561 करोड़ के निवेश से बायोगैस सेक्टर में उतरेगी मारुति सुजुकी, CBG प्लांट के जरिए वैकल्पिक ईंधन पर बढ़ाएगी फोकस

561 करोड़ के निवेश से बायोगैस सेक्टर में उतरेगी मारुति सुजुकी, CBG प्लांट के जरिए वैकल्पिक ईंधन पर बढ़ाएगी फोकस

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने भविष्य की ईंधन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) के क्षेत्र में बड़ा निवेश करने का फैसला किया है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 561 करोड़ रुपये की लागत से चार नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि यदि शुरुआती चरण की परियोजनाएं अपेक्षित परिणाम देती हैं तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश और क्षमता दोनों का विस्तार किया जाएगा।

मारुति सुजुकी का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से वैकल्पिक ईंधनों की ओर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ कंपनियां अब ऐसे ईंधन विकल्प तलाश रही हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ मौजूदा वाहन ढांचे में भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकें। इसी रणनीति के तहत कंपनी ने कंप्रेस्ड बायोगैस को अपने भविष्य के ऊर्जा मॉडल का अहम हिस्सा बनाने की योजना तैयार की है।

कंप्रेस्ड बायोगैस को तकनीकी रूप से कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के समान माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे मौजूदा CNG वाहनों में बिना किसी बड़े बदलाव के उपयोग किया जा सकता है। यही कारण है कि इसे स्वच्छ और व्यवहारिक ईंधन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कृषि अवशेष, पशुओं के अपशिष्ट और नगर निकायों से निकलने वाले जैविक कचरे से तैयार होने वाला यह ईंधन न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करता है बल्कि कचरा प्रबंधन की समस्या का समाधान भी प्रदान करता है।

केंद्र सरकार भी लंबे समय से बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर तैयार करना और कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। ऐसे में मारुति सुजुकी का यह निवेश सरकारी नीतियों के अनुरूप माना जा रहा है और इससे देश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि चार परियोजनाओं के जरिए मिलने वाले अनुभव के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि उत्पादन, आपूर्ति और बाजार से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है तो अतिरिक्त संयंत्रों की स्थापना पर भी विचार किया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि कंपनी इस क्षेत्र में केवल शुरुआती निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इसे दीर्घकालिक कारोबारी अवसर के रूप में देख रही है।

मारुति सुजुकी की यह योजना उसकी मूल कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्प की गुजरात में चल रही बायोगैस पहल से भी प्रेरित है। गुजरात में संचालित परियोजना से मिले शुरुआती सकारात्मक परिणामों के बाद अब कंपनी ने बड़े स्तर पर विस्तार का निर्णय लिया है। इस अनुभव के आधार पर उत्पादन प्रक्रिया, आपूर्ति व्यवस्था और लागत प्रबंधन को और बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में केवल मारुति सुजुकी ही नहीं, बल्कि कई अन्य वाहन निर्माता भी वैकल्पिक ईंधन पर तेजी से काम कर रहे हैं। टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियां पहले से ही CNG और LNG आधारित कमर्शियल वाहनों के पोर्टफोलियो को मजबूत कर रही हैं। साथ ही ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न फ्यूल रिटेल कंपनियों के साथ साझेदारी भी कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक पेट्रोल और डीजल के मुकाबले वैकल्पिक ईंधनों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ेगी।

मारुति सुजुकी ने यह बड़ी घोषणा अपनी पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों के साथ की है। कंपनी के अनुसार हरियाणा के खरखौदा स्थित दूसरे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में उत्पादन शुरू होने से उसकी निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नए संयंत्र के चालू होने से कंपनी बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा करने की स्थिति में पहुंच गई है।

कंपनी ने बताया कि तिमाही समाप्त होने तक उसके डीलर नेटवर्क के पास लगभग 13 दिनों का वाहन स्टॉक उपलब्ध था, जिसे संतुलित स्तर माना जा रहा है। इससे बाजार में वाहनों की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिली और मांग के अनुरूप सप्लाई जारी रही।

अप्रैल से जून की अवधि के दौरान मारुति सुजुकी ने कुल 6,82,700 वाहनों की बिक्री दर्ज की। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 29.3 प्रतिशत अधिक है। बिक्री में आई यह वृद्धि बताती है कि बाजार में कंपनी के वाहनों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

घरेलू बाजार में छोटी कारों की बिक्री में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। कंपनी के मुताबिक इस श्रेणी में बिक्री 34.1 प्रतिशत बढ़ी। वहीं स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल यानी SUV सेगमेंट में 44.6 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो ग्राहकों की बदलती पसंद को दर्शाती है। भारतीय बाजार में SUV की मांग लगातार बढ़ रही है और मारुति सुजुकी ने भी इस सेगमेंट में अपने पोर्टफोलियो का विस्तार किया है।

केवल घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा। पहली तिमाही में निर्यात 28.6 प्रतिशत बढ़ा। विभिन्न देशों में भारतीय निर्मित वाहनों की बढ़ती मांग का लाभ कंपनी को मिला और निर्यात कारोबार में मजबूती देखने को मिली।

इन बेहतर बिक्री आंकड़ों का असर कंपनी की बाजार हिस्सेदारी पर भी दिखाई दिया। घरेलू यात्री वाहन बाजार में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी बढ़कर 41.2 प्रतिशत हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद कंपनी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रही है।

राजस्व के मोर्चे पर भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में उसकी नेट सेल्स 36 प्रतिशत बढ़कर 49,959 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि बिक्री और आय में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। इस अवधि में शुद्ध लाभ 3,352 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 3,758 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी के नेट प्रॉफिट में करीब 11 प्रतिशत की कमी आई।

मारुति सुजुकी ने मुनाफे में गिरावट की मुख्य वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को बताया है। कंपनी के अनुसार इस तिमाही के दौरान स्टील और अन्य आवश्यक कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ती रही। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों ने आपूर्ति श्रृंखला और लागत दोनों पर अतिरिक्त दबाव बनाया। परिणामस्वरूप बिक्री बढ़ने के बावजूद लाभ मार्जिन प्रभावित हुआ।

लागत में वृद्धि का असर कम करने के लिए कंपनी ने इस वर्ष दो अलग-अलग अवसरों पर अपने वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी की। कंपनी का कहना है कि इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ने के कारण मूल्य संशोधन करना आवश्यक हो गया था। हालांकि कीमतें बढ़ाने के बावजूद बाजार में वाहनों की मांग पर कोई बड़ा नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऑटोमोबाइल उद्योग में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह के ईंधन विकल्प साथ-साथ विकसित किए जाएंगे। कंप्रेस्ड बायोगैस, CNG, LNG, हाइब्रिड तकनीक और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिलकर भविष्य के परिवहन क्षेत्र का आधार बन सकते हैं। मारुति सुजुकी का नया निवेश इसी व्यापक रणनीति की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कंपनी का मानना है कि यदि देश में बायोगैस उत्पादन और वितरण का मजबूत नेटवर्क तैयार होता है तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को अतिरिक्त आर्थिक अवसर मिलेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी। इसी सोच के साथ कंपनी ने 561 करोड़ रुपये के निवेश वाली इन परियोजनाओं को मंजूरी दी है और भविष्य में इनके सफल संचालन के आधार पर इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की योजना बनाई है।