पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और विवादों को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब एस.सी. कमीशन ने अलग-अलग मामलों में केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को 15 जून को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए हैं।
आयोग के समक्ष लंबित मामलों में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों, सार्वजनिक बयानों और अनुसूचित जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर शिकायतें दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों की प्रारंभिक जांच और संबंधित पक्षों से प्राप्त रिपोर्टों के बाद आयोग ने तीनों नेताओं से व्यक्तिगत रूप से अपना पक्ष रखने को कहा है।
रवनीत बिट्टू से जुड़े मामले पर आयोग की नजर
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद को लेकर तलब किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय स्तर पर पुलिसकर्मियों के साथ हुई बहस के दौरान कुछ ऐसी टिप्पणियां की गईं, जिन पर आपत्ति जताई गई। मामले के सामने आने के बाद आयोग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी और जांच प्रक्रिया शुरू की थी।
सूत्रों के अनुसार, आयोग पहले भी इस मामले में सुनवाई कर चुका है और अब मंत्री को स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। हालांकि इस विवाद को लेकर बिट्टू पहले सार्वजनिक रूप से खेद भी जता चुके हैं।
प्रताप बाजवा के खिलाफ दो मामलों की सुनवाई
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा को दो अलग-अलग शिकायतों के संबंध में आयोग के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। एक मामला चुनावी गतिविधियों के दौरान धार्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की तस्वीरों के उपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि दूसरा मामला एक मंत्री के संबंध में दिए गए कथित विवादित बयान से संबंधित है।
इन मामलों में पहले भी कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई हो चुकी है। आयोग का कहना है कि शिकायतों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले संबंधित नेता का पक्ष सुनना आवश्यक है। इसी कारण उन्हें निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने को कहा गया है।
राजा वड़िंग भी आयोग के दायरे में
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ भी कई शिकायतें आयोग के पास पहुंची थीं। इनमें कुछ सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ बयान अनुसूचित जाति समुदाय और उससे जुड़े नेताओं की भावनाओं को प्रभावित करने वाले थे।
आयोग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजा वड़िंग को भी नोटिस जारी किया है। उनसे कहा गया है कि वे आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करें।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
तीनों प्रमुख नेताओं को नोटिस जारी होने के बाद पंजाब की राजनीति में चर्चा का माहौल गर्म हो गया है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।
आयोग की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि सुनवाई का उद्देश्य शिकायतों के तथ्यों की जांच करना और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देना है। अब 15 जून को होने वाली सुनवाई पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके बाद आयोग आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला ले सकता है।




