होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही, तेल और गैस सप्लाई बहाल होने से भारत समेत एशियाई देशों को राहत की उम्मीद

होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही, तेल और गैस सप्लाई बहाल होने से भारत समेत एशियाई देशों को राहत की उम्मीद

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एक बार फिर तेल और प्राकृतिक गैस से जुड़े जहाजों की आवाजाही शुरू होने के संकेत मिले हैं। पिछले करीब दो महीनों से मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता बनी हुई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक प्रभाव पड़ा। अब हाल के जहाज ट्रैकिंग डेटा और समुद्री गतिविधियों से यह संकेत मिल रहा है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की नियमित आवाजाही बनी रहती है, तो वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति में सुधार देखने को मिल सकता है। इसका सकारात्मक असर भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व से बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और आगे अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, इराक, कतर और ईरान जैसे प्रमुख तेल एवं गैस उत्पादक देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।

ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, दुनिया में समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। इसके अलावा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की वैश्विक आपूर्ति में भी इस मार्ग की अहम भूमिका है।

अपने सबसे संकरे हिस्से में यह जलडमरूमध्य लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है। इसकी सीमित चौड़ाई और भारी जहाज यातायात इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील बनाते हैं।

दो महीने से बना हुआ था तनाव

पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव के कारण इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के मार्गों की समीक्षा शुरू कर दी थी, जबकि कुछ जहाजों ने वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार किया।

इसी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी अस्थिरता देखने को मिली। निवेशकों और ऊर्जा कंपनियों को आशंका थी कि यदि इस समुद्री मार्ग पर लंबी अवधि तक बाधा बनी रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

हालांकि अब सामने आ रही गतिविधियां इस दिशा में राहत का संकेत दे रही हैं।

LNG टैंकर ‘मुबाराज’ की आवाजाही ने बढ़ाया भरोसा

हाल ही में जहाज ट्रैकिंग से जुड़ी जानकारी के अनुसार LNG टैंकर “मुबाराज” सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है।

रिपोर्टों के अनुसार यह जहाज संयुक्त अरब अमीरात के दास द्वीप (Das Island) से तरलीकृत प्राकृतिक गैस लेकर रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान कुछ समय के लिए यह सार्वजनिक ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई नहीं दिया, जिससे बाजार में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

बाद में यह जहाज श्रीलंका के निकट समुद्री क्षेत्र में देखा गया और अब यह चीन की ओर बढ़ रहा है। जहाज की सुरक्षित आवाजाही को इस समुद्री मार्ग पर सामान्य स्थिति लौटने के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

जापान का सुपरटैंकर भी सफलतापूर्वक गुजरा

सिर्फ LNG ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल से भरे बड़े टैंकरों की आवाजाही भी दोबारा शुरू होती दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार जापान की ऊर्जा कंपनी इदेमित्सु कोसान (Idemitsu Kosan) द्वारा संचालित “इदेमित्सु मारू” नामक सुपरटैंकर भी होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है।

बताया गया है कि यह जहाज सऊदी अरब से लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जापान की ओर रवाना हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस जहाज ने संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत सुरक्षित समुद्री मार्ग का चयन किया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि जहाज परिचालन कंपनियां अभी भी पूरी तरह सामान्य स्थिति मानने के बजाय सतर्क रणनीति अपनाए हुए हैं।

अभी भी बनी हुई है सतर्कता

हालांकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती।

कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपना रही हैं। कुछ कंपनियां रीयल-टाइम इंटेलिजेंस, नौसैनिक सुरक्षा सलाह और वैकल्पिक मार्गों की लगातार निगरानी कर रही हैं।

बीमा कंपनियां भी इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के जोखिम का अलग-अलग आकलन कर रही हैं, क्योंकि किसी भी नई भू-राजनीतिक घटना का प्रभाव समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के संबंधों पर भी नजर

ऊर्जा बाजार की स्थिति पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी राजनीतिक घटनाक्रम का भी प्रभाव पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन हाल के दिनों में कुछ नरम संकेत भी देखने को मिले हैं।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से संभावित कूटनीतिक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में किसी भी समझौते या नीति परिवर्तन की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारों द्वारा की जानी बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। देश द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का महत्वपूर्ण हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आता है।

ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो उसका असर भारत के लिए कच्चे तेल की उपलब्धता, आयात लागत और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी रहती है, तो—

  • कच्चे तेल की आपूर्ति में स्थिरता बनी रह सकती है।
  • आयात प्रक्रिया सुचारु रहने की संभावना बढ़ेगी।
  • वैश्विक तेल कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव कम हो सकता है।
  • रिफाइनरियों को नियमित आपूर्ति मिल सकती है।
  • ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता कम होने की संभावना रहेगी।

हालांकि पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल पर ही निर्भर नहीं करतीं। इनमें कर, विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन व्यय और सरकारी नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

चीन और जापान की गतिविधियां क्या संकेत देती हैं?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और जापान जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों की कंपनियों द्वारा फिर से इस मार्ग का उपयोग किया जाना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

यदि बड़ी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां लगातार होर्मुज मार्ग का उपयोग जारी रखती हैं, तो अन्य कंपनियों का भरोसा भी धीरे-धीरे लौट सकता है। इससे वैश्विक समुद्री व्यापार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि कंपनियां फिलहाल जोखिम का लगातार मूल्यांकन कर रही हैं और परिस्थितियों के अनुसार अपने परिचालन निर्णय ले रही हैं।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संभावित असर

होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य होती गतिविधियां केवल तेल उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका प्रभाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

ऊर्जा आपूर्ति में सुधार होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता कम हो सकती है। इससे परिवहन, विमानन, विनिर्माण, पेट्रोकेमिकल उद्योग और अन्य ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों को भी राहत मिलने की संभावना रहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, जहाजों की नियमित आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। यदि वर्तमान सकारात्मक संकेत आगे भी जारी रहते हैं, तो भारत सहित कई एशियाई देशों को ऊर्जा आपूर्ति और आयात प्रबंधन के मोर्चे पर महत्वपूर्ण राहत मिल सकती है।