओं की मांग भी पैदा होती है।
दो दिवसीय कोटी गोल्फ कप में 80 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी ने इस आयोजन को खेल और पर्यटन के मेल के रूप में प्रस्तुत किया। ऐसे आयोजनों से किसी क्षेत्र की पहचान को बढ़ावा मिल सकता है और खिलाड़ियों तथा उनके साथ आने वाले लोगों की आवाजाही से स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना रहती है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि नालदेहरा गोल्फ कोर्स को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोल्फ कोर्स को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है और यह बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित कर रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने गोल्फ कोर्स के विकास के लिए 1.82 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए हैं। इस राशि का उद्देश्य गोल्फ कोर्स की सुविधाओं और पर्यटन संबंधी क्षमता को बेहतर बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
निवेश से रोजगार और स्थानीय कारोबार को मिल सकती है गति
पर्यटन क्षेत्र में प्रस्तावित निवेश का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार सृजन भी है। पर्यटन से होटल, होमस्टे, परिवहन, खानपान, साहसिक गतिविधियों, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को काम मिलता है। नए पर्यटन स्थलों और बेहतर कनेक्टिविटी के विकास से इन क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने की संभावना रहती है।
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। यदि पर्यटन परियोजनाओं में स्थानीय लोगों को रोजगार, प्रशिक्षण और कारोबार के अवसर मिलते हैं, तो इसका लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है।
इसके साथ ही पर्यटन स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास, स्वच्छता, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी। केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा; पर्यटन स्थलों की क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को लागू करना भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू की ओर से घोषित निवेश योजना का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र को अधिक सुविधाजनक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बनाना है। आने वाले पांच वर्षों में इस दिशा में कितनी परियोजनाएं शुरू होती हैं और उनमें कितना निवेश वास्तविक रूप से होता है, यह सरकार की कार्ययोजना और परियोजनाओं के क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश सरकार पर्यटन क्षेत्र में 10,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये तक निवेश की योजना के माध्यम से पर्यटन ढांचे, हवाई कनेक्टिविटी और इको-टूरिज्म को विस्तार देने की तैयारी में है। कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार, उड़ान सेवाओं के लिए वित्तीय सहायता, जिला मुख्यालयों तक हेलीपोर्ट सुविधाओं और नालदेहरा गोल्फ कोर्स के विकास जैसी पहलों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर उनके प्रभाव पर नजर रहेगी।




