UP में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला, योगी सरकार बनाएगी ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ (UPCOS)
उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए “उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम” (UPCOS) के गठन का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह कार्य प्रणाली उपलब्ध कराना है।
प्रदेश के विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत हैं। समय-समय पर वेतन भुगतान में देरी, वेतन कटौती, ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ न मिलने, पारदर्शी चयन प्रक्रिया के अभाव तथा सेवा सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार अब एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित करने की तैयारी कर रही है।

उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश
शुक्रवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रस्तावित निगम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के योगदान को महत्वपूर्ण मानती है और उनकी सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि निगम का ढांचा ऐसा तैयार किया जाए जिससे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा हो, चयन प्रक्रिया पारदर्शी बने और सेवा प्रदाता एजेंसियों की जवाबदेही भी तय हो सके।
UPCOS का उद्देश्य क्या होगा?
प्रस्तावित उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी विभागों में आउटसोर्सिंग प्रक्रिया को एक समान नियमों के तहत संचालित करना है। इससे अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सरकार चाहती है कि नियुक्ति से लेकर वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, सेवा शर्तों और शिकायत निवारण तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनाई जाए। इससे कर्मचारियों तथा विभागों दोनों को सुविधा मिलेगी।
वेतन, ईपीएफ और सेवा सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि आउटसोर्स कर्मचारियों का पूरा पारिश्रमिक प्रत्येक माह की 5 तारीख तक उनके बैंक खातों में जमा होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कर्मचारियों के ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) का अंशदान समय पर संबंधित खातों में जमा कराया जाए। यदि कोई एजेंसी इस संबंध में नियमों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मनमाने तरीके से सेवा समाप्त नहीं कर सकेंगी एजेंसियां
सरकार प्रस्तावित निगम में ऐसा प्रावधान शामिल करना चाहती है जिससे कोई भी आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी की सेवाएं मनमाने तरीके से समाप्त न कर सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि किसी भी कर्मचारी को तब तक नहीं हटाया जाए जब तक संबंधित विभाग के सक्षम अधिकारी की संस्तुति प्राप्त न हो।
इस व्यवस्था से कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा मिलने की उम्मीद है और अनुचित तरीके से नौकरी समाप्त किए जाने की शिकायतों में कमी आ सकती है।
नियमों के उल्लंघन पर एजेंसियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि कोई सेवा प्रदाता एजेंसी कर्मचारियों का वेतन रोकती है, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं देती या अन्य नियमों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग, डिबार, आर्थिक दंड और वैधानिक कार्रवाई जैसे प्रावधान किए जाएं।
सरकार चाहती है कि एजेंसियों की जवाबदेही स्पष्ट हो ताकि कर्मचारियों के अधिकारों का संरक्षण प्रभावी तरीके से किया जा सके।
आरक्षण नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी निर्देश दिए कि निगम के माध्यम से होने वाली सभी नियुक्तियों में राज्य सरकार के आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाए। भर्ती प्रक्रिया मेरिट आधारित होने के साथ-साथ सभी वैधानिक नियमों के अनुरूप संचालित की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सभी पात्र अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर प्रदान करने वाली हो।
मेडिकल सुविधा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का मिलेगा लाभ
प्रस्तावित निगम के माध्यम से कर्मचारियों को केवल वेतन संबंधी सुरक्षा ही नहीं बल्कि अन्य सामाजिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेडिकल सुविधा, मातृत्व अवकाश, दुर्घटना बीमा, पेंशन और पारिवारिक पेंशन जैसे लाभ भी नियमानुसार उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
इन प्रावधानों से लंबे समय से आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा उठाई जा रही कई प्रमुख मांगों को संबोधित करने का प्रयास किया जाएगा।
तीन पक्षीय व्यवस्था के तहत होगी पूरी प्रक्रिया
सरकार के प्रस्ताव के अनुसार विभाग, उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम तथा सेवा प्रदाता एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे प्रत्येक पक्ष की जिम्मेदारियां स्पष्ट रहेंगी और विवाद की स्थिति में जवाबदेही तय करना आसान होगा।
इस मॉडल के माध्यम से भर्ती, भुगतान, अनुबंध, निगरानी और शिकायत निवारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा सकेगी।
GeM पोर्टल के माध्यम से होगा एजेंसियों का चयन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुझाव दिया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों का चयन सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से किया जाए। इससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और प्रतिस्पर्धा के आधार पर योग्य एजेंसियों का चयन संभव हो सकेगा।
सरकार का प्रस्ताव है कि एजेंसियों का चयन तीन वर्षों की निर्धारित अवधि के लिए किया जाए, ताकि कार्यों में निरंतरता बनी रहे और प्रशासनिक प्रक्रिया बार-बार प्रभावित न हो।
वर्तमान कर्मचारियों की सेवाएं रहेंगी सुरक्षित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नई व्यवस्था लागू होने के दौरान वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं बाधित नहीं होनी चाहिए। सरकार का उद्देश्य केवल व्यवस्था में सुधार करना है, न कि पहले से कार्यरत कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी देना।
इसलिए प्रस्ताव तैयार करते समय ऐसे सभी प्रावधान शामिल करने को कहा गया है जिससे संक्रमण काल के दौरान कर्मचारियों के हित सुरक्षित रह सकें।
आधुनिक तकनीक के जरिए होगी निगरानी
प्रस्तावित निगम के अंतर्गत आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर नियुक्ति, उपस्थिति, भुगतान, ईपीएफ जमा, ईएसआई रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं की निगरानी की जाएगी। इससे रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण होगा और कर्मचारियों को अपनी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाए जाने की योजना है।
राज्य और जिला स्तर पर गठित होंगी समितियां
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निगम के संचालन के लिए एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाए। इसके अंतर्गत बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, सलाहकार समिति, राज्य स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जाएगा।
इन समितियों का उद्देश्य निगम के कार्यों की नियमित समीक्षा करना, नीतिगत निर्णय लेना तथा कर्मचारियों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।
सरकार ने अधिकारियों से जल्द प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार सभी कार्मिकों की गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रस्तावित उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े प्रशासनिक कार्य अधिक सुव्यवस्थित होंगे तथा विभागों और सेवा प्रदाता एजेंसियों के बीच समन्वय भी बेहतर बनाया जा सकेगा।




