चंडीगढ़ प्रशासन को आबकारी क्षेत्र से इस वर्ष बड़ी सफलता मिली है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आयोजित शराब ठेकों की नीलामी में सभी खुदरा लाइसेंस आवंटित हो गए हैं, जिससे प्रशासन को रिकॉर्ड स्तर का राजस्व मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले लगभग दस वर्षों में यह पहला अवसर है जब नीलामी के दौरान उपलब्ध कराए गए सभी शराब ठेकों का सफलतापूर्वक आवंटन हुआ है।
आबकारी विभाग का मानना है कि नीलामी प्रक्रिया में मिली शानदार प्रतिक्रिया न केवल शराब कारोबार से जुड़े व्यापारियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि प्रशासन की नीतियां निवेशकों और कारोबारियों के लिए आकर्षक साबित हो रही हैं। पारदर्शी प्रक्रिया और स्पष्ट नियमों के कारण बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने नीलामी में रुचि दिखाई, जिसके परिणामस्वरूप अपेक्षा से कहीं अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।
रिजर्व प्राइस से काफी अधिक मिली बोली
प्रशासन द्वारा 97 खुदरा शराब ठेकों के लिए कुल 453.05 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया था। हालांकि नीलामी के दौरान प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक रही कि कुल बोलियां 563.78 करोड़ रुपये तक पहुंच गईं। इस प्रकार प्रशासन को निर्धारित आधार मूल्य की तुलना में 110.73 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त हुए।
यदि प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो यह बढ़ोतरी लगभग 24.44 प्रतिशत है, जो आबकारी विभाग के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी अतिरिक्त आय यह दर्शाती है कि बाजार में कारोबार की संभावनाएं मजबूत हैं और व्यापारिक समुदाय को भविष्य में बेहतर अवसर दिखाई दे रहे हैं।
एक दशक बाद बना नया रिकॉर्ड
चंडीगढ़ प्रशासन के लिए यह नीलामी कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुई है। पिछले वर्षों में कई बार कुछ ठेकों के लिए अपेक्षित बोली नहीं मिल पाती थी या फिर कुछ लाइसेंस खाली रह जाते थे। लेकिन इस बार सभी 97 ठेकों का आवंटन सफलतापूर्वक हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि शराब कारोबार से जुड़े नियमों में स्पष्टता, डिजिटल प्रक्रियाओं का उपयोग, बेहतर निगरानी व्यवस्था और नीति में स्थिरता जैसे कारकों ने कारोबारियों का भरोसा बढ़ाया है। यही वजह रही कि नीलामी में प्रतिस्पर्धा भी अधिक देखने को मिली और प्रशासन को अपेक्षा से बेहतर वित्तीय परिणाम प्राप्त हुए।
आबकारी नीति को मिला सकारात्मक संकेत
आबकारी विभाग का कहना है कि वर्ष 2026-27 की नीति को उद्योग जगत से अच्छा समर्थन मिला है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नीलामी के नतीजे यह संकेत देते हैं कि व्यापारियों को प्रशासन की कार्यप्रणाली और नीतिगत ढांचे पर भरोसा है।
विभाग का मानना है कि जब कारोबारियों को नीति में पारदर्शिता और स्थिरता दिखाई देती है, तो वे लंबे समय तक निवेश करने और अधिक प्रतिस्पर्धी बोलियां लगाने के लिए तैयार रहते हैं। इस बार के परिणाम इसी विश्वास का प्रमाण माने जा रहे हैं।
वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी रही उत्साहजनक
सिर्फ नीलामी ही नहीं, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों में राजस्व संग्रह के आंकड़े भी प्रशासन के लिए राहत भरे रहे हैं। विभाग के अनुसार, 31 मई 2026 तक आबकारी मद से 199.78 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया जा चुका है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरे वर्ष के लिए 1,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यानी वित्तीय वर्ष के शुरुआती दो महीनों में ही कुल लक्ष्य का लगभग 20 प्रतिशत राजस्व प्राप्त कर लिया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही तो निर्धारित लक्ष्य को हासिल करना कठिन नहीं होगा। साथ ही वर्ष के आगामी महीनों में राजस्व संग्रह में और वृद्धि होने की संभावना भी जताई जा रही है।
मजबूत प्रवर्तन और बेहतर निगरानी का असर
प्रशासन का कहना है कि राजस्व में बढ़ोतरी केवल नीलामी प्रक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रभावी निगरानी व्यवस्था और प्रवर्तन तंत्र की भी अहम भूमिका रही है।
पिछले कुछ वर्षों में विभाग ने अवैध शराब की बिक्री रोकने, कर चोरी पर अंकुश लगाने और लाइसेंसधारकों द्वारा नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई जैसी व्यवस्थाओं ने राजस्व संग्रह को बेहतर बनाने में मदद की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण होता है और लाइसेंसधारी कारोबारी समान नियमों के तहत काम करते हैं, तो सरकारी राजस्व में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है। चंडीगढ़ में भी यही रुझान देखने को मिल रहा है।
विकास परियोजनाओं को मिलेगा बल
आबकारी राजस्व केंद्र शासित प्रदेश के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इस क्षेत्र से प्राप्त अतिरिक्त धनराशि का उपयोग विभिन्न विकास कार्यों और जनहित योजनाओं में किया जा सकता है।
प्रशासन का मानना है कि नीलामी से प्राप्त रिकॉर्ड राजस्व शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नागरिक सुविधाओं में सुधार लाने और विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं को गति देने में सहायक होगा।
विशेष रूप से सड़क, स्वच्छता, सार्वजनिक सेवाओं, शहरी विकास और अन्य प्रशासनिक परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। इससे शहर के विकास कार्यक्रमों को और मजबूती मिलेगी।
पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रही नीलामी प्रक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि पूरी नीलामी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया। सभी पात्र प्रतिभागियों को समान अवसर प्रदान किए गए, जिससे अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सकी।
इस पारदर्शिता का परिणाम यह रहा कि बोलीदाताओं ने खुलकर हिस्सा लिया और कई ठेकों के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां देखने को मिलीं। इससे प्रशासन को बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ और राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
प्रशासन ने नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी कारोबारियों और हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी जवाबदेह प्रशासन, नियामकीय अनुपालन और पारदर्शी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
- कुल 97 खुदरा शराब ठेकों का सफल आवंटन।
- सभी लाइसेंसों की नीलामी पूरी होने से नया रिकॉर्ड कायम।
- 453.05 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य निर्धारित था।
- कुल 563.78 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।
- 110.73 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व हासिल हुआ।
- रिजर्व प्राइस की तुलना में 24.44 प्रतिशत अधिक आय।
- 31 मई 2026 तक 199.78 करोड़ रुपये की आबकारी वसूली।
- पूरे वर्ष के लिए 1,000 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य।
- शुरुआती दो महीनों में ही लक्ष्य का लगभग 20 प्रतिशत हासिल।
चंडीगढ़ प्रशासन के लिए यह उपलब्धि केवल राजस्व वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की आबकारी व्यवस्था में बढ़ते भरोसे, प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का भी संकेत है। सभी ठेकों के सफल आवंटन और रिकॉर्ड बोली राशि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आबकारी क्षेत्र आने वाले समय में भी केंद्र शासित प्रदेश की आय का एक मजबूत स्तंभ बना रहेगा।



