हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में संचालित पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विद्यार्थियों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने और भोजन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी तथा व्यवस्थित बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब राज्य के सभी जिलों में इस योजना की हर महीने समीक्षा की जाएगी और इसकी विस्तृत रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ धर्म, जाति, लिंग या किसी अन्य आधार पर किसी भी प्रकार का अलग व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कहीं से भी भेदभाव, अनियमितता या शिकायत की सूचना मिलती है तो संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी और उसकी जानकारी विभाग को देनी होगी।
भोजन के समय सभी बच्चों के लिए समान व्यवस्था
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि दोपहर का भोजन विद्यार्थियों को पूरी समानता के साथ परोसा जाए। किसी भी बच्चे को अलग बैठाने, अलग पंक्ति में खड़ा करने या किसी अन्य प्रकार का विभाजन करने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि भोजन वितरण की प्रक्रिया को अधिक अनुशासित और समावेशी बनाया जाए।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को रोल नंबर के आधार पर क्रमबद्ध तरीके से भोजन कराया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों के बीच किसी प्रकार के सामाजिक या अन्य आधार पर विभाजन की संभावना कम होगी और सभी विद्यार्थी समान वातावरण में भोजन कर सकेंगे।
हर माह तैयार होगी निगरानी रिपोर्ट
शिक्षा विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों को इस योजना की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रत्येक जिले के उप शिक्षा निदेशक हर महीने स्कूलों से जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट में यह उल्लेख करना होगा कि संबंधित जिले के किसी स्कूल से पीएम पोषण योजना को लेकर कोई शिकायत प्राप्त हुई है या नहीं।
यदि किसी स्कूल में विद्यार्थियों के साथ भेदभाव, भोजन की गुणवत्ता में कमी, वितरण में अनियमितता या किसी अन्य प्रकार की समस्या सामने आती है तो उसकी पूरी जानकारी रिपोर्ट में शामिल करनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई और समस्या का समाधान किस प्रकार किया गया।
औचक निरीक्षण करेंगे अधिकारी
स्कूल शिक्षा विभाग ने केवल कागजी रिपोर्ट तक ही निगरानी को सीमित नहीं रखा है। जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को समय-समय पर स्कूलों का अचानक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन निरीक्षणों के दौरान अधिकारी भोजन की गुणवत्ता, रसोई व्यवस्था, स्वच्छता, बच्चों के साथ व्यवहार और भोजन वितरण की प्रक्रिया की जांच करेंगे। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमित निरीक्षण से स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी और योजना का लाभ वास्तविक रूप से विद्यार्थियों तक पहुंचेगा।
सामाजिक समानता का माध्यम बनेगी योजना
सरकार पीएम पोषण योजना को केवल पोषण कार्यक्रम के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देने वाले अभियान के रूप में भी देख रही है।
विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि भोजन वितरण के दौरान विद्यार्थियों में समानता, अनुशासन, सहयोग और सामाजिक सौहार्द जैसे मूल्यों को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। अधिकारियों का मानना है कि जब अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं तो उनमें आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
भेदभाव करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, स्कूल कर्मी या अन्य व्यक्ति विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने संकेत दिया है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। विभाग का कहना है कि बच्चों के अधिकारों और सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
शिकायतों के लिए हेल्पलाइन को बनाया जाएगा अधिक सक्रिय
पीएम पोषण योजना से जुड़ी शिकायतों और सुझावों के लिए स्थापित टोल-फ्री हेल्पलाइन को भी अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि हेल्पलाइन नंबर को प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए ताकि विद्यार्थी, अभिभावक और आम नागरिक आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
निदेशालय स्तर पर संचालित टोल-फ्री नंबर 1800-180-8007 पर कार्यदिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। विभाग चाहता है कि अधिक से अधिक लोगों को इस सुविधा की जानकारी मिले ताकि किसी भी समस्या की सूचना सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सके।
स्कूल प्रबंधन समितियों की भी होगी भागीदारी
शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) को भी इस अभियान का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एसएमसी सदस्यों और स्थानीय समुदाय को नए दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाए।
सरकार का मानना है कि जब स्थानीय समुदाय निगरानी प्रक्रिया में शामिल होगा तो स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और विद्यार्थियों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
केंद्र और राज्य मिलकर चलाते हैं योजना
हिमाचल प्रदेश में पीएम पोषण योजना का संचालन केंद्र और राज्य सरकार की साझेदारी से किया जाता है। पर्वतीय राज्यों के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत इस योजना का वित्तीय बोझ 90:10 के अनुपात में साझा किया जाता है, जिसमें 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है।
वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को लगभग 110 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष मिड-डे मील वर्करों और सहायकों के मानदेय में वृद्धि का मुद्दा भी उठाया है।
लाखों बच्चों को मिलता है लाभ
राज्य के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले लगभग 4.82 लाख विद्यार्थियों को प्रतिदिन पीएम पोषण योजना का लाभ मिलता है। इस विशाल व्यवस्था को संचालित करने के लिए 21,532 मिड-डे मील वर्कर और हेल्पर कार्यरत हैं।
इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी भोजन तैयार करने, वितरण सुनिश्चित करने और स्वच्छता संबंधी मानकों का पालन कराने की होती है। सरकार का मानना है कि इन कर्मियों की भूमिका विद्यार्थियों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में बेहद महत्वपूर्ण है।
पोषण स्तर बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पहल
हिमाचल प्रदेश ने हाल के वर्षों में विद्यार्थियों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई अतिरिक्त कदम भी उठाए हैं। नियमित दोपहर के भोजन के अलावा सप्ताह में दो दिन बच्चों को अंडा और केला उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यार्थियों को संतुलित और पौष्टिक आहार मिले, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायता हो। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर पोषण से बच्चों की उपस्थिति, सीखने की क्षमता और स्वास्थ्य में सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।
शिक्षा के साथ समानता का संदेश
नई व्यवस्था के जरिए हिमाचल सरकार केवल भोजन वितरण प्रणाली को मजबूत नहीं करना चाहती, बल्कि स्कूलों में समानता और सामाजिक न्याय का वातावरण भी विकसित करना चाहती है। मासिक निगरानी, औचक निरीक्षण, हेल्पलाइन व्यवस्था और सख्त अनुशासनात्मक प्रावधानों के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर बच्चा सम्मान और समान अधिकार के साथ शिक्षा तथा पोषण का लाभ प्राप्त कर सके।
सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से पीएम पोषण योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी तथा स्कूलों में भेदभाव की किसी भी संभावना पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकेगा।




