भारत में परिवहन क्षेत्र को स्वच्छ और सस्ता बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने घोषणा की है कि देश में 100 प्रतिशत इथेनॉल को वाहन ईंधन के रूप में उपयोग करने की मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही भारत वैकल्पिक ईंधनों की दिशा में एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है।
नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने बताया कि इस संबंध में आवश्यक नियमों और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं और अब उद्योग जगत को इसके अनुरूप आगे बढ़ने का रास्ता मिल गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटेगी तथा पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
अगले कुछ सप्ताह में लॉन्च हो सकते हैं नए मॉडल
सरकार की मंजूरी के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां पूरी तरह इथेनॉल आधारित वाहन बाजार में लाने की दिशा में काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि आने वाले लगभग छह सप्ताह के भीतर कई नए मॉडल भारतीय सड़कों पर दिखाई दे सकते हैं। इनमें Toyota Motor Corporation, Suzuki Motor Corporation, MG Motor और Hyundai Motor Company जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां ऐसे वाहन पेश करने की तैयारी में हैं जो पूरी तरह इथेनॉल ईंधन पर संचालित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये वाहन सफल रहते हैं तो भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे उपभोक्ताओं को ईंधन के नए विकल्प मिलेंगे और पारंपरिक पेट्रोल वाहनों का दबदबा धीरे-धीरे कम हो सकता है।
क्यों जरूरी माना जा रहा है यह फैसला?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करते हैं। हर वर्ष अरबों डॉलर विदेशी मुद्रा पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर खर्च किए जाते हैं। इससे न केवल देश का व्यापार घाटा बढ़ता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
सरकार का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले इथेनॉल का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ता है तो विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी। इससे देश के आयात बिल में कमी आएगी और ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे फायदा मिलने की उम्मीद है। चूंकि इथेनॉल का उत्पादन कृषि आधारित कच्चे माल से किया जाता है, इसलिए किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो सकते हैं। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ने से कृषि क्षेत्र को नई गति मिलने की संभावना है।
पेट्रोल से सस्ता पड़ सकता है इथेनॉल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इथेनॉल आर्थिक दृष्टि से भी एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। पेट्रोल की तुलना में इसकी लागत कम रहने की संभावना है, जिससे वाहन मालिकों का ईंधन खर्च घट सकता है।
हाल के वर्षों में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें आम लोगों की चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में यदि इथेनॉल आधारित वाहन व्यापक स्तर पर उपलब्ध होते हैं और ईंधन की आपूर्ति सुचारु रहती है, तो लोगों को राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ईंधन खर्च में कमी आने से परिवहन लागत भी घट सकती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
प्रदूषण कम करने में भी मिलेगी मदद
इथेनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन और कई हानिकारक गैसों में कमी लाई जा सकती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं।
भारत में बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या के कारण वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। कई महानगरों में प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है। ऐसे में इथेनॉल आधारित वाहनों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि स्वच्छ ईंधन के उपयोग से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिलेगी और कार्बन फुटप्रिंट कम किया जा सकेगा।
आखिर क्या है इथेनॉल?
इथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जिसे जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। यह मुख्य रूप से शर्करा और स्टार्च युक्त पदार्थों के किण्वन (फर्मेंटेशन) की प्रक्रिया से बनाया जाता है। इसे लंबे समय से पेट्रोल में मिलाकर मिश्रित ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन अब इसे पूर्ण रूप से वाहन ईंधन के रूप में अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
भारत में इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है। हालांकि इसके अलावा मक्का, चुकंदर, कसावा, आलू और अन्य जैविक पदार्थों का भी उपयोग किया जा सकता है।
इथेनॉल के अलग-अलग प्रकार
इथेनॉल उत्पादन की तकनीक और कच्चे माल के आधार पर इसे विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाता है।
फर्स्ट जनरेशन इथेनॉल
यह सीधे खाद्य या कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। गन्ने का रस, मक्का, मीठा ज्वार, चुकंदर और अन्य स्टार्च युक्त फसलें इसके प्रमुख स्रोत हैं। वर्तमान में बड़े पैमाने पर इसी प्रकार का इथेनॉल बनाया जाता है।
सेकेंड जनरेशन इथेनॉल
इस श्रेणी में कृषि अपशिष्ट और जैविक अवशेषों का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए धान की पराली, गेहूं का भूसा, मक्के के डंठल, बांस और अन्य लिग्नोसेल्यूलोसिक सामग्री से इथेनॉल तैयार किया जा सकता है। यह तकनीक कृषि कचरे के बेहतर उपयोग का अवसर देती है।
थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल
यह भविष्य की तकनीक मानी जाती है। इसमें शैवाल (एल्गी) जैसे जैविक स्रोतों से ईंधन तैयार करने पर शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में ऊर्जा उत्पादन का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
किसानों और उद्योग को मिल सकता है फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यदि इथेनॉल की मांग तेजी से बढ़ती है तो गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की खपत भी बढ़ेगी। इससे कृषि क्षेत्र को नई बाजार संभावनाएं मिलेंगी।
दूसरी ओर, बायोफ्यूल उद्योग में भी बड़े निवेश की संभावना बनेगी। नए प्लांट स्थापित होने, उत्पादन क्षमता बढ़ने और सप्लाई चेन विकसित होने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सरकार लंबे समय से ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसी योजनाओं को इसी उद्देश्य से आगे बढ़ाया जा रहा है।
100 प्रतिशत इथेनॉल को मंजूरी मिलने के बाद भारत के पास एक और वैकल्पिक ऊर्जा मॉडल उपलब्ध होगा। यदि उत्पादन, वितरण और वाहन तकनीक से जुड़े सभी पहलू सफलतापूर्वक लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में देश के परिवहन क्षेत्र का स्वरूप काफी बदल सकता है।
फिलहाल सबकी नजरें उन नए वाहनों पर टिकी हैं जिन्हें प्रमुख ऑटो कंपनियां जल्द बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि यह पहल न केवल ईंधन खर्च कम करेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने और विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने जैसे कई लक्ष्यों को एक साथ हासिल करने में मददगार साबित होगी।




