मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित पंजाब मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य प्रशासन, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, शहरी विकास और पर्यावरण से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में लिए गए फैसलों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना, विभिन्न वर्गों को राहत प्रदान करना और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया।
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने कुल छह महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें मेडिकल शिक्षकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिवक्ताओं को एडवोकेट जनरल कार्यालय में अधिक अवसर देने, इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अलॉटियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लागू करने, ब्लॉकों के पुनर्गठन और ईको सेंसिटिव जोन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी, अनुभवी विशेषज्ञों की सेवाएं लंबे समय तक उपलब्ध रहेंगी, शहरी विकास परियोजनाओं में लंबित मामलों का समाधान होगा तथा प्रशासनिक कार्यों में अधिक दक्षता आएगी।
कैबिनेट बैठक में कई विभागों से जुड़े प्रस्तावों को मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रिमंडल ने उन योजनाओं को प्राथमिकता दी जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सामाजिक न्याय से जुड़े वर्गों पर पड़ता है।
सरकार का मानना है कि समय के साथ बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए प्रशासनिक और नीतिगत सुधार आवश्यक हैं, ताकि सरकारी संस्थानों की कार्यक्षमता बढ़ाई जा सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर
बैठक में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों तथा सरकारी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को अधिक समय तक बनाए रखने का निर्णय प्रमुख रहा।
सरकार का मानना है कि अनुभवी चिकित्सकों और शिक्षकों की उपलब्धता से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता तथा मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।
मेडिकल शिक्षकों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, SC/ST अधिवक्ताओं और इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट अलॉटियों को मिलेगी राहत
मेडिकल टीचिंग फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष
कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में मेडिकल कॉलेजों की शिक्षण फैकल्टी की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाना शामिल है। पहले एमबीबीएस और एमडी विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले प्रोफेसरों की रिटायरमेंट आयु 62 वर्ष निर्धारित थी। अब इसे बढ़ाकर 65 वर्ष कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार इस निर्णय का लाभ वर्तमान में कार्यरत लगभग 41 मेडिकल प्रोफेसरों को मिलेगा। इससे अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं तीन वर्ष अतिरिक्त अवधि तक उपलब्ध रहेंगी, जिससे मेडिकल शिक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी मिला बड़ा लाभ
सरकार ने मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट डॉक्टर) के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष थी। अब ऐसे डॉक्टरों को 65 वर्ष की आयु तक संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर सेवा जारी रखने का अवसर दिया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत 58 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद इच्छुक विशेषज्ञ डॉक्टर सात वर्ष तक अनुबंध पर अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
अंतिम वेतन के आधार पर मिलेगा पारिश्रमिक
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि जिन विशेषज्ञ डॉक्टरों को अनुबंध पर सेवा विस्तार दिया जाएगा, उन्हें 58 वर्ष की आयु में प्राप्त अंतिम वेतन को आधार बनाकर पारिश्रमिक प्रदान किया जाएगा।
इससे अनुभवी चिकित्सकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता भी बनी रहेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है सकारात्मक प्रभाव
सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से चुनौती मानी जाती रही है। कई विभागों में अनुभवी चिकित्सकों के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त पदों को भरने में समय लगता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे डॉक्टरों की विशेषज्ञता का लाभ मरीजों और मेडिकल विद्यार्थियों दोनों को अधिक समय तक मिल सकेगा।
AG ऑफिस में SC/ST अधिवक्ताओं के लिए 58 पद आरक्षित
कैबिनेट ने पंजाब लॉ ऑफिसर्स (एंगेजमेंट) एक्ट, 2017 में संशोधन को भी मंजूरी प्रदान की है। इस संशोधन के माध्यम से एडवोकेट जनरल कार्यालय में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिवक्ताओं के लिए 58 पद आरक्षित किए गए हैं।
सरकार का उद्देश्य उच्च स्तर के विधिक पदों पर सामाजिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाना बताया गया है।
खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया होगी तेज
सरकार ने जानकारी दी कि आरक्षित पदों में से कई पद लंबे समय से खाली हैं। संशोधन के तहत आय संबंधी पात्रता में 50 प्रतिशत तक की छूट देकर भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
इससे खाली पड़े लगभग 15 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना जताई गई है।
उच्च विधिक पदों पर भी मिलेगा आरक्षण
नई व्यवस्था लागू होने के बाद एडवोकेट जनरल कार्यालय के विभिन्न वरिष्ठ पदों पर भी आरक्षण का लाभ उपलब्ध होगा। इनमें सीनियर एडवोकेट जनरल, एडिशनल एडवोकेट जनरल, सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल, डिप्टी एडवोकेट जनरल तथा असिस्टेंट एडवोकेट जनरल जैसे पद शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इससे योग्य अधिवक्ताओं को उच्च पदों पर अवसर प्राप्त होंगे।
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट अलॉटियों के लिए OTS योजना लागू
कैबिनेट ने इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अलॉटियों को राहत देने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लागू करने का निर्णय भी लिया है।
इस योजना के अंतर्गत लंबित मामलों में लगाए गए पीनल इंटरेस्ट को पूरी तरह माफ किया जाएगा। साथ ही नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस पर लगाए गए जुर्माने का केवल 50 प्रतिशत ही जमा करना होगा।
प्रदेशभर के अलॉटियों को मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार यह योजना राज्यभर के विभिन्न इम्प्रूवमेंट ट्रस्टों के लाभार्थियों पर लागू होगी। इससे लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान आसान हो सकेगा और कई लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी।
इससे पहले सरकार विभिन्न विकास प्राधिकरणों और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी वन टाइम सेटलमेंट योजनाएं लागू कर चुकी है।
ब्लॉकों के पुनर्गठन को भी मिली मंजूरी
मंत्रिमंडल ने राज्य में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की है। सरकार के अनुसार भौगोलिक परिस्थितियों, प्रशासनिक सुविधा और कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए मौजूदा ब्लॉकों का पुनर्गठन किया जाएगा।
इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
100 मीटर ईको सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव स्वीकृत
कैबिनेट ने राज्य के वन क्षेत्रों के चारों ओर 100 मीटर तक ईको सेंसिटिव जोन लागू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह प्रस्ताव आगे अंतिम स्वीकृति के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वन क्षेत्रों की सुरक्षा, जैव विविधता का संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।
प्रशासनिक सुधार और विकास पर सरकार का फोकस
कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशासनिक सुधार, सामाजिक न्याय, शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में समान रूप से कार्य करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
सरकार का दावा है कि इन फैसलों के लागू होने के बाद विभिन्न विभागों में कार्यक्षमता बढ़ेगी, अनुभवी मानव संसाधन का बेहतर उपयोग होगा तथा कई लंबित मामलों का समाधान तेजी से किया जा सकेगा।




